Category: गद्य

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एक कवि की डायरी : भाग 2

जयप्रकाश मानस संपादक, www.srijangatha.com कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक) एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा रायपुर, 9 अप्रैल, 2011 ज़िम्मेदारी अन्ना ने जीतना सिखा दिया, अब यह करोड़ों लोगों की ज़िम्मेदारी है कि वे ना तो ख़ुद भ्रष्ट हों, ना दूसरे को भ्रष्टाचार करने दें, आयेगी यह नैतिकता क्या सारे लोगों में...

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कविता बनाम ग़ज़ल : भाग एक

    सुशील कुमार जन्म-13/09/ 1964. पटना सिटी (बिहार) में। सम्प्रति : मानव संसाधन विकास विभाग,रांची (झारखंड) में कार्यरत । संपर्क –  सहायक निदेशक/प्राथमिक शिक्षा निदेशालय/ स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग/एम डी आई भवन(प्रथम तल)/ पोस्ट-धुर्वा/रांची (झारखंड)–834004 ईमेल –sk.dumka@gmail. com मोबाइल न. –09431310216 / 09006740311 प्रकाशित कृतियां– कविता-संग्रह कितनी रात...

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रिजवान अली की कहानी ‘वो ठंडी रात’

अली रिज़वान शिक्षा- जामिया मिलिया इस्लामिया नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता। लेखन- तहलका हिंदी में आपबीती कलम के लिए लिख चुके हैं। इंडिया न्यूज़ में काम कर चुके हैं। आजकल यूट्यूब चैनल कहानी डिपो में कार्य कर रहे हैं। मोबाइल- 9717583570 केशव को दिल्ली आये अभी 6 महीने ही हुए थे और इसी...

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एक कवि की डायरी

जयप्रकाश मानस संपादक, www.srijangatha.com कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक) एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा रायपुर, छत्तीसगढ़-492001 मो.-94241-82664 23 सितंबर 2009 आम आदमी के पास ऊर्जा नगरी कोरबा में हाहाकार मचा हुआ है । बुरी-ख़बर से मन व्याकुल है । कोरबा, एनटीपीसी, छत्तीसगढ़ के पावर प्लांट में लगी चिमनी के ढह जाने...

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संजीव ठाकुर की बाल कथा ‘जालिम सिंह’

स्कूल का चपरासी बच्चों को बहुत बदमाश लगता था। बच्चे उसे जालिम सिंह नाम से पुकारते थे। जालिम सिंह स्कूल के बच्चों पर हमेशा लगा ही रहता था। किसी को मैदान में दौड़ते देखता तो गुस्साता, झूले पर अधिक देर झूलते देखता तो गुस्साता। कोई बच्चा फूल तोड़ लेता तब...

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शहादत ख़ान की कहानी वेलेंटाइन डे

शहादत शिक्षा-           दिल्ली विश्वविद्यालय के भीमराव अंबेडर कॉलेज से बी.ए. (विशेष) हिंदी पत्रकारिता। संप्रीति-         रेख़्ता (ए उर्दू पोएट्री साइट) में कार्यरत। मोबाईल-        7065710789 दिल्ली में निवास। कथादेश, नया ज्ञानोदय, समालोचना, कथाक्रम, स्वर्ग विभा, परिवर्तन, ई-माटी और जनकृति सहित आदि पत्रिकाओं में कहानियां प्रकाशित। वेलेंटाइन-डे...

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सेवा सदन प्रसाद की लघुकथा ‘चैट’

  सेवा सदन प्रसाद — हेलो , सलमा कैसी हो  ? — बस ठीक हूं यार – – जरा क्रिकेट का बुखार चढ़ा है । — इधर भी वही हाल है – –  मैं तो सचिन के बैटिंग की दीवानी थी पर अब विराट भी अच्छा लगने लगा है ।...

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सविता मिश्रा की लघुकथा ‘परिपाटी’

सविता मिश्रा w/o देवेन्द्र नाथ मिश्रा (पुलिस निरीक्षक ) फ़्लैट नंबर -३०२ ,हिल हॉउस खंदारी अपार्टमेंट , खंदारी आगरा २८२००२ अपनी बहन की शादी में खींची गयी उस अनजान लड़की की तस्वीर को नीलेश जब भी निहारता, तो सारा दृश्य आँखों के सामने यूँ आ खड़ा होता, जैसे दो साल...

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समीर कुमार ठाकुर की कहानी “लव यू डैड”

समीर कुमार ठाकुर समीर नवोदित कथाकार हैं। लिटरेचर प्वाइंट में उनकी ये पहली कहानी प्रकाशित हो रही है। उम्मीद है वो और बेहतर लिखेंगे। ‘पापा..पाप..’ राहुल गुस्से में चिल्लाते हुए पापा केे कमरे में आया, ‘नेट क्यों नहीं चल रहा है पाप? मैंने आप से कहा था कि आप ठीक...

