Category: पद्य

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मनोज शर्मा की 2 कविताएं

मनोज शर्मा एक मेरा स्थिर समर्पण साध लो तुम अब नयी सुबह नया आगमन कारवां लिए बढ़ चले अब तुम बूंद नहीं वरन सतत् सत्य हो अनल से दहकते कर्मपथ पर बढ़ चलो तुम हर कदम राह से जोड़ता है तुम अस्थिर हो असहज हो रुको न! दूर कहीं क्षितिज...

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मनी यादव की 4 ग़ज़लें

मनी यादव  एक शाम    कोयल   और   हवा   के    साथ   गाई  मैंने ज़िन्दगी   के   साज़   पर   जो  धुन   बनाई     मैंने कैसे     लफ़्ज़े-बेवफ़ा    लायें    ग़ज़ल   में  अपनी बेवफ़ाई      की       शमा      ख़ुद    जलाई     मैंने छोड़कर  घर  कुछ  कमाने  के  लिये  निकला तब ज़ीस्त     बच्चे     के     कटोरे    से   कमाई    मैंने आज    तेरी   ज़ुल्फ़    क़ाबू  ...

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अनुराग अन्वेषी की ‘भरोसे’ की 10 कविताएं

अनुराग अन्वेषी ए-802, जनसत्ता सोसाइटी, सेक्टर 9, वसुंधरा, गाजियाबाद 201012 (उत्तर प्रदेश) मोबाइल : 9999572266 भरोसा-1 घात-प्रतिघात के एक से बढ़कर एक तूफान देखे हैं मैंने पर हर बार थोड़ा सा हिलता-डुलता और फिर संभलता हुआ टिका रह गया हूं पूरी मजबूती के साथ शायद इसकी एक बड़ी वजह वह भरोसा है जो...

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नूर मुहम्मद ‘नूर’ के ग़ज़ल संग्रह ‘सफ़र कठिन है’ से 5 ग़ज़लें

नूर मुहम्मद ‘नूर’ जन्म :  17 अगस्त 1952, महसोन, कारखाना मछुआवां, कुशीनगर (उ.प्र) प्रकाशित कृतियां :  ताकि खिलखिलाती रहे पृथ्वी (कविता संग्रह), आवाज़ का चेहरा (कहानी संग्रह), दूर तक सहराओं में (ग़ज़ल संग्रह), सफ़र कठिन है (ग़ज़ल संग्रह) पत्र-पत्रिकाओं में नाटक छोड़कर सभी विधाओं में लेखन। अगस्त 2012 में दक्षिण...

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पंखुरी सिन्हा की 4 कविताएं

पंखुरी सिन्हा शिक्षा —एम ए, इतिहास, सनी बफैलो, 2008 पी जी डिप्लोमा, पत्रकारिता, S.I.J.C. पुणे, 1998 बी ए, ऑनर्स, इतिहास, इन्द्रप्रस्थ कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, 1996 अध्यवसाय—-BITV, और ‘The Pioneer’ में इंटर्नशिप, 1997-98 —- FTII में समाचार वाचन की ट्रेनिंग, 1997-98 —– राष्ट्रीय सहारा टीवी में पत्रकारिता, 1998—2000   प्रकाशन———हंस, वागर्थ,...

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विहाग वैभव की 5 कविताएं

विहाग वैभव शोध छात्र – काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) नया ज्ञानोदय , वागर्थ , आजकल , अदहन, सहित विभिन्न महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिकाओं और ब्लॉगों में कविताएँ प्रकाशित । मोबाइल – 8858356891  1. हत्या-पुरस्कार के लिए प्रेस-विज्ञप्ति वे कि जिनकी आँखों में घृणा समुद्र सी फैली है अनंत नीली-काली जिनके हृदय...

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केशव शरण की 6 कविताएं

केशव शरण प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)सम्पर्कः एस 2/564 सिकरौलवाराणसी  221002मो.   9415295137 न संगीत, न फूल उसका हंसना याद आ रहा है संगीत का बिखरना...

