Category: पद्य

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नवीन गोपाल कानगो की 5 ग़ज़लें

प्रोफेसर नवीन गोपाल कानगो प्राध्यापक एवं अध्यक्ष सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग समन्वयक, परिष्कृत उपकरण केंद्र डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर (म.प्र.) ४ ७०००३  Mobile 9425635736, nkango@gmail.com एक कहकशाँ हूँ मैं  सारे सितारे मुझमें बहता दरिया हूँ सारे किनारे मुझमें ये मेरा दिल है कि आईनाख़ाना मैं सभी में नज़र आता...

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सुशान्त सुप्रिय की 5 कविताएं

सुशान्त सुप्रिय A-5001, गौड़ ग्रीन सिटी, वैभव खंड, इंदिरापुरम, ग़ाज़ियाबाद – 201014 ( उ.प्र. ) मो : 8512070086 ई-मेल : sushant1968@gmail.com बचपन  दशकों पहले एक बचपन था बचपन उल्लसित, किलकता हुआ सूरज, चाँद और सितारों के नीचे एक मासूम उपस्थिति बचपन चिड़िया का पंख था बचपन आकाश में शान से उड़ती रंगीन पतंगें थीं बचपन माँ का दुलार था बचपन पिता की गोद का प्यार था समय के साथ चिड़ियों के पंख कहीं खो गए सभी पतंगें कट-फट गईं माँ सितारों में जा छिपी पिता सूर्य में समा गए बचपन अब एक लुप्तप्राय जीव है जो केवल स्मृति के अजायबघर में पाया जाता है वह एक खो गई उम्र है जब क्षितिज संभावनाओं से भरा था एकदिन  एक दिन मैंने कैलेंडर से कहा — आज मैं मौजूद नहीं हूँ और अपने मन की करने लगा एक दिन मैंने कलाई-घड़ी से कहा — आज मैं मौजूद नहीं हूँ और खुद में खो गया एक दिन मैंने बटुए से कहा — आज मैं मौजूद नहीं हूँ और बाज़ार को अपने सपनों से निष्कासित कर दिया एक दिन मैंने आईने से कहा — आज मैं मौजूद नहीं हूँ और पूरे दिन उसकी शक्ल नहीं देखी एक दिन मैंने अपनी बनाईं...

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पल्लवी मुखर्जी की 5 कविताएं

पल्लवी मुखर्जी एक आओ सुनते है एक दूसरे की धड़कनों को धड़कनेंधड़कती हैं जैसेघड़ी की सुईटिक-टिक करती और ले जाती हैं हमेंं उम्र के उस दौर मेंजहाँ न मैं….मैं रहती हूँन तुम….तुम रहते हो हम एक हो जाते हैंउम्मीदों का हरापन लेकर  दो तुम एक पुल होजिस पर सेतमाम रिश्ते गुज़र रहे हैंधड़ाधड़ जैसे गुज़रती...

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पुष्कर बन्धु की 5 कविताएं

पुष्कर बन्धु काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक व परास्नातक ( हिन्दी साहित्य ) 2017 । सोशल मीडिया पर कविताओं का प्रकाशन । साहित्य , समाज और राजनीति में  गहरी रुचि । पता – हौसला सिंह लॉज, नसीरपुर, सुसुवाहि , हैदराबाद गेट , BHU चयन और प्रस्तुति : विहाग वैभव  ...

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नदी पर रोहित ठाकुर की 4 कविताएं

रोहित ठाकुर जन्म तिथि – 06/12/ 1978 शैक्षणिक योग्यता  –   परा-स्नातक राजनीति विज्ञान,विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित, विभिन्न कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ   वृत्ति  –   सिविल सेवा परीक्षा हेतु शिक्षण   रूचि : – हिन्दी-अंग्रेजी साहित्य अध्ययन  पत्राचार :- जयंती- प्रकाश बिल्डिंग, काली मंदिर रोड,संजय गांधी नगर, कंकड़बाग , पटना-800020, बिहार  मोबाइल...

