Category: गद्य

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विष्णु खरे को हार्दिक श्रद्धांजलि

कवि-आलोचक-संपादक विष्णु खरे का जाना सचमुच हिन्दी साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है। लिटरेचर प्वाइंट की ओर से उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि। वे हमारे दिलों में अमर रहेंगे। उनकी इस कविता को पढ़िए और महसूस कीजिए कि वो कितने महान कवि थे।   नींद में कैसे मालूम कि जो नहीं रहा...

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विनोद कुमार दवे की कहानी ‘सहायता’

विनोद कुमार दवे बस में बैठे-बैठे मैंने अनुमान लगाया, जयपुर पहुंचते पहुंचते बारह बज जाएंगे। जगह-जगह बस का रुकना मुझे बेचैन कर रहा था, अभी सात घंटे बाकी थे। इतना लंबा वक़्त बस में काटना बहुत मुश्किल है। मैं पछता रहा था, ट्रेन से आता तो बहुत सुविधाजनक रहता। “खैर...

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सुशान्त सुप्रिय की कहानी ‘और फिर अंधेरा’

सुशान्त सुप्रिय अमेजन पर अभी बुक करें। कवर पेज पर क्लिक करें इस माह के आखिरी हफ्ते में प्रकाश्य प्रिय गुरमीत ,                       यहाँ हैवलॉक द्वीप , अंडमान के डॉल्फ़िन गेस्ट हाउस से मैंने पिछले हफ़्ते भी तुम्हें पत्र लिखा था  पर तुमने इस पते पर मेरे पत्र का जवाब नहीं दिया है । क्या तुम मुझे पत्र लिखने का अपना वादा भूल गए हो? पिताजी बता रहे हैं कि वहाँ दिल्ली में बहुत गड़बड़ चल रही है । पिछले हफ़्ते से विश्व की सभी प्रमुख महाशक्तियाँ विनाशकारी तृतीय विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़ी हैं । पिताजी का कहना है किअमेरिका और यूरोपीय देश एक ओर हैं जबकि चीन , रूस और उत्तर कोरिया दूसरी ओर हैं । चारो ओर भयऔर आतंक का माहौल छाया हुआ है । डाक-व्यवस्था भी बाधित हुई होगी । शायद इसीलिए तुम्हारी लिखी चिट्ठी मुझे नहीं मिली है । वहाँ हमारा दोस्त नफ़ीस  कैसा है ? और जेनेलिया कैसी है ?  मैं तुम्हारे और  स्कूल के सभी दोस्तों के लिए चिंतित हूँ । सच कहूँ तो मुझे पिताजी की तृतीय विश्वयुद्ध वाली बात पर पूरा यक़ीन नहीं है । हो सकता है , वहाँ दिल्ली में सब ठीक हो और तुमने आलस के मारे मुझे पत्र लिखा ही नहीं हो । हमें यहाँ अंडमान के हैवलॉक द्वीप आए हुए एक हफ़्ते से ज़्यादा समय हो गया है । तुम्हें पता है , मम्मी तो यहाँ आना ही नहीं चाहती थी । वह तो कश्मीर जाना चाहती थी , पर पिताजी हम सब को मना कर यहाँ ले आए । वैसे मेरी  इच्छा शुरू से ही अंडमान के जंगलों में घूमने की थी । अब तो मम्मी को भी यहाँ के समुद्र-तट और यहाँ की हरियाली अच्छी लगने लगी है । इस बीच वहाँ दिल्ली में रितिक रोशन की नई फ़िल्म  लगने वाली थी । जब मैं वापस आऊँगा और सब ठीक होगा तो हम दोनों अपने पापा-मम्मी के साथ इकट्ठे वह फ़िल्म देखने जाएँगे । यहाँ डॉल्फ़िन गेस्ट हाउस के पास के ‘ बीच ‘ से समुद्र में सूर्योदय और सूर्यास्त बहुत सुंदर लगते हैं । पास ही मछलियों से भरी एक छोटी सी नदी भी बह रही है । हमें बहुत मज़ा आ रहा है । हमने बहुत सारी तस्वीरें खींची हैं । जब मैं वापस दिल्ली आऊँगा तब तुम्हें ये सारी सुंदर फ़ोटो दिखाऊँगा । हमारे पड़ोस में  केरल का एक परिवार ठहरा हुआ है । अंकल-आंटी के साथ एक प्यारी-सी छोटी बच्ची भी है । मैं उसके साथ खेलता हूँ । तुम्हारी बहुत याद आ रही है । तुम कैसे हो ? मैं मोबाइल फ़ोन पर तुमसे बात करना चाहता था पर इन  दिनों यहाँ कोई भी फ़ोन काम नहीं कर रहा । पोस्ट-ऑफ़िस यहाँ से दूर है । यहाँ के रसोइया माइकेल अंकल हफ़्ते में दो बार दूर के बाज़ार जा कर खाने-पीने का सामान ख़रीद लाते हैं । लौटते हुए वे डाक-घर से यहाँ की चिट्ठियाँ भी ले आते हैं । तुम्हारी चिट्ठी की प्रतीक्षा है , दोस्त । — तुम्हारा मित्र , पलाश ।...

