Category: गद्य

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चरित्रहीन

संजय स्वतंत्र उस दिन नोएडा जाने वाली मेट्रो के आखिरी कोच में सवार हुआ, तो मुझे नहीं पता था कि स्त्रियों को चरित्रहीनता का प्रमाणपत्र देने वाले उस शख्स से मेरी मुठभेड़ हो जाएगी। मैं दरवाजे के पास कोने की सीट पर बैठा नोटपैड पर लिख रहा था। बगल में...

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दिल्ली में कब मरी यमुना? यमुना का हत्यारा कौन?

नीलय उपाध्याय   कब मरी यमुना ? किसने मारा दिल्ली में यमुना को पता करना आसान है। वज़ीराबाद वो जगह है जहाँ कुछ दिन पहले सूर्य तनया यमुना का दिल्ली मे प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया। इस जगह पर बना बैराज यमुना की धार को आगे बढ़ने से रोक देता...

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आदमी और राजा

जयप्रकाश मानस 6 नवंबर, 2015 बेटियों के साथ कुछ पल फ़ैशन इंस्टीट्यूट (काईट कॉलेज, रायपुर) में पढ़-सीख रही हमारी बेटियों द्वारा दीपावली पर बहुत सारी चीज़ों के डिजाइनों की प्रदर्शनी और सेल में घूमते हुए आज लगा : “बेटियों की क्रियाशीलता को पहचानना और उन्हें सही दिशा में प्रोत्साहित करना...

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बारीआम के आम में अब वो स्वाद कहां!

आरती तिवारी अपनी जन्मभूमि की मिट्टी की सौंधी गन्ध कभी विस्मृत हुई है भला! हर मौसम हर सुबह हर शाम डायरी का एक सफ़ा है,..ज़रा सी हवा सहलाती है और एक सरसराहट सी होती है,..और यादों का एक खरगोश सरपट दौड़ने लगता है उन साफ-सुथरी,शफ्फाक सड़कों पर जिसे पकड़ने मेरा...

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बंद कमरे से आतीं चीखें

संजय स्वतंत्र उस शहर में किराए के दो कमरे वाला हमारा घर था। तब छठी कक्षा का विद्यार्थीं था। बस होश संभाल ही रहा था मैं। मकान मालिक की बेटी सुनीता मेरी अच्छी दोस्त बन गई थी। वह आठवीं में पढ़ती थी। बात बरसों पुरानी है। उस समय गुड्डे-गुड़ियों का...

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भैरव प्रसाद गुप्त : व्यक्तित्व के कुछ पहलू

कर्ण सिंह चौहान साहित्य से समाज के मन को बदलने की बात भले ही कुछ लोगों को नागवार गुजरे लेकिन ऐसा तो शायद ही कोई लेखक हो जो अपने लिखे को इतना अर्थहीन मानता हो कि अपने पाठक पर किसी प्रतिक्रिया की आशा ही न करे । सामाजिक परिवर्तन में...

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दूधनाथ सिंह कभी मरते नहीं, दिलों में रहते हैं

मैं मरने के बाद भी याद करूँगा तुम्हें तो लो, अभी मरता हूँ झरता हूँ जीवन की डाल से निरन्तर हवा में तरता हूँ स्मृतिविहीन करता हूँ अपने को तुमसे हरता हूँ ।”   इन पंक्तियों के रचयिता मशहूर साहित्यकार और साठोत्तरी कहानी के नायक दूधनाथ सिंह नहीं रहे। 11...

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‘राजनीतिक रूप से अशिक्षित व्यक्ति सबसे निकृष्ट अशिक्षित’

साहित्यिकी या राजनीति पश्चिमी दुनिया की तर्ज़ पर हिन्दी की कुछ गिनी चुनी पत्र-पत्रिकाएँ भी हर साल कथित श्रेष्ठता के अनुमापन के लिए अपने-अपने हिसाब से पुस्तक-पाठक सर्वेक्षण कराती रही हैं। ताज्जुब नहीं कि हर आयोजकों द्वारा घोषित संबंधित विधाओं की वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कृतियों की सूची एक-सी नहीं होती...

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देह में स्त्री या पुरुष होता ही है

जयप्रकाश मानस 29 अक्टूबर, 2015 मिस्र में टैगोर अहमद स्वाकी मिस्र के जाने-माने कवि थे । नाटककार भी । उन्हें आधुनिक मिस्र साहित्य का पायोनियर माना जाता है । उनका जन्म 16 अक्टूबर, 1868 में हुआ । 14 अक्टूबर 1932 तक उन्होंने अपने जीवन काल में कई नाटकों और कविताओं...

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हताश लोगों के साथ खड़ा कवि विमलेश त्रिपाठी

शहंशाह आलम कवि परिचय विमलेश त्रिपाठी परिचय : विमलेश त्रिपाठी बक्सर, बिहार के एक गाँव हरनाथपुर में जन्म। प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही। प्रेसिडेंसी कॉलेज से स्नातकोत्तर, बीएड। कलकत्ता विश्वविद्यालय से केदारनाथ सिंह की कविताओं पर पी-एच.डी। देश की लगभग सभी पत्र-पत्रिकाओं में कविता, कहानी, समीक्षा, लेख आदि का प्रकाशन।...