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निशान्त की 8 कविताएं

निशान्त कविताओं का बांग्ला और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में अनुवाद। भारतीय ज्ञानपीठ की युवा पुरस्कार योजना के तहत पहला काव्य संग्रह ‘जवान होते हुए लड़के का कबूलनामा’ प्रकाशित उसके बाद राजकमल प्रकाशन से दूसरा काव्य संग्रह ‘जी हां, मैं लिख रहा हूं’ प्रकाशित पुरस्कार :  भारत भूषण अग्रवाल सम्मान,...

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आरती आलोक वर्मा की एक ग़ज़ल

आरती आलोक वर्मा आंखों का दरिया छुपाने के लिये मुस्कुराते  हैं      जमाने  के लिये ।। बात दिल की अब समझता है कौन जायें किसको गम दिखाने के लिये ।। हां हमे मजबूत होना ही पड़ा राह से पत्थर  हटाने के लिये  ।। सर झुकाना मंजूर कर “आरती ” फ़ासले दिल...

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सुभाष पाठक ‘जिया’ की 5 ग़ज़लें

सुभाष पाठक ‘जिया’ जन्मतिथि- 15 सितम्बर 1990 शिक्षा-  बी एस सी,बी एड, प्रकाशन :  कविताकोश, रेख़्ता, पर प्रकाशन, कादम्बिनी, ग़ज़ल के बहाने, दो दर्जन से अधिक ,देश की तमाम साहितियिक पत्रिकाओं ग़ज़ल विशेषांकों में ग़ज़लें प्रकाशित, आकाशवाणी शिवपुरी से समय समय पर काव्य पाठ, अखिल भारतीय मुशायरों कवि सम्मेलनों में...

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भास्कर चौधुरी की पांच कविताएं

भास्कर चौधुरी 1 मनुष्य तुम्हारे चेहरे में जो उदासी का रंग है ऐसा बहुत कम होता है उन्हें जब मैं पढ़ पाता हूँ हाँ जो रंग खुशियों के संग हैं जो रंग ताज़ा हैं जो अभी फीके नहीं पड़े हैं अक़्सर मैं उन्हें ताड़ लेता हूँ .. ऐसा कब होगा...

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ज्योति साह की तीन कविताएं

ज्योति साह हिन्दी प्राध्यापिका रानीगंज, अररिया बिहार शहर के बीचों-बीचपहलेशहर में मैं थी,अब शहर मुझमें है, उनकी तमाम परेशानियों को समेटेसींझती/पकतीऔर उबलती हूँ, अभी उम्मीद के हर दरख्त बंद है शायद….., चलो फिरनिकलो घरों सेढूंढ लायें एक कतरा उम्मीद दरख्तों से अंगोछे में भर,डाल देंशहर के बीचों-बीचहर कोई नहाये/डूबे और इतराये, फिरखिलखिलाये बचपनमुस्कुराये बुढ़ापाऔर होश में हो ज़वानी।। कठपुतली बना के कठपुतली नचाते रहोरखो...

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शिवराम के की तीन कविताएं

शिवराम के ग्राम-कुसौली, पो-  नथईपुर, जिला –  भदोही, उत्तर प्रदेश, 221304 शिक्षा- एम.ए- अंग्रेजी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, (BHU) मोबाइल – +918826222604 ब्लॉग-   shivramkblog. wordpress.com प्रकाशित पुस्तक- Lamp Post And Other Poetry collection (अंग्रेजी में) विश्वविद्यालयी काव्य-प्रतियोगिता में पुरस्कृत व प्रकाशित । कुछ यादें कुछ यादें महफूज रहती हैं सांसों के साथ...

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केशव शरण की 21 ग़ज़लों की श्रृंखला

केशव शरण प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)सम्पर्कः एस 2/564 सिकरौलवाराणसी  221002मो.   94152951371.क्यों नसीबों की बात करते हैंजब ग़रीबों की बात करते हैं फिर कहेंगे हमें उठाने...

