Category: पद्य

0

डॉ. सांत्वना श्रीकांत की 6 कविताएं

डॉ. सांत्वना श्रीकांत स्त्रीशिखर पर मिलूंगी मैं तुम्हें,विमुख तुम्हारे मोह से,प्रतिध्वनियों से तिरस्कृत नहीं,तुमको अविलंब समग्र समर्पण के लिए।मुक्त, बंधन इन शब्दों से परे, बुद्ध की मोक्ष प्राप्ति औरयशोधरा की विरह वेदना के शीर्ष पर स्थापित होगा शिखर।पहले चरण में-समर्पित करती हूं अपनी देह,जिसे तुम नहीं समझतेपुरुष होने के अहंकार में। दूसरे चरण में-समर्पित...

1

डॉ विनीता राहुरिकर की दो कविताएं

  डॉ विनीता राहुरिकर M.Sc. botany, spec. Air microflora, plant pathology.M.A. drawing painting, हिंदीD.C.H.,  1. अब तक विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में 150 से अधिक रचनाओं का प्रकाशन। जिसमे से 62 कहानियां। 2. पराई ज़मीन पर उगे पेड़- कहानी संग्रह,ऊँचे दरख्तों की छाँव में- कविता संग्रहघर-आँगन, पुस्तक मित्र  बाल कथा संग्रहTwo loves of...

0

अनुपम निशान्त के तीन गीत

  अनुपम निशान्त 1. तुम प्रेम का दीप जला देना जब जीवन की साँझ ढलेगी, दिन धुंधले पड़ जाएंगे तब दरवाजे की चौखट पर तुम प्रेम का दीप जला देना। अभी तो सबका संग-साथ है, हर दिन कोई नई बात है, ऋतुएं मद्धम राग सुनाती हैं, अभी प्रकृति में उल्लास...

0

डॉ सजल प्रसाद की कविता ‘इंकलाब’

  डॉ सजल प्रसाद शिक्षा- एम.ए.(हिन्दी), पी-एच.डी.लेखन – ‘अज्ञेय और उनके उपन्यास’ पुस्तक प्रकाशित। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में दर्जनाधिक शोधालेख प्रकाशित। राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार में आलेख प्रस्तुत। सोशल मीडिया के दसाधिक साहित्यिक समूहों में निरंतर काव्य-लेखन।पत्रकारिता – ‘हिन्दुस्तान’ हिन्दी दैनिक से सम्बद्ध। इसके पूर्व ‘आज’ और ‘नवभारत...

2

मनी यादव की दो ग़ज़लें

  मनी यादव एक मौत को अपना आशना रक्खें ज़िन्दगी से भी वास्ता रक्खें चाँद आ तो गया मेरे घर में चाँदनी इसकी हम कहाँ रक्खें शाइरी सुनना कोई खेल नहीं शेर पर ही मुलाहिज़ा रक्खें प्यास दरिया बुझा नही सकता इसलिए पास में कुआँ रक्खें पेड़ तहज़ीब का पड़ा...

0

पल्लवी मुखर्जी की चार कविताएं

  पल्लवी मुखर्जी जन्म- 26 नवंबर, 1967 रामानुजगंज,सरगुजा,छत्तीसगढ़शिक्षा- बी.एएकइस पूरे प्रकरण मेंवे दोनों साक्षी थेपर हर बार तुमजलील होती रहीऔर वोतमाम बेगुनाही का सबूत देकरबच निकलता थाहर बार वो तय मुताबिक उसके अस्तित्व को तार-तार कर देता थावो मूक स्तब्ध होकरदेख रही थी उन आँखों कोजिसने उसे एक नज़र दी थीदुनिया...

