Category: चर्चित किताब

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मुसाफिर बैठा के कविता संग्रह ‘विभीषण का दु:ख’ से 5 कविताएं

मुसाफिर बैठा तीन स्थितियां आदमी मरने के बाद कुछ नहीं बोलता स्वाभाविक स्थिति! दलित मरने के पहले  कुछ नहीं बोलता अस्वाभाविक स्थिति ! ! दलित को आदमी नहीं भी कहा जा सकता स्वाभाविक  स्थिति ! ! ! (उदयप्रकाश की एक कविता से प्रेरित)   डर में घर जिसे तुम कहते...

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शिवदयाल के उपन्यास ‘एक और दुनिया होती’ का एक अंश

                       रात को ओढ़ने के लिए मेरे पास तो कुछ था नहीं। रात एक झोपड़ी के ओसारे में गुजारनी थी। पुआल का बिस्तर लगा और मुझे सहारा मिला बम्बइया से। उनके पास कंबल था। बीड़ी सुलगाने के पहले उन्होंने कंबल खोला और मुझ पर डाल दिया। कुछ इधर-उधर की बात...

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आशीष कुमार त्रिवेदी के उपन्यास ‘तुम्हारे लिए’ का एक अंश

नीचे की पुस्तकों को पढ़ने के लिए तस्वीर पर क्लिक करें उपन्यास अंश आशीष कुमार त्रिवेदी के उपन्यास ‘तुम्हारे लिए’ का एक अंश मदन से मिलने के बाद से जय और भी बेचैन हो गया था। मन में उथल पुथल मची थी। इतना सब कुछ होने के बाद भी क्या...

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राजेंद्र राजन की 3 कविताएं

राजेंद्र राजन बुखार पर्व जो फेंक दिए गए थे इतिहास के कूड़ेदान में आज वे घूम रहे हैं दल के दल बजा रहे हैं धर्म का बाजा हर सड़क हर गली में इतने जोर से कि बहरे हो जाएं कान सुनाई न दे पड़ोस का चीखना अपनी ही आवाज़। उनकी...