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नीरज द्विवेदी की तीन कविताएं

नीरज द्विवेदी  (१)  स्त्री विमर्श पर मेरे सारे तर्क,सारा ज्ञान,सारा पौरुष,चुक जाता हैशब्द टूटने लगते हैं..मै, निरूत्तरित.. आवाकतुम्हे देखने लगता हूँ…..जब तुम बड़ी सहजता से पूछ लेती हो,कि…”मै औरत हूँं,पर…. मै हूँ कौन ?? (२) इतिहास में तुम्हारे साथ सबसे बड़ा छल तब हुआ, जब समाज ने तुम्हे ‘देवी’ कहा… मैं, तुममें ढूढ़ता रहा..माँ, बहन प्रेयसी, पत्नी, सखा,और खुरचता...

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डॉ. सांत्वना श्रीकांत की 6 कविताएं

डॉ. सांत्वना श्रीकांत स्त्रीशिखर पर मिलूंगी मैं तुम्हें,विमुख तुम्हारे मोह से,प्रतिध्वनियों से तिरस्कृत नहीं,तुमको अविलंब समग्र समर्पण के लिए।मुक्त, बंधन इन शब्दों से परे, बुद्ध की मोक्ष प्राप्ति औरयशोधरा की विरह वेदना के शीर्ष पर स्थापित होगा शिखर।पहले चरण में-समर्पित करती हूं अपनी देह,जिसे तुम नहीं समझतेपुरुष होने के अहंकार में। दूसरे चरण में-समर्पित...

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डॉ विनीता राहुरिकर की दो कविताएं

  डॉ विनीता राहुरिकर M.Sc. botany, spec. Air microflora, plant pathology.M.A. drawing painting, हिंदीD.C.H.,  1. अब तक विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में 150 से अधिक रचनाओं का प्रकाशन। जिसमे से 62 कहानियां। 2. पराई ज़मीन पर उगे पेड़- कहानी संग्रह,ऊँचे दरख्तों की छाँव में- कविता संग्रहघर-आँगन, पुस्तक मित्र  बाल कथा संग्रहTwo loves of...

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अनुपम निशान्त के तीन गीत

  अनुपम निशान्त 1. तुम प्रेम का दीप जला देना जब जीवन की साँझ ढलेगी, दिन धुंधले पड़ जाएंगे तब दरवाजे की चौखट पर तुम प्रेम का दीप जला देना। अभी तो सबका संग-साथ है, हर दिन कोई नई बात है, ऋतुएं मद्धम राग सुनाती हैं, अभी प्रकृति में उल्लास...

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डॉ सजल प्रसाद की कविता ‘इंकलाब’

  डॉ सजल प्रसाद शिक्षा- एम.ए.(हिन्दी), पी-एच.डी.लेखन – ‘अज्ञेय और उनके उपन्यास’ पुस्तक प्रकाशित। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में दर्जनाधिक शोधालेख प्रकाशित। राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार में आलेख प्रस्तुत। सोशल मीडिया के दसाधिक साहित्यिक समूहों में निरंतर काव्य-लेखन।पत्रकारिता – ‘हिन्दुस्तान’ हिन्दी दैनिक से सम्बद्ध। इसके पूर्व ‘आज’ और ‘नवभारत...

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मनी यादव की दो ग़ज़लें

  मनी यादव एक मौत को अपना आशना रक्खें ज़िन्दगी से भी वास्ता रक्खें चाँद आ तो गया मेरे घर में चाँदनी इसकी हम कहाँ रक्खें शाइरी सुनना कोई खेल नहीं शेर पर ही मुलाहिज़ा रक्खें प्यास दरिया बुझा नही सकता इसलिए पास में कुआँ रक्खें पेड़ तहज़ीब का पड़ा...