बुद्धिलाल पाल की तीन कविताएं

बुद्धिलाल पाल

असंतोष
जनता का असंतोष
राजा के राज्य में
पानी के बुलबुलों-सा
उठता …… फुस्स हो जाता

राजा जनता को
स्वामी-भक्ति सिखाता
उसकी जड़ों में मठा डालता
जनता से हाय-हलो, कैसे हो कहता
दारू वालों को दारू
भीख वालों को भीख
निकम्मे ज्ञानवादियों को दान
अपने सूबेदारों को
सूबे दान में देता है
कभी-कभी जरूरतमंदों को
सहयोग करता चतुर ठग-सा
इस तरह
जनता की अकूत प्रतिरोध क्षमता को
अपने बस्तों में लपेटकर रखता

राज भक्ति में डूबी जनता
अपनी परिस्थितियों पर
चीखती चिल्लाती रोती
जनता का असंतोष हमेशा
राजभक्ति में घुटने टेकता
बस्स! चैराहों में बड़बड़ाता भर।

विश्वास-अंधविश्वास

जनता ठीक-ठीक
अपने विश्वासों के
आसपास होती है

उसे विश्वास है
ईश्वर सबका भला करता है

उसे विश्वास है
यज्ञ और आहुतियों से
विश्व का कल्याण होता है
इसलिये वह इन सबके
आसपास होती है

उसे विश्वास है
इस लोक में उसे जो नहीं मिला
परलोक में मिलेगा
इसलिये
वह परलोक के
आसपास होती है

उसे विश्वास है
ईश्वर की कृपा से ही
धन, धान्य, कीर्ति
पुत्ररत्न की प्राप्ति होती है
इसलिये वह उसकी कृपा के
आसपास होती है

उसे विश्वास है
ईश्वर अंधों को आॅंख देता है
रोगी को निरोगी काया
इसलिये वह उसकी याचना में
उसके आसपास होती है

उसे विश्वास है
उसके सभी दुखों का निवारण
ईश्वर ही कर सकता है
इसलिये उसकी प्रार्थना में
उसके आसपास होती है

उसे विश्वास है
विज्ञान उसकी आस्था को
कुंद करता है
तर्क उसे नर्क ले जाते हैं
इसलिये वह ईश्वर में ही
तर्क और विज्ञान को गढ़ती है
और ठीक-ठीक अपने विश्वासों के
आसपास होती है।

डर

डर
कुंडली मार कर
जब बैठ जाये
तब फुंफकारने लगता है
साॅंप जैसा

डर
जब पेट के अंदर सिकुड़ता है
तो सरपट भागता
खोजता सुरक्षित स्थान
कोई अंधेरी सुरंग
या बिल में घुस जाता है
चूहे जैसा

डर
डरकर समूह बनाता
या उकसाता लोगों को
कबीलाई युद्धों के लिए

डर
राजा भी बनना चाहता है
अपनी जीत के लिये
फासीवाद की तरह
उन्मादी होता है

डर
अपनी जीत पर
बहुत महत्वाकांक्षी
साम्राज्यवादी होता है

डर
खतरनाक होता है
डर के जबड़ों में
जहरीले दांत भी होते हैं
काट लेता है
निर्दोष को भी

डर कहता तो है
वह जंगल के खिलाफ है
पर बदहवाश होता है
रचता है दूसरा जंगल

डर को
डर दिखाकर
दिग्भ्रमित किया जाता है
डर की राजनीति
खूब फलती-फूलती है

डर से
मुक्ति आवश्यक है
डर से मुक्ति की चिंता करना
दुनिया की चिंता करना है।
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बुद्धिलाल पाल
प्रकाशित कृतियाॅं – 1. चाॅंद जमीन पर   (काव्य संग्रह)
2. एक आकाश छोटा सा (काव्य संग्रह)
1.      राजा की दुनिया (काव्य संग्रह)
अन्य- देश की साहित्यिक पत्र, पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन।
पता- एमआईजी. 562, न्यू बोरसी, दुर्ग (छ.ग.) पिन कोड-491001

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