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आशीष कुमार त्रिवेदी के उपन्यास ‘तुम्हारे लिए’ का एक अंश

नीचे की पुस्तकों को पढ़ने के लिए तस्वीर पर क्लिक करें उपन्यास अंश आशीष कुमार त्रिवेदी के उपन्यास ‘तुम्हारे लिए’ का एक अंश मदन से मिलने के बाद से जय और भी बेचैन हो गया था। मन में उथल पुथल मची थी। इतना सब कुछ होने के बाद भी क्या...

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रंजना जायसवाल की कहानी ‘कैसे लिखूं उजली कहानी’

रंजना जायसवाल जन्म  : ०३ अगस्त को पूर्वी उत्तर-प्रदेश के पड़रौना जिले में | शिक्षा –गोरखपुर विश्वविद्यालय से “’प्रेमचन्द का साहित्य और नारी-जागरण”’ विषय पर पी-एच.डी | प्रकाशन –आलोचना ,हंस ,वाक् ,नया ज्ञानोदय,समकालीन भारतीय साहित्य,वसुधा,वागर्थ,संवेद सहित राष्ट्रीय-स्तर की सभी पत्रिकाओं तथा जनसत्ता ,राष्ट्रीय सहारा,दैनिक जागरण,हिंदुस्तान इत्यादि पत्रों के राष्ट्रीय,साहित्यिक परिशिष्ठों...

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संजीव ठाकुर की बाल-कथा ‘डरपोक’

संजीव ठाकुर सीतेश पूरे हॉस्टल में बदनाम था। उसकी बदनामी इस बात में थी कि वह न तो कभी ठीक से नहाता था, न ही ढंग से कपड़े पहनता था और न ही बिस्तर ठीक करता था। उसकी किताबें-कापियाँ वगैरह भी जैसे-तैसे ही रहती थीं। वह कभी भी समय पर...

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चांदनी सेठी कोचर की लघुकथा ‘कामवाली’

चादनी सेठी कोचर रेणु की काम वाली सुनीता उसके घर में पिछले 4 साल से काम कर रही थी। दोनों एक दूसरे को बखूबी समझते थे लेकिन आज सुनीता को काम पर आने में थोड़ी देर क्या हुई, रेणु उस पर चिल्लाने लगी। “क्या बाता है सुनीता, आज तुमने आने...

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हम सब जिसे शबाना के नाम से जानते हैं

पुस्तक समीक्षा मैं शबाना ( उपन्यास ) लेखक : यूसुफ़ रईस  प्रकाशक : नोशन प्रेस ( इंडिया, सिंगापुर, मलेशिया ), ओल्ड नं. 38, न्यू नं. 6, मैक निकोल्स रोड, चैटपट, चेन्नई – 600 013 मूल्य : ₹ 199 मोबाइल संपर्क : 09829595160 शहंशाह आलम शहंशाह आलम हम सब जिसे शबाना...

