Category: गद्य

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सेवा सदन प्रसाद की लघुकथा ‘चैट’

सेवा सदन प्रसाद — हेलो , सलमा कैसी हो  ?– बस ठीक हूं यार – – जरा क्रिकेट का बुखार चढ़ा है ।– इधर भी वही हाल है – –  मैं तो सचिन के बैटिंग की दीवानी थी पर अब विराट भी अच्छा लगने लगा है ।— मुझे वसीम अकरम...

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सविता मिश्रा की लघुकथा ‘परिपाटी’

सविता मिश्राw/o देवेन्द्र नाथ मिश्रा (पुलिस निरीक्षक )फ़्लैट नंबर -३०२ ,हिल हॉउसखंदारी अपार्टमेंट , खंदारीआगरा २८२००२ अपनी बहन की शादी में खींची गयी उस अनजान लड़की की तस्वीर को नीलेश जब भी निहारता, तो सारा दृश्य आँखों के सामने यूँ आ खड़ा होता, जैसे दो साल पहले की नहीं, कुछ...

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समीर कुमार ठाकुर की कहानी “लव यू डैड”

समीर कुमार ठाकुरसमीर नवोदित कथाकार हैं। लिटरेचर प्वाइंट में उनकी ये पहली कहानी प्रकाशित हो रही है। उम्मीद है वो और बेहतर लिखेंगे। ‘पापा..पाप..’ राहुल गुस्से में चिल्लाते हुए पापा केे कमरे में आया, ‘नेट क्यों नहीं चल रहा है पाप? मैंने आप से कहा था कि आप ठीक करवा...

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डाॅ. मृणालिका ओझा की कहानी ‘पिता, जाने के बाद’

  उस वक्त भैया गए थे, पिता जी के साथ, उनके अंतिम प्रवास पर। नाव पर नाविक भी था और जीजा जी भी। आज बीच संगम, नदियों के मंझधार, वे पिताजी को पूरी तरह छोड़ आएंगे। अब वे पिताजी की अत्यधिक पानी खर्चने की आदत से परेशान नहीं होंगे। बीच...

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हमारी भी छापो! हम भी लेखक-वेखक हैं!

व्यंग्य आलोक प्रकाश एक बहुत ही गुणी साहित्यकार हैं. मुझ से उम्र में बड़े हैं. उनका लिहाज करता हूँ मैं. सर कहकर संबोधित करता हूँ उनको. फ़ेसबुक पर उन्होंने एक ग्रुप बनाया हुआ है. इसमें हम साहित्यकारों की कृतियाँ प्रकाशित होती हैं. ग्रुप तो दूसरे भी हैं लेकिन उनका  स्टैंडर्ड मेरे स्टैंडर्ड...

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प्यार करना रचनाकार होना है

  वेद प्रकाश प्यार एक सहज व्यक्ति की सहज अभिव्यक्ति है । हम इसे श्रेणियों में विभक्त नहीं कर सकते । एक मन से दूसरे मन की आभासी बातचीत जब रूपाकार होने लगती है, तो प्रेम का स्वरूप तैयार होने लगता है । यह किसी को बताया नहीं जाता और...

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जीवन की कठोरता से साक्षात्कार

पुस्तक समीक्षा  संजीव ठाकुर कहानियों के साथ –साथ रिपोर्ताज लिखने वाले हिन्दी –लेखक सत्यनारायण के बारे में यह कहना शायद अत्युक्ति नहीं होगी कि वह अपनी कहानियों से ज्यादा रिपोर्ताजों के कारण जाने जाते हैं । समीक्ष्य पुस्तक उनके रिपोर्ताजों की पाँचवीं पुस्तक है । हालांकि ‘कथादेश’ में स्तंभ के...

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कविता में भाषा की खोज

शहंशाह आलम मेरे मन में अक्सर यह प्रश्न आता.जाता रहा है कि भाषा का काम क्या है? मैं सोचता हूँ (मेरा ऐसा सोचना भाषा के विद्वान अध्येता की दृष्टि में किसी जाहिल, किसी अपढ़, किसी बच्चे का सोचा हुआ कहा जा सकता है, तब भी मैं अपने इस सोचे को...

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सुशांत सुप्रिय की कहानी ‘विवशता’

जब सुबह झुनिया वहाँ पहुँची तो बंगला रात की उमस में लिपटा हुआ गर्मी में उबल रहा था । सुबह सात बजे की धूप में तल्ख़ी थी । वह तल्ख़ी उसे मेम साहब की तल्ख़ ज़बान की याद दिला रही थी । बाहरी गेट खोल कर वह जैसे ही अहाते...

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अर्नेस्ट हेमिंग्वे की कहानी ‘इन अनदर कंट्री’

अमेरिकी कहानी दूसरे  देश में मूल लेखक : अर्नेस्ट हेमिंग्वे अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद : सुशांत सुप्रिय शरत् ऋतु में भी वहाँ युद्ध चल रहा था , पर हम वहाँ फिर नहीं गए । शरत् ऋतु में मिलान बेहद ठण्डा था और अँधेरा बहुत जल्दी घिर आया था । फिर...