Category: पद्य

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मनी यादव की दो ग़ज़लें

एकतल्खियां खून की विरासत हैछोड़ ना यार ये सियासत हैमुफ़लिसी जा रही है महफ़िल मेंमुफ़लिसी को कफ़न की दावत हैहुस्न तेरा मिटा के दम लूंगासांस तुझसे मेरी बगावत हैवाकया ये समझ नहीं आतारात को दिन से क्यों शिकायत हैभागता क्यों है तू “मनी” ग़म सेग़म तो अल्लाह की इबादत हैदोमुकद्दर...

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कमलेश भारतीय की दो कविताएं

एकजादूगर नहीं थे पितापर किसी जादूगर से कम भी नहीं थे सुबह घर से निकलते समय हम जो जो फरमाइशें करतेशाम को आते ही अपने थैले सेसबको मनपसंद चीजेंहंस हंस कर सौंपते जैसे किसी जादूगर का थैला होअब पिता बन जाने परसमझ में आया कि जादूगर की हंसी के पीछेकितनी पीडा छिपी होती...

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आरती कुमारी की दो कविताएं

आरती कुमारीजन्म तिथि:  25 मार्च, 1977पता:  द्वारा – श्री ए. एन. पी. सिन्हा,  शशि भवन, आजाद काॅलोनी, रोड- 3,  माड़ीपुर, मुजफ्रपफरपुर- 842001,’शिक्षा: एम.ए. अंग्रेजीद, एम.एड, पीएच-डी.व्यवसाय: सहायक शिक्षिका के रूप में राजकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय, ब्रह्मपुरा, मुजफ्रपफरपुर में  पदस्थापित। प्रकाशन : कैसे कह दूँ सब ठीक है (काव्य संग्रह),  विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं...

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भास्कर चौधुरी की दस कविताएं

भास्कर चौधुरीजन्म: 27 अगस्त 1969रमानुजगंज, सरगुजा (छ.ग.)शिक्षा: एम. ए. (हिंदी एवं अंग्रेजी) बी एडप्रकाशन: एक काव्य संकलन ‘कुछ हिस्सा तो उनका भी है’ एवं गद्य संकलन (यात्रा वृतांत) ‘बस्तर में तीन दिन’ प्रकाशित। लघु पत्रिका ‘संकेत’ का छ्टा अंक कविताओं पर केंद्रित. कविता, संस्मरण, समीक्षा आदि प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।यात्रा:   ...

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अर्जित पांडेय की कविता ‘पुरुष तू देवता क्यों नहीं?’

अर्जित पाण्डेयअर्जित आईआईटी दिल्ली में इंजीनियरिंग  के छात्र हैं। अच्छा लिखते हैं। पुरुष और महिला को लेकर जिस सोच के साथ हम केवल दिखावे के लिए जीते हैं, उसमें उनकी ये कविता कई लोगों को अजीब लग सकती है लेकिन अर्जित जिस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं, उसकी भी...

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परितोष कुमार ‘पीयूष’ की कविता ‘इस कठिन समय में’

परितोष कुमार ‘पीयूष’ (s/o स्व० डॉ० उमेश चन्द्र चौरसिया(अधिवक्ता) मुहल्ला- मुंगरौड़ा     पोस्ट- जमालपुर(बिहार)पिन- 811214   इस कठिन समय में इस कठिन समय मेंजब यहाँ समाज के शब्दकोश सेविश्वास, रिश्ते, संवेदनाएँऔर प्रेम नाम के तमाम शब्दों कोमिटा दिये जाने की मुहिम जोरों पर है तुम्हारे प्रतिमैं बड़े संदेह की स्थिति में हूँकि आखिर...

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मनी यादव की एक ग़ज़ल

टूटे मकाँ में रहता तो गुलदान बुरा है ग़ुरबत में मुहब्बत का भी अंजाम बुरा है भूखा था वो मासूम जिसे चोर कहा तुमने खुद का तेरा भी झांक गिरेबान बुरा है था आसरा मुझको भी बहुत अच्छे दिनों का अच्छा भी सियासत में तो पैगाम बुरा है कोशिश न...

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नीरजा मेहता की कविता ‘ज़िन्दगी एक पहेली’

ज़िन्दगी आदि से अंत तक शाश्वत किन्तु क्षणिक विस्तृत किन्तु संक्षिप्त विचित्र किन्तु सत्य अलबेली किन्तु नित्य चिर परिचित किन्तु अकाल्पनिक रहस्यमयी किन्तु दिलचस्प विस्मयकारी किन्तु प्रभावकारी अभिशापित किन्तु अलौकिक वरदान सी उलझी डोर सी किन्तु सपनों को साकार करती सी प्रवाहमयी अद्भुत अभिव्यक्ति सी भावानुकूल सुसंस्कृत आदर्शमयी कविता की...

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भावना की तीन कविताएं

संवेदनाओं का पौधा अधिकांश औरतें जब व्यस्त होती हैं खरीदने में साड़ी और सलवार सूट तो लेखिकाएं खरीदती हैं अपने लिए कुछ किताबें ,पत्रिकाएॅ और कलम अधिकांश औरतें जब ढूंढती हैं इन्टरनेट पर फैशन का ट्रेंड तो लेखिकाएं तलाशती हैं ऑनलाइन किताबों की लिस्ट अधिकांश औरतें जब नाखून में नेलपाॅलिश...

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प्रभांशु कुमार की दो कविताएं

लेबर चौराहा और कविता सूर्य की पहली किरण के स्पर्श से पुलकित हो उठती है कविता चल देती है लेबर चौराहे की ओर जहां  मजदूरों की बोली लगती है। होता है श्रम का कारोबार गाँव-देहात से कुछ पैदल कुछ साइकिलों से काम की तलाश में आये मजदूरों की भीड़ में...

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राकेश रोहित की सात कविताएं

जब सब लौट जायेंगे सब जब घर लौट जायेंगे मैं कहाँ जाऊंगा इतनी बड़ी दुनिया में नहीं है मेरा कोई वृक्ष! मेरे जीवन में कुछ कलरव की स्मृतियाँ हैं और एक पुराने स्कूल की जिसकी दीवार ढह गयी थी मास्टर जी की पीठ पर छुट्टी का घंटा बजने पर जहाँ...

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‘मां’ पर अमरजीत कौंके की सात कविताएं

जो कभी नहीं भूलती  ( दिवंगत माँ के लिए सात कविताएं )  1. बहुत भयानक रात थी ग्लूकोज़ की बोतल से बूँद-बूँद टपक रही थी मौत कमरे में माँ को किसी मगरमच्छ की तरह साँस-साँस निगल रही थी बचपन के बाद मैं माँ को पहली बार इतना समय इतना नज़दीक...