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सुशांत सुप्रिय की कहानी ‘गलती’

सुशांत सुप्रिय A-5001 , गौड़ ग्रीन सिटी , वैभव खंड , इंदिरापुरम् , ग़ाज़ियाबाद – 201014 ( उ. प्र. ) मो : 8512070086 ई-मेल : sushant1968@gmail शुक्लाजी ने चश्मा लगाया , थैला उठाया , छड़ी ली और बाज़ार से दूध , सब्ज़ी और अन्य सामान लाने के लिए धीमी चाल...

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आशीष श्रीवास्तव की लघु कथा ‘तबीयत’

आशीष श्रीवास्तव पिछले एक सप्ताह से राकेश कार्यालय आता और अपने कार्यालयीन सहयोगी नरेश को काम में सहयोग करने के लिए कहता, फिर बहुत-सा काम बताकर चला जाता। कहता : पिताजी की तबियत ठीक नहीं है उन्हें दिखाने जाना है, भाई संभाल ले। नरेश  ने संवेदनशीलता और गंभीरता दिखाई और...

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सुशान्त सुप्रिय की कहानी ‘मिसफिट’

सुशान्त सुप्रिय मार्फ़त श्री एच. बी. सिन्हा , 5174, श्यामलाल बिल्डिंग , बसंत रोड, ( निकट पहाड़गंज ) , नई दिल्ली – 110055 मो:  8512070086 ई-मेल: sushant1968@ gmail.com उसका सिर तेज़ दर्द से फटा जा रहा था । उसने पटरी से कान लगा कर रेलगाड़ी की आवाज़ सुननी चाही । कहीं कुछ नहीं था । उसने जब-जब जो जो चाहा, उसे नहीं  मिला । फिर आज  उसकी  इच्छा   कैसे  पूरी हो सकती थी । पटरी  पर लेटे-लेटे उसने कलाई-घड़ी देखी ।  आधा घंटा ऊपर हो चुका था पर इंटरसिटी एक्सप्रेसका कोई अता-पता  नहीं  था । इंटरसिटी एक्सप्रेस न सही , कोई पैसेंजर गाड़ी ही सही । कोई मालगाड़ी ही सही । मरने वाले को इससे क्या लेना-देना  कि  वह  किस गाड़ी  के  नीचे  कट  कर  मरेगा ।  उसके सिर के भीतर कोई हथौड़े चला रहा था । ट्रेन उसे क्या मारेगी, यह सिर-दर्द ही उसकी जान ले लेगा — उसने सोचा । शोर भरी गली में एक लंबे सिर-दर्द  का नाम ज़िंदगी है । इस ख़्याल से ही उसके मुँह में एक कसैला स्वाद भर गया । मरने के समय मैं भी स्साला फ़िलास्फ़र हो गया हूँ — सोचकर वह पटरी पर लेटे-लेटे ही मुस्कराया । उसका हाथ उसके पतलून की बाईं जेब में गया । एक अंतिम सिगरेट सुलगा लूँ । हाथ विल्स का पैकेट लिए बाहर  आया  पर  पैकेट  ख़ाली  था ।  दफ़्तर से चलने से पहले ही उसने पैकेट की अंतिम सिगरेट पी ली थी — उसे याद आया । उसके होठों पर गाली आते-आते रह गई । आज सुबह से ही दिन जैसे उसका बैरी हो गया था ।सुबह पहले पत्नी से खट-पट हुई । फिर किसी बात पर उसने बेटे को पीट दिया । दफ़्तर के लिए निकला  तो  बस...

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अख़बारी नरक की आधी हक़ीक़त

लघु उपन्यास : आधी हक़ीक़त लेखक : शैलेंद्र शान्त प्रकाशक : बोधि प्रकाशन मूल्य : 80 रुपए सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव दूर से जो चीज़ बहुत खूबसूरत और आकर्षक लगती है, जरूरी नहीं कि नजदीक जाने पर भी वो वैसा ही लगे। पत्रकारिता के साथ भी कुछ-कुछ ऐसा ही है। वरिष्ठ...