दिलीप कुमार की 6 ग़ज़लें 0

दिलीप कुमार की 6 ग़ज़लें

दिलीप कुमार जन्म तिथि : 28 अक्टूबर 1974।मूल निवास : बलिया,  रूपौली, पूर्णिया, बिहार संप्रति- शाखा प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक               वास्को दा गामा मुख्य शाखा, गोवा।संपर्क : 8806660113 एक   मुझे खुद की नहीं है  फिकर अब तो ।कोई करता नहीं मेरा जिकर अब तो।।सिर्फ रस्ता ही है...

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भास्कर चौधुरी की 10 कविताएं

1 माँ का आना माँ के आते ही मैं असहज हो जाता हूँ हो जाती है पत्नी असहज हम दोनों के कान खड़े छोटी-छोटी बातों को पकड़ लेने की क्षमता एक-ब-एक दुगुनी-तिगुनी हो जाती है   माँ के आते ही खुश हो जाती है हमारी चार साल की बिटिया वह...

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मनोज शर्मा की 2 कविताएं

मनोज शर्मा एक मेरा स्थिर समर्पण साध लो तुम अब नयी सुबह नया आगमन कारवां लिए बढ़ चले अब तुम बूंद नहीं वरन सतत् सत्य हो अनल से दहकते कर्मपथ पर बढ़ चलो तुम हर कदम राह से जोड़ता है तुम अस्थिर हो असहज हो रुको न! दूर कहीं क्षितिज...

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मनी यादव की 4 ग़ज़लें

मनी यादव  एक शाम    कोयल   और   हवा   के    साथ   गाई  मैंने ज़िन्दगी   के   साज़   पर   जो  धुन   बनाई     मैंने कैसे     लफ़्ज़े-बेवफ़ा    लायें    ग़ज़ल   में  अपनी बेवफ़ाई      की       शमा      ख़ुद    जलाई     मैंने छोड़कर  घर  कुछ  कमाने  के  लिये  निकला तब ज़ीस्त     बच्चे     के     कटोरे    से   कमाई    मैंने आज    तेरी   ज़ुल्फ़    क़ाबू  ...

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अनुराग अन्वेषी की ‘भरोसे’ की 10 कविताएं

अनुराग अन्वेषी ए-802, जनसत्ता सोसाइटी, सेक्टर 9, वसुंधरा, गाजियाबाद 201012 (उत्तर प्रदेश) मोबाइल : 9999572266 भरोसा-1 घात-प्रतिघात के एक से बढ़कर एक तूफान देखे हैं मैंने पर हर बार थोड़ा सा हिलता-डुलता और फिर संभलता हुआ टिका रह गया हूं पूरी मजबूती के साथ शायद इसकी एक बड़ी वजह वह भरोसा है जो...

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नूर मुहम्मद ‘नूर’ के ग़ज़ल संग्रह ‘सफ़र कठिन है’ से 5 ग़ज़लें

नूर मुहम्मद ‘नूर’ जन्म :  17 अगस्त 1952, महसोन, कारखाना मछुआवां, कुशीनगर (उ.प्र) प्रकाशित कृतियां :  ताकि खिलखिलाती रहे पृथ्वी (कविता संग्रह), आवाज़ का चेहरा (कहानी संग्रह), दूर तक सहराओं में (ग़ज़ल संग्रह), सफ़र कठिन है (ग़ज़ल संग्रह) पत्र-पत्रिकाओं में नाटक छोड़कर सभी विधाओं में लेखन। अगस्त 2012 में दक्षिण...

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पंखुरी सिन्हा की 4 कविताएं

पंखुरी सिन्हा शिक्षा —एम ए, इतिहास, सनी बफैलो, 2008 पी जी डिप्लोमा, पत्रकारिता, S.I.J.C. पुणे, 1998 बी ए, ऑनर्स, इतिहास, इन्द्रप्रस्थ कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, 1996 अध्यवसाय—-BITV, और ‘The Pioneer’ में इंटर्नशिप, 1997-98 —- FTII में समाचार वाचन की ट्रेनिंग, 1997-98 —– राष्ट्रीय सहारा टीवी में पत्रकारिता, 1998—2000   प्रकाशन———हंस, वागर्थ,...

