Category: पद्य

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विमलेश त्रिपाठी की 5 प्रेम कविताएं

विमलेश त्रिपाठी विमलेश त्रिपाठी के कविता संग्रह ‘उजली मुस्कुराहटों के बीच’ को अभी किंडल से डाउनलोड करें और अपनी प्रतिक्रिया से हमें अवगत कराएं। डाउनलोड करने के लिए नीचे की तस्वीर पर क्लिक करें। एक भाषा हैं हम शब्दों के महीन धागे हैं हमारे संबंध कई-कई शब्दों के रेशे-से गुंथेसाबुत खड़े...

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विशाल मौर्य ‘विशु’ की 3 प्रेम कविताएं

विशाल मौर्य ‘विशु’ नूर मुहम्मद नूर के ग़ज़ल संग्रह ‘सबका शायर’ बुक करने के लिए नीचे के लिंक पर क्लिक करें 1.मेरा प्रेम मेरा प्रेमदिल की चहारदीवारी फांदकरतुम्हारे पास जाकर चुपचाप बैठना चाहता हैंवैसे ही जैसे कोई छोटा लड़कापाठशाला की दीवारें फांदकर बैठा रहता हैं बग़ीचे मेंमहुआ के पेड़ से बतियाते हुए मेरा...

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ध्रुप गुप्त की 4 ग़ज़लें

ध्रुव गुप्त एक हम हाज़िर हैं हाथ उठाए सपना जहां, जिधर ले जाए दरवाज़े पर आस टंगी है खिड़की पर लटके हैं साए तन्हाई में शोर था कितना चीखो तो आवाज़ न आए हम सड़कों पे खड़े रह गए सड़कों ने कल धूल उड़ाए हर कंधे पर बोझ है कितना...

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अनवर सुहैल की 4 कविताएं

अनवर सुहैल ये कविताएं अनवर सुहैल के कविता संग्रह डरे हुए शब्द से ली गई हैैं। संग्रह किंंडल पर उपलब्ध है। डाउनलोड करने के लिए नीचे क्लिक करें कितना ज़हर है भरा हुआ समय का ये खंड भोगना ज़रूरी था वरना हम जान नहीं पाते कि हमारे दिलों में एक-दूजे...

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विभव प्रताप की 3 कविताएं

विभव प्रताप छात्र, इलाहाबादविश्वविद्यालय मो- 9621082127 इलाहाबाद गांव की बिजली अँधेरों को करनी होती है जब अठखेलियाँ सन्नाटे से या ढेर सारी बातचीत झींगुर से तब टप से पत्तों के किनारे से झर जाता है कहीं धूप गिर जाता है कहीं खम्भा टूट जाता है कहीं तार और आ पहुँचता...

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मिथिलेश कुमार राय की 5 कविताएं

मिथिलेश कुमार राय 24 अक्टूबर,1982 ई0 को बिहार में सुपौल जिले के छातापुर प्रखण्ड के लालपुर गांव में जन्म। हिंदी साहित्य में स्नातक। सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं व वेब पत्रिकाओं में कविताएं व (कुछ) कहानियाँ प्रकाशित। वागर्थ व साहित्य अमृत की ओर से क्रमशः पद्य व गद्य लेखन के लिए पुरस्कृत। ...

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पल्लवी मुखर्जी की 5 कविताएं

पल्लवी मुखर्जी नीचे की पुस्तकों को पढ़ने के लिए तस्वीर पर क्लिक करें एक एक खोल के भीतर घुसा हुआ है रेशम का कीड़ा जैसे किसी कोख की अंधेरी खोह में है एक शिशु छटपटाता है मुक्ति के लिए मुक्ति की प्यास उसे भी है जो देख रहा है अपने...

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अर्पण कुमार की 5 कविताएं

अर्पण कुमार दो काव्य संग्रह ‘नदी के पार नदी’ (2002), ‘मैं सड़क हूँ’ (2011) एवं एक उपन्यास ‘पच्चीस वर्ग गज़’ (2017) प्रकाशित एवं चर्चित। कविताएँ एवं कहानियाँ, आकाशावाणी के दिल्ली, जयपुर एवं बिलासपुर केंद्र से प्रसारित। दूरदर्शन के ‘जयपुर’ एवं ‘जगदलपुर’ केंद्रों से कविताओं का प्रसारण एवं कुछ परिचर्चाओं में...

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मुकुल आनन्द की कविता ‘तुम्हारी याद’

मुकुल आनन्द ग्राम+पो- पटसाजिला-     समस्तीपुर राज्य-     बिहारपिन-     848206″बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्ययनरत” वर्तमान निवास स्थान-  दुर्गाकुंड, वाराणसी तुम्हारी याद  तुम याद आती हो जैसे आती है रात आता है दिन लगती है भूख लगती है प्यास.. जैसे बच्चों के चोटिल होने पर माँ को आता है...

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नूर मुहम्मद ‘नूर’ की 2 ग़ज़लें

नूर मुहम्मद ‘नूर’ जन्म : 17 :08 :1952 गांव :महासन, डाक : महुअवां कारख़ाना, जनपद : कुशीनगर। पिछले 5 दशक से निरंतर लेखन। हिंदी की तमाम पत्र- पत्रिकाओं  में अनगिनत रचनाओं का प्रकाशन। अबतक चार किताबें प्रकाशित। एक लंबी कविताओं, एक कहानियो और दो ग़ज़लों की। भारतीय रेलवे में 36...