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हिंदी हैं हम वतन हैं, हिंदुस्तां हमारा

संजय स्वतंत्र आज आखिरी कोच में बैठे हुए सोच रहा हूं कि हर साल पितृपक्ष में लोग पितरों को याद करते हुए पिंडदान करते हैं। ठीक इसके बरक्स हमारे यहां हिंदी पखवाड़ा शुरू हो जाता है। यह कैसा संयोग है कि दोनों पखवाड़ों में हम अपने अतीत को याद करते...

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कहानी विचार का पानी भी है

जयप्रकाश मानस 23 अक्टूबर 2015 मेरे घर आईं 3 नन्हीं परी शीला, अम्बिका और अहल्या !किसी और से मिलूँ न मिलूँ, इन तीन निश्छल परियों से ज़रूर मिलता हूँ। जब कभी गाँव जाता हूँ, मोहल्ले की ये तीनों बच्चियाँ ज़रूर चली आती हैं मुझसे मिलने। ये नहीं आती तो खुद...

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सुशान्त सुप्रिय की कहानी ‘इंडियन काफ़्का’

सुशान्त सुप्रिय A-5001 ,             गौड़ ग्रीन सिटी ,             वैभव खंड ,             इंदिरापुरम ,             ग़ाज़ियाबाद – 201014             ( उ. प्र. )...

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फेंटिए, फेंकिए और फंसाइए !

जयप्रकाश मानस 16 अक्टूबर, 2015 तलाश मैं रोज़ एक अपरिचित संसार से परिचय की तलाश में रहता हूँ,  जहाँ नये सूरज, चाँद, सितारे, आकाश, लोग-बाग, घर-आँगन, अपनी नई उदासी और नई जिजीविषा के साथ मुझसे बतियाने की फ़िराक़ में हों । तलाश एकतरफ़ा तो है नहीं ? तलाश नदी से...

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दूसरी भाषा में पाठक ज्यादा, हिन्दी में कवि

जयप्रकाश मानस 3 अक्टूबर, 2015 चला अब बिहू प्रदेश की ओर आज से आने वाले 10 दिन तक चाय और बिहू प्रदेश आसाम में । जोरहाट में साथहोंगे असम के नवलेखक और देश के कुछ लेखक मित्र । मानव संसाधन विकास मंत्रालय(केंद्रीय हिंदी निदेशालय) के इस नवलेखक शिविर में नवागतों...

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सूर्यनाथ सिंह की कहानी ‘रजामंदी’

सूर्यनाथ सिंह जन्म : 14 जुलाई 1966 स्थान : सवाना, गाजीपुर इलाहाबाद विश्वविद्यालय और फिर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से पढाई कई कहानी संग्रह और उपन्यास प्रकाशित। नया उपन्यास ‘नींद क्यों रात भर नहीं आती’ हाल ही में प्रकाशित। जनसत्ता  में वरिष्ठ पत्रकार ‘साहब, मेम साहब आई हैं।’ मुन्नन मियां...

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सलामत रहे दोस्ताना हमारा

  संजय स्वतंत्र मेट्रो में यात्रा करते समय फेसबुक मेसेंजर पर आए मित्रों के संदेश प्राय: मेरा ध्यान खींच लेते हैं। आज दफ्तर जाते समय बीप की ध्वनियों को मैंने नजरअंदाज कर दिया। ऐसा अक्सर होता है, जब मैं तमाम संदेश फुर्सत में या फिर सफर के दौरान पढ़ता हूं।...

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हिजाब वाली लड़की

अली रिज़वान शिक्षा- जामिया मिल्लिया इस्लामिया नई दिल्लीलेखक “कहानी डिपो” यूट्यूब चैनल एडिटर और कहानी सलाहकार हैं।मोबाइल-9899367276 इधर ईद करीब आ रही थी उधर आदिल और जुनैद के दिमाग़ में एक अलग ही खिचड़ी पक रही थी। आदिल ने एक बार जुनैद को किसी वेश्या के बारे में बताया था।...

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रौंदी गई घास प्रगतिशील या उस पर चलने वाले?

जयप्रकाश मानस 1 अक्टूबर, 2015 ऊँचे-नीचे पेड़ कितने भी उँचे क्यों न हों, उसके फल नीचे ही गिरते हैं । चाहूँगा मैं तुझे साँझ-सवेरे 50 से ज़्यादा सालों तक हिंदी फ़िल्मों के लिए गीत लिखने और प्रगतिशील आंदोलन के उर्दू के सबसे बड़े शायरों में से एक थे महरुह सुल्तानपुरी...

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‘कड़वी हवा’ के बहाने कुछ कड़वी बातें

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव बंजारे लगते हैं मौसम मौसम बेघर होने लगे हैं  जिस देश में हर साल औसतन 12,000 किसान खुदकुशी कर लेते हों, उस देश में मौसम के बेघर हो जाने पर सवाल उठना लाजिमी है। ‘कड़वी हवा’ (रिलीज डेट 24 नवंबर) फिल्म के क्लाइमेक्स पर गुलजार की धीर-गंभीर...