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विहाग वैभव की 5 कविताएं

विहाग वैभव शोध छात्र – काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) नया ज्ञानोदय , वागर्थ , आजकल , अदहन, सहित विभिन्न महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिकाओं और ब्लॉगों में कविताएँ प्रकाशित । मोबाइल – 8858356891  1. हत्या-पुरस्कार के लिए प्रेस-विज्ञप्ति वे कि जिनकी आँखों में घृणा समुद्र सी फैली है अनंत नीली-काली जिनके हृदय...

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केशव शरण की 6 कविताएं

केशव शरण प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)सम्पर्कः एस 2/564 सिकरौलवाराणसी  221002मो.   9415295137 न संगीत, न फूल उसका हंसना याद आ रहा है संगीत का बिखरना...

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निशान्त की 8 कविताएं

निशान्त कविताओं का बांग्ला और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में अनुवाद। भारतीय ज्ञानपीठ की युवा पुरस्कार योजना के तहत पहला काव्य संग्रह ‘जवान होते हुए लड़के का कबूलनामा’ प्रकाशित उसके बाद राजकमल प्रकाशन से दूसरा काव्य संग्रह ‘जी हां, मैं लिख रहा हूं’ प्रकाशित पुरस्कार :  भारत भूषण अग्रवाल सम्मान,...

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आरती आलोक वर्मा की एक ग़ज़ल

आरती आलोक वर्मा आंखों का दरिया छुपाने के लिये मुस्कुराते  हैं      जमाने  के लिये ।। बात दिल की अब समझता है कौन जायें किसको गम दिखाने के लिये ।। हां हमे मजबूत होना ही पड़ा राह से पत्थर  हटाने के लिये  ।। सर झुकाना मंजूर कर “आरती ” फ़ासले दिल...

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सुभाष पाठक ‘जिया’ की 5 ग़ज़लें

सुभाष पाठक ‘जिया’ जन्मतिथि- 15 सितम्बर 1990 शिक्षा-  बी एस सी,बी एड, प्रकाशन :  कविताकोश, रेख़्ता, पर प्रकाशन, कादम्बिनी, ग़ज़ल के बहाने, दो दर्जन से अधिक ,देश की तमाम साहितियिक पत्रिकाओं ग़ज़ल विशेषांकों में ग़ज़लें प्रकाशित, आकाशवाणी शिवपुरी से समय समय पर काव्य पाठ, अखिल भारतीय मुशायरों कवि सम्मेलनों में...

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भास्कर चौधुरी की पांच कविताएं

भास्कर चौधुरी 1 मनुष्य तुम्हारे चेहरे में जो उदासी का रंग है ऐसा बहुत कम होता है उन्हें जब मैं पढ़ पाता हूँ हाँ जो रंग खुशियों के संग हैं जो रंग ताज़ा हैं जो अभी फीके नहीं पड़े हैं अक़्सर मैं उन्हें ताड़ लेता हूँ .. ऐसा कब होगा...

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ज्योति साह की तीन कविताएं

ज्योति साह हिन्दी प्राध्यापिका रानीगंज, अररिया बिहार शहर के बीचों-बीचपहलेशहर में मैं थी,अब शहर मुझमें है, उनकी तमाम परेशानियों को समेटेसींझती/पकतीऔर उबलती हूँ, अभी उम्मीद के हर दरख्त बंद है शायद….., चलो फिरनिकलो घरों सेढूंढ लायें एक कतरा उम्मीद दरख्तों से अंगोछे में भर,डाल देंशहर के बीचों-बीचहर कोई नहाये/डूबे और इतराये, फिरखिलखिलाये बचपनमुस्कुराये बुढ़ापाऔर होश में हो ज़वानी।। कठपुतली बना के कठपुतली नचाते रहोरखो...

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शिवराम के की तीन कविताएं

शिवराम के ग्राम-कुसौली, पो-  नथईपुर, जिला –  भदोही, उत्तर प्रदेश, 221304 शिक्षा- एम.ए- अंग्रेजी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, (BHU) मोबाइल – +918826222604 ब्लॉग-   shivramkblog. wordpress.com प्रकाशित पुस्तक- Lamp Post And Other Poetry collection (अंग्रेजी में) विश्वविद्यालयी काव्य-प्रतियोगिता में पुरस्कृत व प्रकाशित । कुछ यादें कुछ यादें महफूज रहती हैं सांसों के साथ...