Category: द लास्ट कोच

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लौट आओ गौरैया

  संजय स्वतंत्र द लास्ट कोच : किस्त 5 दिल्ली में बरसों से नन्हीं सुकोमल गौरैया नहीं दिख रही। किसी को मालूम भी नहीं कि वह कहां गुम हो गई। एक दिन दफ्तर के सबसे युवा साथी धीरेंद्र ने बताया कि उसके करावल नगर इलाके में गौरैया दिखने लगी है।...

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मां जियेगी तो हम जियेंगे

संजय स्वतंत्र द लास्ट कोच : किस्त 4 गंगा-यमुना को लेकर जिस दिन उत्तराखंड हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया, तब से इन दोनों नदियों को लेकर मैं बेहद भावुक हो गया हूं। यों भी हम सभी भारतीय दिल से भावुक और कल्पनाशील होते हैं। कोई एक दशक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री...

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नींद क्यों रात भर नहीं आती

संजय स्वतंत्र बिहार की उस मिट्टी से जन्म का नाता है, जो अभावों और सपनों के संघर्ष के साथ एक इंसान बनने की तमीज पैदा करती है। जब हिंदी पट्टी विचार और बाजार से जूझ रहा था, तब पिता की सरकारी नौकरी के कारण देश की राजधानी दिल्ली में सत्ता...

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कुल्हड़ की वो चाय

संजय स्वतंत्र बिहार की उस मिट्टी से जन्म का नाता है, जो अभावों और सपनों के संघर्ष के साथ एक इंसान बनने की तमीज पैदा करती है। जब हिंदी पट्टी विचार और बाजार से जूझ रहा था, तब पिता की सरकारी नौकरी के कारण देश की राजधानी दिल्ली में सत्ता...

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दिल चुरा के देखो

      संजय स्वतंत्र बिहार की उस मिट्टी से जन्म का नाता है, जो अभावों और सपनों के संघर्ष के साथ एक इंसान बनने की तमीज पैदा करती है। जब हिंदी पट्टी विचार और बाजार से जूझ रहा था, तब पिता की सरकारी नौकरी के कारण देश की राजधानी...