1

रमेश शर्मा की पांच कविताएं

  रमेश शर्मा जन्म: 06.6.1966, रायगढ़ छत्तीसगढ़ में . शिक्षा: एम.एस.सी. (गणित) , बी.एड. सम्प्रति: व्याख्याता सृजन: एक कहानी संग्रह मुक्ति 2013 में बोधि प्रकाशन जयपुर से प्रकाशित . छह खंड में प्रकाशित कथा मध्यप्रदेश के छठवें खंड में कहानी सम्मिलित . *कहानियां: समकालीन भारतीय साहित्य , परिकथा, हंस ,पाठ...

1

शहंशाह आलम की पांच कविताएं

  शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’ पांच कविता-संग्रह प्रकाशित। सभी संग्रह चर्चित। आलोचना की पहली किताब ‘कवि का...

0

निर्मल गुप्त की कविता ‘कलिंग कहां-कहां है?’

  निर्मल गुप्त बहुत दिन बीते कलिंग की कोई सुधबुध नहीं लेता चक्रवर्ती सम्राट को बिसराए हुए अरसा हुआ प्रजा लोकल गोयब्ल्स के इर्द गिर्द जुटती है उसे इतिहास की तह में उतरने से अधिक शब्द दर शब्द फरेब के व्याकरण में अपना त्रिदर्शी भविष्यकाल इस किनारे से साफ साफ...

0

भास्कर चौधुरी की पांच कविताएं

  भास्कर चौधुरी परिचय जन्म: 27 अगस्त 1969 रमानुजगंज, सरगुजा (छ.ग.) शिक्षा: एम. ए. (हिंदी एवं अंग्रेजी) बी एड प्रकाशन: एक काव्य संकलन ‘कुछ हिस्सा तो उनका भी है’ एवं गद्य संकलन (यात्रा वृतांत) ‘बस्तर में तीन दिन’ प्रकाशित। लघु पत्रिका ‘संकेत’ का छ्ठा अंक कविताओं पर केंद्रित. कविता, संस्मरण,...

1

अनिरुद्ध सिन्हा की छह ग़ज़लें

  अनिरुद्ध सिन्हा नाम –अनिरुद्ध सिन्हा जन्म -2 मई 1957 शिक्षा –स्नातकोत्तर प्रकाशित कृतियाँ ——————– -(1)नया साल (2)दहेज (कविता-संग्रह ) (3)और वे चुप हो गए (कहानी-संग्रह)  (4)तिनके भी डराते हैं  (5)तपिश  (6)तमाशा (7)तड़प  (8)तो ग़लत क्या है (ग़ज़ल-संग्रह) (9)हिन्दी-ग़ज़ल सौंदर्य और यथार्थ (10)हिन्दी-ग़ज़ल का यथार्थवादी दर्शन(11)उद्भ्रांत की ग़ज़लों का सौंदर्यात्मक...

0

परितोष कुमार ‘पीयूष’ की दो कविताएं

  परितोष कुमार ‘पीयूष’ इस समय के हत्यारे! हत्यारे अब बुद्धिजीवी होते हैंहत्यारे अब शिक्षित होते हैंहत्यारे अब रक्षक होते हैं हत्यारे अब राजनेता होते हैंहत्यारे अब धर्म गुरु होते हैं हत्यारे अब समाज सेवक होते हैं० हत्यारे अब आधुनिक हो गये हैंहत्यारों ने बदल लिया है हत्या को अंजाम देने के अपने तक तरीकों...

0

आचार्य बलवन्त का गीत ‘बेटी’

  आचार्य बलवन्त विभागाध्यक्ष हिंदी कमला कॉलेज ऑफ  मैनेजमेंट स्टडीस 450, ओ.टी.सी.रोड,  कॉटनपेट,  बेंगलूर-560053 (कर्नाटक) मो. 91-9844558064 , 7337810240 Email- balwant.acharya @gmail.com बेटी चेहरे की मुस्कान है बेटी। घर आयी मेहमान है बेटी। क्षमा, प्रेम, करुणा की मूरत, ईश्वर का वरदान है बेटी। श्रद्धा  और विश्वास है बेटी। मन की पावन प्यास है बेटी। चहल-पहल है घर-आँगन की, खुद में ही कुछ खास है बेटी।...

