Category: समीक्षा

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यादों का खूबसूरत कैनवास

पुस्तक समीक्षा सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ‘रवि मेरे लिए जीते-जी एक लंबी प्रेम कहानी थे। अब तो वे कथा अनन्ता बन गए हैं।’  वाणी प्रकाशन से सद्य प्रकाशित ‘अन्दाज-ए-बयां उर्फ़ रवि कथा’ में ममता कालिया ने एक जगह यह बात लिखी है। यह पुस्तक रवींद्र कालिया की इन्हीं अनन्त कथाओं में...

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अच्छे और बुरे आदमी के बीच की ‘बारीक रेखा’ की कहानी

प्रज्ञा की कहानी ‘बुरा आदमी’ पर सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की टिप्पणी कबीर कह गए हैं, बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय हर भले आदमी के भीतर एक बुरा आदमी छिपा होता है। वह कब फन उठाएगा कोई नहीं जानता।...

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समाज में बढ़ती सांप्रदायिकता से मुठभेड़ करतीं कहानियां

‘पहल 122′ में प्रकाशित गौरीनाथ की कहानी ‘हिन्दू’ और हरियश राय की कहानी ‘महफिल’ पर एक टिप्पणी सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ‘पहल जून-जुलाई 2020’ में प्रकाशित गौरीनाथ की कहानी ‘हिन्दू’  न केवल इस अंक की उपलपब्धि है बल्कि मौजूदा समय को बड़े प्रभावी ढंग से रेखांकित करती एक महत्वपूर्ण कहानी है।...