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प्रशान्त तिवारी की 7 कविताएं

प्रशान्त तिवारी जौनपुर निवासी (उत्तर प्रदेश)वर्तमान में नोएडा में निवास एक न्यूज़ ऐप में कार्यरत माएं भी जादूगर जैसी होती हैं 10 रुपए की कमाई में 12 रुपए का खर्च चला लेती हैं और उसी 10 रुपए में से 3 रुपए बचा भी लेती हैं उस वक्त के लिए जब हम...

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राजेश ‘ललित’ शर्मा की 4 कविताएं

राजेश’ललित’शर्मा बी-९/ए:डी डी ए फ्लैटस होली चाईल्ड के पीछे टैगोर गार्डन विस्तार नई दिल्ली -११००२७ ज़ख्म ज़ख़्मों पर मरहम नहीं नमक लगा बना रहे घाव उठती रहे टीस दर्द की आह निकले। याद रहे हमेशा किसने दिया था ? ये जख्म !! तन्हा कुछ देर इंतज़ार करो,ए दोस्त ज़िंदगी ज़रा...

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राजेंद्र राजन की 3 कविताएं

राजेंद्र राजन बुखार पर्व जो फेंक दिए गए थे इतिहास के कूड़ेदान में आज वे घूम रहे हैं दल के दल बजा रहे हैं धर्म का बाजा हर सड़क हर गली में इतने जोर से कि बहरे हो जाएं कान सुनाई न दे पड़ोस का चीखना अपनी ही आवाज़। उनकी...

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विजेंद्र की 6 कविताएं

विजेंद्र एक तुम्हें बाहर आना ही होगा कहां मिलेगा उस आदमी का उजला ब्यौरा जिसे काले पत्थरों में चुन दिया गया है उन्हें करीब से देखो समुद्र की तूफानी लहरों का गरजन तुम्हें सुनाई देगा श्रमिकों और किसानों का एकजुट संघर्ष लोकतंत्र की पहली जरूरत है दबे कुचले लोगों की...

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सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की 5 कविताएं

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव राजा एक उसे वो पसंद हैं जो मुंह नहीं खोलते उसे वो पसंद हैं जो आंखें बंद रखते हैं उसे वो पसंद हैं जो सवाल नहीं करते उसे वो पसंद हैं जिनका खून नहीं खौलता उसे वो पसंद हैं जो अन्याय का प्रतिकार नहीं करते उसे मुर्दे...

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आरती आलोक वर्मा की 3 ग़ज़लें

आरती आलोक वर्मा एक लगाई  उन्होंने  ही  आग  घर में बसाये हुये थे जिन्हें हम नजर में   घरौंदे बिखरते नजर आ रहे हैं  नये दौर के इस अनूठे शहर मेंचमन में पसरने लगी आग हरसू शरारे दिये छोड़ किसने शज़र में ।जहाँ मुफलिसी बसर कर रही होवहाँ कौन जीता नहीं डर फिक्र में किसी...

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शुक्ला चौधुरी की 3 कविताएं

शुक्ला चौधुरी मां एक जब घर से अचानक गायब हो जाती थी मां पहले हम चावल के कनस्तर में झांकते फिर दाल मसाले के डिब्बे से पूछते तब भी अगर मां आवाज़ नहीं देती तब हम चूल्हे के पास खड़े हो जाते और जोर-जोर से रोते मां मां मां चूल्हे...

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डा.अमरजीत कौंके की 12 क्षणिकाएं

अमरजीत कौंके  1सुरमई संध्या कोहरी घास पर उस की आँखों में देखते  सोचा मैंने- अगर सारी जिंदगी यूँ ही गुज़रती तो बस क्षण भर की होती…. 2सुरमई संध्या को हरी घास पर उसके पास बैठे मैंने कहा उस से – कोई बात करो वह बोली -जब ख़ामोशी ख़ामोशी से संवाद कर रही होतो शब्दों को निरर्थक गँवाने का क्या...

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पल्लवी मुखर्जी की 6 कविताएं

पल्लवी मुखर्जी पिंजरा गहन सन्नाटा है यहाँ मत झाँको इस पिजंड़े के अंदर यहाँ कुलांचे भरती कोई हिरनी नहीं उछलेगी न ही दिखेगी…. दूर-दूर तक कोई हरीतिमा जिस पर छोटे-छोटे खरगोशों के नन्हें-नन्हें पाँव होते हैं और जाने कहाँ -कहाँ से आ जाती हैं अनगिनत चिड़ियाँ… जिनकी चहचहाहट से तुम...

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रोहित ठाकुर की 5 कविताएं

रोहित ठाकुर  आखिरी दिन    आखिरी दिन आखिरी दिन नहीं होता जैसे किसी टहनी के आखिरी छोर पर उगता है हरापन दिन की आखिरी छोर पर उगता है दूसरा दिन आज व्यस्त है शहर शहर की रोशनी जहाँ खत्म हो जाती है वहाँ जंगल शुरू होता है आज व्यस्त है...