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डाॅ. मृणालिका ओझा की कहानी ‘पिता, जाने के बाद’

  उस वक्त भैया गए थे, पिता जी के साथ, उनके अंतिम प्रवास पर। नाव पर नाविक भी था और जीजा जी भी। आज बीच संगम, नदियों के मंझधार, वे पिताजी को पूरी तरह छोड़ आएंगे। अब वे पिताजी की अत्यधिक पानी खर्चने की आदत से परेशान नहीं होंगे। बीच...

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हमारी भी छापो! हम भी लेखक-वेखक हैं!

व्यंग्य आलोक प्रकाश एक बहुत ही गुणी साहित्यकार हैं. मुझ से उम्र में बड़े हैं. उनका लिहाज करता हूँ मैं. सर कहकर संबोधित करता हूँ उनको. फ़ेसबुक पर उन्होंने एक ग्रुप बनाया हुआ है. इसमें हम साहित्यकारों की कृतियाँ प्रकाशित होती हैं. ग्रुप तो दूसरे भी हैं लेकिन उनका  स्टैंडर्ड मेरे स्टैंडर्ड...

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प्यार करना रचनाकार होना है

  वेद प्रकाश प्यार एक सहज व्यक्ति की सहज अभिव्यक्ति है । हम इसे श्रेणियों में विभक्त नहीं कर सकते । एक मन से दूसरे मन की आभासी बातचीत जब रूपाकार होने लगती है, तो प्रेम का स्वरूप तैयार होने लगता है । यह किसी को बताया नहीं जाता और...

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जीवन की कठोरता से साक्षात्कार

पुस्तक समीक्षा  संजीव ठाकुर कहानियों के साथ –साथ रिपोर्ताज लिखने वाले हिन्दी –लेखक सत्यनारायण के बारे में यह कहना शायद अत्युक्ति नहीं होगी कि वह अपनी कहानियों से ज्यादा रिपोर्ताजों के कारण जाने जाते हैं । समीक्ष्य पुस्तक उनके रिपोर्ताजों की पाँचवीं पुस्तक है । हालांकि ‘कथादेश’ में स्तंभ के...

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सविता मिश्रा की दो लघुकथाएं

एक “क्या हुआ बेटा ? तेरी आवाज क्यों काँप-सी रही हैं ? जल्दी से बता ..हुआ क्या ..?” “माँ वो गिर गया था सुबह-सुबह…।” “कैसे, कहाँ गिरा, ज्यादा लगी तो नहीं ? डॉक्टर को दिखाया! क्या बताया डॉक्टर ने ?” “न माँ ज्यादा तो नहीं लगी, पर डॉक्टर कह रहे...

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वर्जनाओं को तोड़ती कहानियों का संग्रह ‘इश्क़ की दुकान बंद है’

पुस्तक समीक्षा सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव जिस्म मुहब्बत की प्रेरक तत्व है। जब किसी को देखकर दिल धड़क उठता है, उसकी मुहब्बत में पागल हो जाता है तो इसका मतलब है कि आंखों ने जिस खूबसूरती को देखा, दिल उसका दीवाना हो गया। इस बात से इनकार करना सच्चाई को नकारना...

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बेखौफ़ होकर सच बोलतीं कविताएं

पुस्तक समीक्षा सत्येन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव रोहित कौशिक के कविता संग्रह ‘इस खंडित समय में’ की समीक्षा जिस समाज में नफ़रत फैलाने वालों को सम्मानित किया जा रहा हो, वह समाज जाहिर तौर अपने पतन के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा होगा। ऐसे समाज में सच बोलने वाले या तो...

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कविता में भाषा की खोज

शहंशाह आलम मेरे मन में अक्सर यह प्रश्न आता.जाता रहा है कि भाषा का काम क्या है? मैं सोचता हूँ (मेरा ऐसा सोचना भाषा के विद्वान अध्येता की दृष्टि में किसी जाहिल, किसी अपढ़, किसी बच्चे का सोचा हुआ कहा जा सकता है, तब भी मैं अपने इस सोचे को...

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सुशांत सुप्रिय की कहानी ‘विवशता’

जब सुबह झुनिया वहाँ पहुँची तो बंगला रात की उमस में लिपटा हुआ गर्मी में उबल रहा था । सुबह सात बजे की धूप में तल्ख़ी थी । वह तल्ख़ी उसे मेम साहब की तल्ख़ ज़बान की याद दिला रही थी । बाहरी गेट खोल कर वह जैसे ही अहाते...

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अर्नेस्ट हेमिंग्वे की कहानी ‘इन अनदर कंट्री’

अमेरिकी कहानी दूसरे  देश में मूल लेखक : अर्नेस्ट हेमिंग्वे अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद : सुशांत सुप्रिय शरत् ऋतु में भी वहाँ युद्ध चल रहा था , पर हम वहाँ फिर नहीं गए । शरत् ऋतु में मिलान बेहद ठण्डा था और अँधेरा बहुत जल्दी घिर आया था । फिर...