Category: बातचीत

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जो पढ़ रहे हैं, वही कहानियों को बचा रहे हैं : शंकर

कहानी के विभिन्न पहलुओं पर वरिष्ठ कथाकार और परिकथा के संपादक शंकर से ख़ास बातचीत। बातचीत की है वरिष्ठ कथाकार हरियश राय और सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने सत्येंद्र : शंकर जी, आप वरिष्ठ कथाकार भी हैं और संपादक भी। तो शुरुआत इसी सवाल से करते हैं कि आखिर कहानी है...

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वरिष्ठ कथाकार रमेश उपाध्याय से सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की बातचीत

हिन्दी साहित्य में एक आंदोलन की ज़रूरत रमेश उपाध्याय जन्म  : 1 मार्च 1942 शिक्षा : एमए, पीएचडी कार्य : एक दशक तक पत्रकार  रहने के बाद तीन दशकों तक दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन। साहित्य और संस्कृति की पत्रिका ‘कथन’ के साथ-साथ ‘आज के सवाल’ नामक पुस्तक श्रृंखला का संपादन।...

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‘कविता लिखने से पहले नेक इंसान बनना ज़्यादा जरूरी’

वरिष्ठ कवि विजेंद्र से सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की ख़ास बातचीत लिटरेचर प्वाइंट संवाद वरिष्ठ कवि विजेंद्र 84 साल की उम्र में भी पूरी सक्रिय हैं. कविता लिखते हैं, पेंटिंग बनाते हैं। फेसबुक पर भी सक्रिय हैं। हिन्दी कविता में उनका स्थान क्या है, यह नए सिरे से बताने की जरूरत...

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‘कविता लिखना आसान काम नहीं’

1.कविता के प्रति आपका झुकाव कैसे उत्पन्न हुआ ? शहंशाह आलम : मेरा पूरा समय अभाव में गुज़रा है। होश संभाला तो देखा पिता हम पाँच भाई और तीन बहनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिता बिहार स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कंपनी के मुंगेर प्रतिष्ठान में मामूली ड्राइवर थे। जो...

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बच्चों को पुस्तकें उपहार में दी जानी चाहिए : दिविक रमेश

20वीं शताब्दी के आठवें दशक में अपने पहले ही कविता–संग्रह ‘रास्ते के बीच’ से चर्चित हो जाने वाले सुप्रतिष्ठित कवि दिविक रमेश को 38 वर्ष की आयु में ही ‘रास्ते के बीच ’ और  ‘खुली आँखों में आकाश’ जैसी साहित्यिक कृतियों पर सोवियत लैंड नेहरू अवॉर्ड मिला। दिविक रमेश ने...