Category: गद्य

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वरिष्ठ कथाकार रमेश उपाध्याय से सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की बातचीत

हिन्दी साहित्य में एक आंदोलन की ज़रूरत रमेश उपाध्याय जन्म  : 1 मार्च 1942 शिक्षा : एमए, पीएचडी कार्य : एक दशक तक पत्रकार  रहने के बाद तीन दशकों तक दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। साहित्य और संस्कृति की पत्रिका ‘कथन’ के साथ-साथ ‘आज के सवाल’ नामक पुस्तक श्रृंखला का संपादन।...

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यारेग़ार : चरम अमानवीयता की संवेदनशील कहानी

संज्ञा उपाध्याय दिल्ली में जनमीं, पढ़ी-लिखीं संज्ञा उपाध्याय युवा संपादक, कहानीकार, फ़ोटोग्राफ़र और शिक्षक हैं. वे साहित्य और संस्कृति की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘कथन’ की संपादक हैं. ‘कथन’ के संपादन के लिए उन्हें स्पंदन साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से नवाजा गया.‘कथन’ के साथ उन्होंने पैंतीस पुस्तकों की चर्चित अनूठी श्रृंखला ‘आज के सवाल’...

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डॉ हंसा दीप की कहानी ‘हरा पत्ता पीला पत्ता’

डॉ. हंसा दीप मेघनगर, जिला झाबुआ, मध्यप्रदेश में जन्म। हिन्दी में पीएच.डी., यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो में लेक्चरार के पद पर कार्यरत। पूर्व में यॉर्क यूनिवर्सिटी, टोरंटो में हिन्दी कोर्स डायरेक्टर एवं भारतीय विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक। कैनेडियन विश्वविद्यालयों में हिन्दी छात्रों के लिए अंग्रेज़ी-हिन्दी में पाठ्य-पुस्तकों के कई संस्करण प्रकाशित। प्रसिद्ध...

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‘कविता लिखने से पहले नेक इंसान बनना ज़्यादा जरूरी’

वरिष्ठ कवि विजेंद्र से सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की ख़ास बातचीत लिटरेचर प्वाइंट संवाद वरिष्ठ कवि विजेंद्र 84 साल की उम्र में भी पूरी सक्रिय हैं. कविता लिखते हैं, पेंटिंग बनाते हैं। फेसबुक पर भी सक्रिय हैं। हिन्दी कविता में उनका स्थान क्या है, यह नए सिरे से बताने की जरूरत...

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स्त्री कथाकारों का ईमानदार मूल्यांकन

पत्रिका: लमही हमारा कथा समय विशेषांक, खंड एक प्रधान: संपादक विजय राय मूल्य: 50 रुपए पता: 3/343, विवेक खंड, गोमतीनगर, लखनऊ-226010 मोबाइल: 9454501011 सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका लमही का नया अंक (अप्रैल-सितम्बर संयुक्तांक) हर उस पाठक के लिए एक दुर्लभ उपहार की तरह है, जिसकी दिलचस्पी कहानियों में...

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सामाजिक विषमताओं पर प्रहार करती कविताएं

डॉ कृष्णकान्त द्विवेदी देश व प्रदेश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में  आलेख,कविताएँ व साक्षात्कार निरन्तर  प्रकाशित होते रहते हैं। आजकल, उत्तर प्रदेश, साहित्य अमृत जैसी प्रमुख पत्रिकाओं में   प्रकाशन।    सम्प्रति-:             सहायक प्रोफेसर    ( हिंदी) पं.सुंदरलाल मेमोरियल परास्नातक महाविद्यालय,कन्नौज   (उ प्र)     ई  मेल –  : krishnakantdubey394@ gmail. com...

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ग़ज़ल का क़द मनुष्यता से तो ऊँचा नहीं

ओम निश्चल हिंदी के सुपरिचित कवि, गीतकार एवं आलोचक। ‘शब्‍द सक्रिय हैं'(कविता संग्रह) एवं ‘शब्‍दों से गपशप'(आलोचना),  ‘भाषा की खादी'(निबंध) सहित भाषा व आलोचना-समीक्षा की अनेक कृतियां प्रकाशित। अज्ञेय सहित कई कवियों के कविता-चयन, अधुनांतिक बांग्ला कविता एवं कुंवर नारायण पर केंद्रित आलोचनात्‍मक पुस्‍तक ‘अन्‍वय’ एवं ‘अन्‍विति’ का संपादन। उत्तर...

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अंधेरे होते समय में उम्मीद की किरण है ‘काठ में कोंपल’

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव लंबी कहानी को निभाना बहुत कठिन होता है लेकिन अगर कहानीकार का नाम रमेश उपाध्याय हो तो फिर कुछ भी असंभव नहीं है। अपनी नई कहानी ‘काठ में कोंपल’ में रमेश जी ने यह चमत्कार कर दिखाया है। 6 अप्रैल को गांधी-शांति प्रतिष्ठान, आईटीओ में ‘कथा-कहानी’ की...

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रमेश उपाध्याय की कहानी ‘काठ में कोंपल’

रमेश उपाध्याय सम्मान गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार (केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा), साहित्यिक पत्रकारिता पुरस्कार (वनमाली सृजनपीठ, भोपाल), ‘नदी के साथ’ (उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा पुरस्कृत), ‘किसी देश के किसी शहर में’, ‘डॉक्यूड्रामा तथा अन्य कहानियाँ’ (दोनों पुस्तकें हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा पुरस्कृत) संपर्क 107, साक्षरा अपार्टमेंट्स, ए-3, पश्चिम...

