Category: पद्य

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आलोक कुमार मिश्रा की 4 कविताएं

आलोक कुमार मिश्रा  1-आँखों की मशाल अपनी बेटी को  सिखा रहा हूँ आँख मारना जिससे वो एक झटके में ही  ध्वस्त कर दे उसे घेरने वाली मर्दवादी किलेबंदी उसे सिखा रहा हूँ आँखें मटकाना  कि वो देख सके तीन सौ साठ डिग्री और भेद सके  चक्रव्यूह के सारे द्वार उससे...

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अनुपमा तिवाड़ी की 2 कविताएं

अनुपमा तिवाड़ी ए – 108, रामनगरिया जे डी ए स्कीम,  एस के आई टी कॉलेज के पास, जगतपुरा, जयपुर 302017  मुझे बहुत कुछ हो जाना है मुझे पेड़ों से प्यार करते हुए, एक दिन पेड़ हो जाना है मुझे नदी से प्यार करते हुए, एक दिन नदी हो जाना है...

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मोहन कुमार झा की 3 कविताएं

मोहन कुमार झा अररिया, बिहार सम्प्रति अध्ययनरत् काशी हिन्दू विश्वविद्यालय मो. 78390450071. हारे हुए लोग अच्छा होता है बेहतर चुननामगर उससे भी अच्छा होता है सबसे बेहतर चुननासिर्फ जीतने वाले नहींहारे हुए लोग भी अच्छे होते हैं। ख्वाब बगैर नींद के भी देखी जा सकती हैआदमी को बनाया जा सकता है देवताएक पल में...

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शालिनी मोहन की 4 कविताएं

शालिनी मोहन विभिन्न राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित। ‘अहसास की दहलीज़ पर’ साझा काव्य संग्रह के. जी. पब्लिकेशन द्वारा  2017 में प्रकाशित .  रश्मि प्रकाशन, लखनऊ से कविता संग्रह ‘दो एकम दो’ वर्ष 2018 में प्रकाशित.   वर्तमान पता फ्लैट नं 402 वंदना रेसिडेंसी अपार्टमेंट मनीपाल काउन्टी रोड सिंगसान्द्रा बंगलुरू(कर्नाटक)-560068  ...

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अमित कुमार मल्ल की 5 कविताएं

अमित कुमार मल्ल जन्म स्थान – देवरिया शिक्षा – स्नातक (दर्शन शास्त्र , अंग्रेजी साहित्य , प्राचीन इतिहास व विधि  ), परास्नातक ( हिन्दी साहित्य ) सम्प्रति  –  सेवारत रचनात्मक उपलब्धियां- प्रथम काव्य संग्रह – लिखा नहीं एक शब्द , 2002 में प्रकाशित । प्रथम लोक कथा संग्रह – काका...

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शहंशाह आलम के कविता संग्रह ‘थिरक रहा देह का पानी’ से 5 कविताएं

तीली आपके पास कितना कुछ बचा है अब भी जीने के लिए कई सदियां मेरे पास एक तीली बची है माचिस की आपके अंधेरे कोने को रौशन करने के लिए यह तीली बचाए रखना चाहूंगा उसके प्रेम के बचे रहने तक 2. मुझ में मैने देखा मेरे अंदर एक नदी...

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शशांक पांडेय की 7 कविताएं

शशांक पांडेय सुभाष लाँज, छित्तुपुर, बी.एच.यू, वाराणसी(221005) ● मो.नं-09554505947 ● ई.मेल-shashankbhu7@gmail.com 1. खिड़कियाँ मैंने बचपन में ऐसे बहुत से घर बनाएं और फिर गिरा दिए जिनमें खिड़कियाँ नहीं थीं दरवाजें नहीं थे बाकी सभी घरों की तरह उस घर में  मैंने सबकुछ लगाए थे लेकिन फिर भी  दुनिया को साफ-साफ...

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सतीश खनगवाल की 3 कविताएं

सतीश खनगवाल जन्मतिथि – 18 अक्टूबर 1979 (दस्तावेजी)जन्मस्थान – रायपुर अहीरान, झुनझुनूं (राजस्थान)सम्प्रति – प्राध्यापक, शिक्षा निदेशालय, दिल्ली।कृतियाँ – सुलगता हुआ शहर (कविता – संग्रह), विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख, लघुकथाएँ, व्यंग लेख, समीक्षाएँ, आदि प्रकाशित।      वह भी मुरझा जाता है     मुझे देखते ही     उसका पीला पड़ा चेहरा    ...

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मुसाफिर बैठा के कविता संग्रह ‘विभीषण का दु:ख’ से 5 कविताएं

मुसाफिर बैठा तीन स्थितियां आदमी मरने के बाद कुछ नहीं बोलता स्वाभाविक स्थिति! दलित मरने के पहले  कुछ नहीं बोलता अस्वाभाविक स्थिति ! ! दलित को आदमी नहीं भी कहा जा सकता स्वाभाविक  स्थिति ! ! ! (उदयप्रकाश की एक कविता से प्रेरित)   डर में घर जिसे तुम कहते...

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संजय शांडिल्य की प्रेम कविताएं

संजय शांडिल्य परिचय जन्म : 15 अगस्त, 1970 | स्थान : जढ़ुआ बाजार, हाजीपुर | शिक्षा : स्नातकोत्तर (प्राणिशास्त्र) | वृत्ति : अध्यापन | रंगकर्म से गहरा जुड़ाव | बचपन और किशोरावस्था में कई नाटकों में अभिनय | प्रकाशन : कविताएँ हिंदी की प्रायः सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित एवं ‘अँधेरे में ध्वनियों के बुलबुले‘ (सारांश प्रकाशन, दिल्ली) तथा ‘जनपद...