0

अनुपम निशान्त की चार कविताएं

  अनुपम निशान्त चुनार (मिर्जापुर) में जन्म। काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से पत्रकारिता में परास्नातक। देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में काम। संप्रति अमर उजाला, वाराणसी में वरिष्ठ उप संपादक। 1- अपना शून्य गढ़ो कभी-कभी जिंदगी के लिए जरूरी खुशी करीब होकर भी गुम जाती है तलाशने लगो तो मिलती...

2

गांव पर डी एम मिश्र की पांच ग़ज़लें

  डी एम मिश्र एक नम मिट्टी पत्थर हो जाये ऐसा कभी न हो मेरा गाँव, शहर हो जाये ऐसा कभी न हो। हर इंसान में थोड़ी बहुत तो कमियाँ होती हैं वो बिल्कुल ईश्वर हो जाये ऐसा कभी न हो। बेटा, बाप से आगे हो तो अच्छा लगता है...

0

मनी यादव की एक ग़ज़ल

  मनी यादव अश्क़ जब आँख में आ जाते हैं हम इक नई  ग़ज़ल सुनाते हैंं ताइरे दिल बंधा है यादों से पर परिंदे के फड़फड़ाते हैंं यूँ कलाई पकड़ तो ली तुमने शर्म से रोयें मुस्कराते हैंं बर्क़ की चीख़ सुनके बादल भी उसके हालात पर रो जाते हैंं...

0

संगीता गांधी की कविता ‘शाब्दिक जुलाब’

संगीता गांधी वो लिखते हैं बहुत लिखते हैं लेखन से क्रान्ति उद्घोष करते हैं कल स्वयं क्रांति ने पूछा हे लेखक शिरोमणि चलो जो लिखते हो सार्थक करो आओ दो धक्का सत्ता के मकबरों को एक बार ज़ोर से चिल्लाओ प्रतिष्ठानों की सुरंगों में ऐसे कि सब विसंगतियां हों जाएं कम्पित वो बोले —अभी अस्वस्थ हूँ साथ तुम्हारे न चल सकूँगा लगे हैं ” जुलाब...

0

भावना सिन्हा की तीन कविताएं

  डॉ भावना सिन्हा जन्म तिथि -19 जुलाई शिक्षा – पीएचडी (अर्थशास्त्र ) निवास – गया ,बिहार ईमेल — sbhawana190@ gmail.com प्रकाशित कृतियां– यथावत, अंतिम जन, पुस्तक संस्कृति आदि कुछ पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित । 1. पांच बज गए पांच बज गएअभी तक नहीं आए पापा पापा  अब तक क्यों नहीं आएकहीं...

1

आनन्द विश्वास के चार गीत

  आनन्द विश्वास जन्म तारीखः– 01- 07-1949 जन्म एवं शिक्षा- शिकोहाबाद (उत्तर प्रदेश) अध्यापन- अहमदाबाद (गुजरात) और अब- स्वतंत्र लेखन (नई दिल्ली) प्रकाशित कृतियाँ- *देवम* (बाल-उपन्यास) (वर्ष-2012) डायमंड बुक्स दिल्ली। *मिटने वाली रात नहीं* (कविता संकलन) (वर्ष-2012) डायमंड बुक्स दिल्ली। *पर-कटी पाखी* (बाल-उपन्यास) (वर्ष-2014) डायमंड बुक्स दिल्ली। 4.*बहादुर बेटी* (बाल-उपन्यास)...

0

पल्लवी मिश्रा की दो कविताएं

  पल्लवी मिश्रा असिस्टेंट प्रोफेसर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डोईवाला, देहरादून एक पन्नों पर कलम दर्ज़ करती है, दिनों की बर्खास्तगी रातों के बदलते मायने, पन्नों की तारीखें बयाँ करती हैं – दिनों के दस्तावेज़ो में कमतर होती रोशनी और महसूस होती है कलम की मायूसी l पन्नों पर बने फूल,चिड़ियाँ,तारे...