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मौजूदा राजनीति पर व्यंग्यात्मक उपन्यास ‘प्रजातंत्र के पकौड़े’

किंडल ई बुक : प्रजातंत्र के पकौड़े व्यंग्यात्मक उपन्यास लेखक :  राकेश कायस्थ मूल्य :  49 रुपए सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव आधुनिक हिन्दी व्यंग्य में राकेश कायस्थ ने अपनी एक अलग और मुकम्मल पहचान बनाई है। आज जब व्यंग्य के नाम पर इतना कूड़ा लिखा जा रहा है कि इस विधा...

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उदयराज की कहानी ‘विश्वास-यात्रा’

उदयराज रितेश और मोहिनी बड़ी सतर्कता से प्लेटफॉर्म पर पहुंच एक कोने में दुबकने के अंदाज़ में बैठ गए। दिल्ली के लिए टिकट आते ही ले लिया था। उनकी नज़रें निरंतर प्लेटफॉर्म पर आने के सभी प्रवेश द्वारों पर घूम रही थीं और कान अनाउंसमेंट पर लगा हुआ था। यूं...

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ये लाल रंग है सृजन का…

संजय स्वतंत्र पड़ोस के पांडे जी के घर से उनकी पत्नी के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुन कर मेरी नींद टूट गई है। सौतेली मां बेटी पर बुरी तरह बरस रही है। घर की इकलौती मासूम सुबक रही है-‘मम्मी फिर गंदा नहीं होगा।’ ….. मैं शोरगुल सुन कर दरवाजे के पास...

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उम्मीद बंधाती कविताएं

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव युवा कवि मनोज चौहान की कविताओं में एक तड़प है। समाज में लगातार बढ़ती असानता उनकी इस तड़प को बढ़ाती जाती हैं और ये तड़प उनकी कविताओं में प्रभावी ढंग से उभर कर आती है। उनके पहले कविता संग्रह ‘पत्थर तोड़ती औरत’ के टाइटल ने ही चौंकाया...

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आदमी को मुकम्मल बनाने वाली कविताएं

शहंशाह आलम आनन्द गुप्ता जन्म : 19 जुलाई 1976, कोलकाता शिक्षा : कलकत्ता विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर प्रकाशन : देश की कुछ महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में कविताओं का प्रकाशन। कुछ आलेख भी प्रकाशित। कई ब्लॉग पर कविताएँ प्रकाशित। कुछ भारतीय भाषाओं में कविताओं के अनुवाद प्रकाशित। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन...

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सादगी और आत्मीयता का पारस्परिक रचाव

उमाशंकर सिंह परमार भास्कर चौधुरी छत्तीसगढ़ के हैँ, युवा कवि हैं, गद्य और पद्य दोनों में समान हस्तक्षेप रखते हैँ। मैंने उनका लिखा जो भी पढ़ा है, उस आधार पर मेरी मान्यता है कि भास्कर कवियों की भारी भरकम भीड़ में बड़ी दूर से पहचाने जा सकते हैं । वह...

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राजगोपाल सिंह वर्मा की कहानी ‘…सोलह प्रेम पत्र’

राजगोपाल सिंह वर्मा पत्रकारिता तथा इतिहास में स्नातकोत्तर शिक्षा. केंद्र एवम उत्तर प्रदेश सरकार में विभिन्न मंत्रालयों में प्रकाशन, प्रचार और जनसंपर्क के क्षेत्र में जिम्मेदार वरिष्ठ पदों पर कार्य करने का अनुभव. पांच वर्ष तक प्रदेश सरकार की साहित्यिक पत्रिका “उत्तर प्रदेश “ का स्वतंत्र सम्पादन. इससे पूर्व उद्योग मंत्रालय तथा स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत...

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आम आदमी का संत्रास बयां करने वाले कवि विनय सौरभ

शहंशाह आलम इस हफ्ते के कवि:  विनय सौरभ एक गोरखा गुज़रा है सीटी बजाता हुआ संदर्भ : विनय सौरभ की कविताएँ शहंशाह आलम संथाल परगना का यह छोटा-सा गाँव : नोनीहाट जो असल में अब गाँव भी नहीं रहा क़स्बा कह सकते हो लेकिन इसकी पहचान पर अब शहर के...