Category: कवि-कथा

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आम आदमी का संत्रास बयां करने वाले कवि विनय सौरभ

शहंशाह आलम इस हफ्ते के कवि:  विनय सौरभ एक गोरखा गुज़रा है सीटी बजाता हुआ संदर्भ : विनय सौरभ की कविताएँ शहंशाह आलम संथाल परगना का यह छोटा-सा गाँव : नोनीहाट जो असल में अब गाँव भी नहीं रहा क़स्बा कह सकते हो लेकिन इसकी पहचान पर अब शहर के...

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औजार की तरह भाषा का इस्तेमाल करते उमाशंकर सिंह परमार

शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’, ‘थिरक रहा देह का पानी’ छह कविता-संग्रह तथा आलोचना की पहली किताब ‘कवि...

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तुम्हारे मौन का गट्ठर लिए घूम रहा

शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’, ‘थिरक रहा देह का पानी’ छह कविता-संग्रह तथा आलोचना की पहली किताब ‘कवि...

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हाथ में उजाला लेकर चलने वाला कवि

शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’, ‘थिरक रहा देह का पानी’ छह कविता-संग्रह तथा आलोचना की पहली किताब ‘कवि...