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कैलाश मनहर की 5 कविताएं

कैलाश मनहर एकयदि कोई भटकता आदमी दिखाई दे तुम्हें उसे मेरे नाम से पुकारनावह जरूर तुम्हारी तरफ़ देेखेगा जैसे मैं दोअच्छा चलता हूँ कह कर आया था उसे और अभी तक नहीं हुआठहरना या लौटनापहुँचना तो शायद कल्पनातीत है तीनमस्तक पर घाव की असह्य पीड़ा को झेलतेअमरत्व का भोगश्राप है या वरदानकवि ही जाने कविता बखाने चारझेल रहा हूँ शीतलहर इसदुर्बल...

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प्रद्युम्न कुमार सिंह की 5 कविताएं

प्रद्युम्न कुमार सिंह जन्म : 19 जनवरी सन् 1976 को फतेहपुर जिले की खागा तहसील के घोषी गाँव में शिक्षा : एम० ए० हिन्दी, बीएड हिन्दी संस्कृतप्रकाशन : आलोचना पुस्तक – युगसहचर – सुधीर सक्सेना का सम्पादन ,विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। एम० एम० चन्द्रा के साथ साझा संकलन, समकालीन चालीस कवियों के साथ ‘परिधि पर...

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पवन कुमार मौर्य की 5 कविताएं

पवन कुमार मौर्य जन्मतिथि- 01 जून, 1993शिक्षा– स्नातक भूगोल (ऑनर्स) (बीएचयू, बनारस) एमए (जनसंचार) एमसीयू, भोपाल. प्रकाशन-जनसत्ता, दैनिक जागरण, अमर उजाला, सुबह सवेरे सहित कई प्रमुख समाचार पत्रों में समसामयिक मसले पर सैकड़ों आलेख, टिप्पणी और पत्र प्रकाशित। डिजिटल साहित्यिक मंच- प्रतिलीपी, हिंदी डाकिया, कंटेंट मोहल्ला सहित कई मंचों पर कविता,...

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कृष्ण सुकुमार की 5 कविताएं

कृष्ण सुकुमार ए०  एच०  ई०  सी० आई. आई. टी. रूड़की रूड़की-247667 (उत्तराखण्ड) मोबाइल नं० 9917888819 kktyagi.1954@gmail.com एक प्रेमिकाएं उड़ रही थीं आकाश में ! प्रेमी धरती पर चुग रहे थे बिखरा हुआ अपना वर्तमान ! खिलती हुई हवाओं के फूलों ने सपनों में बिखेर रखी थी ख़ुशबू ! जब कि...

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शिव कुशवाहा की 6 कविताएं

1.उम्मीदों का नया आकाशकिसी शहर की सड़क कीपरित्यक्त पुलिया के किनारेठहरकर देखना कभी कि वहां दिखेंगे तुम्हेंधंसते हुए से  धरातलमटमैले से भावों को समेटेस्याह बादलों मेंगुम होता हुआ जीवन जीवन ,हां वह जीवनजो संघर्ष करता है अंधियारे भोर से लेकर मटमैली शाम तकजिजीविषा से जूझते हुएबाज़ार के किनारे परलगा लेते हैं अपनी...

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अरुण कुमार की 5 कविताएं

क्या है जिन्दगी? जिन्दगी पायजामे के उस नाड़े सी है जिसे, जितना जल्दी सुलझाना चाहता हूं, उतनी ही उलझती चली जाती है। जिंदगी शहर के, उस ट्रेफिक जाम जैसी है कि जब दौड़ना चाहता हूं, फंस सी जाती है। जिंदगी गांव के छोर की उस अंतिम बस्ती सी है, जो...

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केशव शरण की 5 कविताएं

इस राष्ट्र में इस राष्ट्र में मंदिर भी होना चाहिए इस राष्ट्र में  मसजिद भी इस राष्ट्र में चर्च भी इस राष्ट्र में हिंदू भी होने चाहिए इस राष्ट्र में मुसलमान भी इस राष्ट्र में ईसाई भी इस राष्ट्र में क्या सब मानव ही रहते हैं ? अजब उधेड़बुन चल...

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नीतेश मिश्र की 4 कविताएं

1. क्या हो कि अगर क्या हो कि अगर शहर ना हो तो शायद  नहीं बिकेंगी शरीर और आत्माएँ ‘इश्क़ में शहर होना’ जैसी सारी संभावनाएं सिरे से खारिज की जा सकेंगी नहीं करेगी कोई प्रेमिका अपने प्रेमी का इंतज़ार शहर के बगीचे में सभी रास्ते सिर्फ गाँव को जाते...

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प्रतिभा चौहान की 5 कविताएं

मत करो नियमों की बात आज सिसकियाँ और रुदन के बीज क्या पनपते रहेंगे बलिदानों की धरा पर क्या पसीने की बूँदे न पिघला देंगी तुम्हारे पत्थर के सीने को चहकते महकते मचलते उछलते बच्चों की कोहनियों की चोटें कब तक बोती रहेंगी व्यथा की फ़सल क्या आज बोए बीज...

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अवधेश कुमार ‘अवध’ के 2 गीत

1. दीपों का बलिदान याद हो जब  मन में अज्ञान भरा हो, अंधकार अभिमान भरा हो, मानव  से  मानव  डरता हो, दिवा  स्वप्न  देखा करता हो, गलत राह मन को भाती हो, मानवता   खुद   शर्माती हो,          धर्म कर्म अभियान याद हो ।        ...