Category: फेसबुक से

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चन्द्र की कविता ‘दु:ख’

बहुत दुख से जब ग्रस्त हो जाता हूं मैं तब भीतर भीतर पसीज पसीज के रो रो जाता हूं तब अपनी पलकों पर पसरी हुई कई कई दिनों की मैल को  धो धो जाता हूं और  अंततः किसी घनेरी रात की लम्बी नींद में चुपचाप  सो सो जाता हूं और...

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सीमा संगसार की कविता ‘आतंकित प्रेम’

सीमा संगसार प्रेम किस चिङ़िया का नाम है उसे तो उङ़ना था किसी उन्मुक्त गगन में उसे रहना था  किसी स्त्री की बेलौस हँसी में …. बारूदी सुरंगों से  गुजरता हुआ  हमारा मुल्क गोलियों की मार खाए  कराह रहा है प्रेम दिवस पर …. नफरतों के इस दौर म़े प्रेम...

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शुक्ला चौधुरी की 3 कविताएं

शुक्ला चौधुरी मां एक जब घर से अचानक गायब हो जाती थी मां पहले हम चावल के कनस्तर में झांकते फिर दाल मसाले के डिब्बे से पूछते तब भी अगर मां आवाज़ नहीं देती तब हम चूल्हे के पास खड़े हो जाते और जोर-जोर से रोते मां मां मां चूल्हे...