Category: ग़ज़ल

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बलजीत सिंह ‘बेनाम’ की तीन ग़ज़लें

1 प्यार का मतलब बताती इक कहानी दे गया इक पतंगा हँसते हँसते ज़िंदगानी दे गया शख्स जाने कौन था पर दर्द में मसरूर था अपने हिस्से की मुझे बाकी जवानी दे गया ज़िन्दगी के जब सभी अल्फ़ाज़ थे बिखरे पड़े तब ख़ुदा सपने में लफ़्ज़ों को मुआनी दे गया...

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प्रदीप कान्त की 5 ग़ज़लें

प्रदीप कान्त जनसत्ता सहित्य वार्षिकी (2010), समावर्तन, वर्तमान साहित्य, बया, पाखी, कथादेश, विभोम स्वर, सम्बोधन, सुख़नवर, वीणा, आदि साहित्यिक पत्रिकाओं व दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, दैनिक जागरण आदि समाचार पत्रों में गज़लें व नवगीतप्रकाशित। अनुभूति, कविता कोश, रचना कोश, हमरंग, पुरवाई आदि वेब साइट्स पर रचनाएँ संकलित। आकशवाणी और दूरदर्शन...

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अनिरुद्ध सिन्हा की 5 ग़ज़लें

अनिरुद्ध सिन्हा जन्म-2 मई 1957 शिक्षा-स्नातकोत्तर (अर्थशास्त्र) प्रकाशित कृतियाँ (1)नया साल (2)दहेज (कविता संग्रह )(3))और वे चुप हो गए (कहानी-संग्रह)(4)तिनके भी डराते हैं (5)तपिश (6)तमाशा (7)तड़प (8)तो ग़लत क्या है (9)ताकि हम बचे रहें (10)तो मैं ग़ज़ल कहूँ (ग़ज़ल-संग्रह)(11)हिन्दी ग़ज़ल सौंदर्य और यथार्थ (12)हिन्दी ग़ज़ल का यथार्थवादी दर्शन (13)उद्भ्रांत की...

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डी एम मिश्र की 7 ग़ज़लें

डी एम मिश्र 1. यूं अचानक हुक्म आया लाकडाउन हो गया यार से  मिल भी न पाया लाकडाउन हो गया बंद पिंजरे में किसी मजबूर पंछी की तरह दिल हमारा फड़फड़ाया लाकडाउन हो गया घर के बाहर है कोरोना, घर के भीतर भूख है मौत का कैसा ये साया लाकडाउन...

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गोपाल मोहन मिश्र की एक ग़ज़ल

गोपाल मोहन मिश्र लहेरिया सराय, दरभंगा 9631674694   हराया है तूफ़ानों को, मगर अब ये क्या तमाशा है, हवा करती है जब हलचल, बदन ये कांप जाता है। है सूरज रौशनी देता, सभी ये जानते तो हैं, है आग दिल में बसी कितनी, न कोई भाँप पाता है। है ताकत प्रेम...

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माधव कौशिक की 5 ग़ज़लें

चर्चित किताब माधव कौशिक का नया ग़ज़ल संग्रह पानी में तहरीर नयी किताबगंज प्रकाशन मूल्य 195 रुपए एक सबका क़िस्सा ख़ाली हाथ सारी दुनिया  ख़ाली  हाथ इक मुद्दत से  बैठा हूं तनहा, टूटा, ख़ाली हाथ वो बेचारा  क्या देता वह भी खुद था  ख़ाली हाथ सब कुछ होते हुए भी...

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केशव शरण की 5 ग़ज़लें

केशव शरण प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह), जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह), दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह), कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह), एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह), दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह), क़दम-क़दम ( चुनी हुई कविताएं ) , न संगीत न फूल ( कविता संग्रह), गगन नीला धरा धानी नहीं है (...

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ध्रुप गुप्त की 4 ग़ज़लें

ध्रुव गुप्त एक हम हाज़िर हैं हाथ उठाए सपना जहां, जिधर ले जाए दरवाज़े पर आस टंगी है खिड़की पर लटके हैं साए तन्हाई में शोर था कितना चीखो तो आवाज़ न आए हम सड़कों पे खड़े रह गए सड़कों ने कल धूल उड़ाए हर कंधे पर बोझ है कितना...

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नूर मुहम्मद ‘नूर’ की 2 ग़ज़लें

नूर मुहम्मद ‘नूर’ जन्म : 17 :08 :1952 गांव :महासन, डाक : महुअवां कारख़ाना, जनपद : कुशीनगर। पिछले 5 दशक से निरंतर लेखन। हिंदी की तमाम पत्र- पत्रिकाओं  में अनगिनत रचनाओं का प्रकाशन। अबतक चार किताबें प्रकाशित। एक लंबी कविताओं, एक कहानियो और दो ग़ज़लों की। भारतीय रेलवे में 36...

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आरती आलोक वर्मा की 3 ग़ज़लें

आरती आलोक वर्मा एक लगाई  उन्होंने  ही  आग  घर में बसाये हुये थे जिन्हें हम नजर में   घरौंदे बिखरते नजर आ रहे हैं  नये दौर के इस अनूठे शहर मेंचमन में पसरने लगी आग हरसू शरारे दिये छोड़ किसने शज़र में ।जहाँ मुफलिसी बसर कर रही होवहाँ कौन जीता नहीं डर फिक्र में किसी...