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जिंदगी से अथक जंग की कहानियाँ

शैलेंद्र शांत   पुस्तक समीक्षा यह कोलकाता के कथाकार उदयराज जी की किताब के बाबत चंद बातें हैं। कहानियों की किताब, जिसमें छोटी-बड़ी कुल 17 कहानियां दर्ज हैं। लेखक की किताब का नाम “आरंभ” है, जो किताब के मामले में आरंभ ही है, यानी पहली किताब। उम्मीद की जाए कि...

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2020 के मानबहादुर सिंह लहक सम्मान की घोषणा

कोलकाता से प्रकाशित चर्चित पत्रिका ‘लहक’ 2020 के लिए मानबहादुर सिंह लहक सम्मान की घोषणा कर दी है। अगले वर्ष ये सम्मान मधुरेश और कांति कुमार जैन को प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान है, पुरस्कार नहीं। न ही इसमे किसी तरह की रचनाएँ आमन्त्रित की जाती हैं, न चयन की...

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आज के समय में ब्रेख्त

पटना के महाराजा कांप्लेक्स में स्थित टेक्नो हेराल्ड में साहित्यिक संस्था ‘जनशब्द’ द्वारा जर्मन के प्रसिद्ध कवि बरतोल्ट ब्रेख़्त पर केंद्रित समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित था। पहला सत्र ‘आज के समय में ब्रेख़्त’, जबकि दूसरा सत्र ब्रेख़्त को समर्पित कवि-सम्मेलन का था। कार्यक्रम...

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ओम नागर की 7 प्रेम कविताएं

ओम नागर 20 नवम्बर, 1980 को गाँव -अन्ताना, तहसील -अटरु, जिला- बारां  ( राजस्थान ) में  जन्मे ओम नागर ने कोटा विश्वविद्यालय,कोटा से  हिन्दी  एवं राजस्थानी में स्नातकोत्तर और  पी-एचडी की उपाधि प्राप्त की। हिन्दी एवं राजस्थानी साहित्य में कवि,अनुवादक और डायरी लेखक के रूप में  विशिष्ट पहचान रखने वाले युवा कवि- लेखक...

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कोलकाता में 2 दिवसीय साहित्यिक पत्रिका सम्मेलन

भारतीय भाषा परिषद ने 16-17 फरवरी को साहित्यिक पत्रिका सम्मेलन का आयोजन किया है, जिसमें देश भर से पहुंचने वाले संपादक-लेखक साहित्यिक पत्रिकाओं की दशा-दिशा, वर्तमान और भविष्य पर अपनी राय रखेंगे। भारतीय भाषा परिषद के प्रेक्षागृह में होने वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन प्रसिद्ध हिन्दी कथाकार गिरिराज...

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ऐसे होते हैं हमारे पहले के कवि

जबलपुर में कवि मलय से मुलाकात पर लिखा है डॉ करण सिंह चौहान ने अजीब बात थी कि मध्यप्रदेश के अधिकांश शहरों में जाना हुआ लेकिन जबलपुर में जाना यह पहली बार हुआ । और जाना भी क्या ऐसा-वैसा ! अपने वरिष्ठ कवि मलय का सम्मान करने के लिए जाना...

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हम हर बार ,बार बार मिलेंगे बाबा रहीमदास

मानबहादुर सिंह लहक सम्मान 2019 के चौथे आयोजन के तहत दिनांक 24- 01- 2019 को दोपहर एक बजे रामघाट चित्रकूट (नवगाँव) स्थित रहीम की कुटिया में कविता पाठ एवं परिचर्चा गोष्ठी सम्पन्न हुई । गोष्ठी का संयोजन युवा कवि नारायण दास गुप्त ने किया एवं अध्यक्षता डा़ कर्णसिंह चौहान ने...

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मौजूदा साहित्यिक परिदृश्य में लोकोदय प्रकाशन का ऐतिहासिक हस्तक्षेप

अगर समाज में सबकुछ ठीक हो, सबकुछ अनुकूल हो तो लेखक कुछ नहीं लिख पाएगा क्योंकि साहित्य की प्रासंगिकता विरोध में ही होती है। यह मानना है वरिष्ठ और मशहूर आलोचक कर्ण सिंह चौहान का। लखनऊ के लोकोदय प्रकाशन की ओर से “समकालीन साहित्यिक परिदृश्य और घटती पाठकीयता” विषय पर...

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डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी की 2 लघुकथाएं

मुखौटे साथ-साथ खड़े दो लोगों ने आसपास किसी को न पाकर सालों बाद अपने मुखौटे उतारे। दोनों एक-दूसरे के ‘दोस्त’ थे। उन्होंने एक दूसरे को गले लगाया और सुख दुःख की बातें की। फिर एक ने पूछा, “तुम्हारे मुखौटे का क्या हाल है?” दूसरे ने मुस्कुरा कर उत्तर दिया, “उसका...

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शिवदयाल के उपन्यास ‘एक और दुनिया होती’ का एक अंश

                       रात को ओढ़ने के लिए मेरे पास तो कुछ था नहीं। रात एक झोपड़ी के ओसारे में गुजारनी थी। पुआल का बिस्तर लगा और मुझे सहारा मिला बम्बइया से। उनके पास कंबल था। बीड़ी सुलगाने के पहले उन्होंने कंबल खोला और मुझ पर डाल दिया। कुछ इधर-उधर की बात...

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मीनू परियानी की लघुकथा ‘माता का जगराता’

सुबह से ही कोठी में रौनक थी। नौकर-चाकर सब दौड़ रहे थे। शाम को माता का जगराता जो होने वाला था। बेटा, बहू सब अति व्यस्त। आज सुबह से माँ कुछ अस्वस्थ थी। बेटा एक बार जाकर माँ का हाल पूछ आया था। बहू तो वैसे  ही अतिव्यस्त थी। ‘माँ को भी...