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नवीन गोपाल कानगो की 5 ग़ज़लें

प्रोफेसर नवीन गोपाल कानगो प्राध्यापक एवं अध्यक्ष सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग समन्वयक, परिष्कृत उपकरण केंद्र डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर (म.प्र.) ४ ७०००३  Mobile 9425635736, nkango@gmail.com एक कहकशाँ हूँ मैं  सारे सितारे मुझमें बहता दरिया हूँ सारे किनारे मुझमें ये मेरा दिल है कि आईनाख़ाना मैं सभी में नज़र आता...

दिलीप कुमार की 6 ग़ज़लें 0

दिलीप कुमार की 6 ग़ज़लें

दिलीप कुमार जन्म तिथि : 28 अक्टूबर 1974।मूल निवास : बलिया,  रूपौली, पूर्णिया, बिहार संप्रति- शाखा प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक               वास्को दा गामा मुख्य शाखा, गोवा।संपर्क : 8806660113 एक   मुझे खुद की नहीं है  फिकर अब तो ।कोई करता नहीं मेरा जिकर अब तो।।सिर्फ रस्ता ही है...

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मनी यादव की 4 ग़ज़लें

मनी यादव  एक शाम    कोयल   और   हवा   के    साथ   गाई  मैंने ज़िन्दगी   के   साज़   पर   जो  धुन   बनाई     मैंने कैसे     लफ़्ज़े-बेवफ़ा    लायें    ग़ज़ल   में  अपनी बेवफ़ाई      की       शमा      ख़ुद    जलाई     मैंने छोड़कर  घर  कुछ  कमाने  के  लिये  निकला तब ज़ीस्त     बच्चे     के     कटोरे    से   कमाई    मैंने आज    तेरी   ज़ुल्फ़    क़ाबू  ...

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नूर मुहम्मद ‘नूर’ के ग़ज़ल संग्रह ‘सफ़र कठिन है’ से 5 ग़ज़लें

नूर मुहम्मद ‘नूर’ जन्म :  17 अगस्त 1952, महसोन, कारखाना मछुआवां, कुशीनगर (उ.प्र) प्रकाशित कृतियां :  ताकि खिलखिलाती रहे पृथ्वी (कविता संग्रह), आवाज़ का चेहरा (कहानी संग्रह), दूर तक सहराओं में (ग़ज़ल संग्रह), सफ़र कठिन है (ग़ज़ल संग्रह) पत्र-पत्रिकाओं में नाटक छोड़कर सभी विधाओं में लेखन। अगस्त 2012 में दक्षिण...

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आरती आलोक वर्मा की एक ग़ज़ल

आरती आलोक वर्मा आंखों का दरिया छुपाने के लिये मुस्कुराते  हैं      जमाने  के लिये ।। बात दिल की अब समझता है कौन जायें किसको गम दिखाने के लिये ।। हां हमे मजबूत होना ही पड़ा राह से पत्थर  हटाने के लिये  ।। सर झुकाना मंजूर कर “आरती ” फ़ासले दिल...

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सुभाष पाठक ‘जिया’ की 5 ग़ज़लें

सुभाष पाठक ‘जिया’ जन्मतिथि- 15 सितम्बर 1990 शिक्षा-  बी एस सी,बी एड, प्रकाशन :  कविताकोश, रेख़्ता, पर प्रकाशन, कादम्बिनी, ग़ज़ल के बहाने, दो दर्जन से अधिक ,देश की तमाम साहितियिक पत्रिकाओं ग़ज़ल विशेषांकों में ग़ज़लें प्रकाशित, आकाशवाणी शिवपुरी से समय समय पर काव्य पाठ, अखिल भारतीय मुशायरों कवि सम्मेलनों में...

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डी एम मिश्र की 5 ग़ज़लें

1. दूर से बातें करो अब वो विधायक है कम मुलाकातें करो अब वो विधायक है। खुद अँधेरे में रहो उसके लिए लेकिन चॉदनी रातें करो अब वो विधायक है। नोट की माला पिन्हाओ, थैलियाँ लाओ धन की बरसातें करो अब वो विधायक है। जन्मदिन उसका मनाओ खुद रहो भूखे...

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केशव शरण की 21 ग़ज़लों की श्रृंखला

केशव शरण प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)सम्पर्कः एस 2/564 सिकरौलवाराणसी  221002मो.   94152951371.क्यों नसीबों की बात करते हैंजब ग़रीबों की बात करते हैं फिर कहेंगे हमें उठाने...

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अकेले हैं तो क्या ग़म है!

संजय स्वतंत्र उस दिन अस्पताल के इमरजंसी वार्ड में वे व्हीलचेयर पर दिखे। तबीयत बहुत खराब थी उनकी। शायद उन्हें नौकर लेकर वहां आया था। मैंने उससे पूछा, ‘कोई साथ नहीं आया?’ उसका जवाब था, ‘घर में बेटे-बहू हैं, लेकिन किसी को फुर्सत नहीं।’ उसकी बात सुन कर मैं सन्न...

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मनी यादव की दो ग़ज़लें

  मनी यादव एक मौत को अपना आशना रक्खें ज़िन्दगी से भी वास्ता रक्खें चाँद आ तो गया मेरे घर में चाँदनी इसकी हम कहाँ रक्खें शाइरी सुनना कोई खेल नहीं शेर पर ही मुलाहिज़ा रक्खें प्यास दरिया बुझा नही सकता इसलिए पास में कुआँ रक्खें पेड़ तहज़ीब का पड़ा...