Category: साहित्यकार

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विष्णु खरे को हार्दिक श्रद्धांजलि

कवि-आलोचक-संपादक विष्णु खरे का जाना सचमुच हिन्दी साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है। लिटरेचर प्वाइंट की ओर से उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि। वे हमारे दिलों में अमर रहेंगे। उनकी इस कविता को पढ़िए और महसूस कीजिए कि वो कितने महान कवि थे।   नींद में कैसे मालूम कि जो नहीं रहा...

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आदमी को मुकम्मल बनाने वाली कविताएं

शहंशाह आलम आनन्द गुप्ता जन्म : 19 जुलाई 1976, कोलकाता शिक्षा : कलकत्ता विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर प्रकाशन : देश की कुछ महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में कविताओं का प्रकाशन। कुछ आलेख भी प्रकाशित। कई ब्लॉग पर कविताएँ प्रकाशित। कुछ भारतीय भाषाओं में कविताओं के अनुवाद प्रकाशित। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन...

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आम आदमी का संत्रास बयां करने वाले कवि विनय सौरभ

शहंशाह आलम इस हफ्ते के कवि:  विनय सौरभ एक गोरखा गुज़रा है सीटी बजाता हुआ संदर्भ : विनय सौरभ की कविताएँ शहंशाह आलम संथाल परगना का यह छोटा-सा गाँव : नोनीहाट जो असल में अब गाँव भी नहीं रहा क़स्बा कह सकते हो लेकिन इसकी पहचान पर अब शहर के...

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औजार की तरह भाषा का इस्तेमाल करते उमाशंकर सिंह परमार

शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’, ‘थिरक रहा देह का पानी’ छह कविता-संग्रह तथा आलोचना की पहली किताब ‘कवि...

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तुम्हारे मौन का गट्ठर लिए घूम रहा

शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’, ‘थिरक रहा देह का पानी’ छह कविता-संग्रह तथा आलोचना की पहली किताब ‘कवि...

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महाप्राण की ‘निष्प्राण’ होतीं स्मृतियां

आशीष सिंह सारी  तस्वीरें : आशीष सिंह तस्वीरों में निराला का गांव मेरे भाई ! उनकी निगाह में “गढ़ाकोला ” इसलिये नहीं है क्योंकि उनकी निगाह में आम -अवाम है ही नहीं – “”- – महाकवि के गांव से वापस आकर एक कुछ देखी — कुछ सुनी रपट आपके लिए...

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भैरव प्रसाद गुप्त : व्यक्तित्व के कुछ पहलू

कर्ण सिंह चौहान साहित्य से समाज के मन को बदलने की बात भले ही कुछ लोगों को नागवार गुजरे लेकिन ऐसा तो शायद ही कोई लेखक हो जो अपने लिखे को इतना अर्थहीन मानता हो कि अपने पाठक पर किसी प्रतिक्रिया की आशा ही न करे । सामाजिक परिवर्तन में...

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दूधनाथ सिंह कभी मरते नहीं, दिलों में रहते हैं

मैं मरने के बाद भी याद करूँगा तुम्हें तो लो, अभी मरता हूँ झरता हूँ जीवन की डाल से निरन्तर हवा में तरता हूँ स्मृतिविहीन करता हूँ अपने को तुमसे हरता हूँ ।”   इन पंक्तियों के रचयिता मशहूर साहित्यकार और साठोत्तरी कहानी के नायक दूधनाथ सिंह नहीं रहे। 11...

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हताश लोगों के साथ खड़ा कवि विमलेश त्रिपाठी

शहंशाह आलम कवि परिचय विमलेश त्रिपाठी परिचय : विमलेश त्रिपाठी बक्सर, बिहार के एक गाँव हरनाथपुर में जन्म। प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही। प्रेसिडेंसी कॉलेज से स्नातकोत्तर, बीएड। कलकत्ता विश्वविद्यालय से केदारनाथ सिंह की कविताओं पर पी-एच.डी। देश की लगभग सभी पत्र-पत्रिकाओं में कविता, कहानी, समीक्षा, लेख आदि का प्रकाशन।...

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प्यार की रगड़ वाला कवि नीलकमल

  शहंशाह आलम मेरे पास एक माचिस की डिबिया है माचिस की डिबिया में कविता नहीं है माचिस की डिबिया में तीलियाँ हैं माचिस की तीलियों में कविता नहीं है तीलियों की नोक पर है रत्ती भर बारूद रत्ती भर बारूद में भी कहीं नहीं है कविता आप तो जानते...

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परसाई की रचनाओं का रंगमंचीय दृष्टिकोण

  अखतर अली मूलतः नाटककार, समीक्षा एवं लघु कथाआें का निरंतर लेखन, आमानाका, कुकुर बेड़ा रायपुर (छ. ग.) माे. न. 9826126781 हरिशंकर परसाई को पढ़ना स्वयं को अपडेट करना है | जब हम परसाई जी को पढ़ रहे होते हैं दरअसल उस क्षण हम अपने समय को पढ़ रहे होते...

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प्यार करना रचनाकार होना है

  वेद प्रकाश प्यार एक सहज व्यक्ति की सहज अभिव्यक्ति है । हम इसे श्रेणियों में विभक्त नहीं कर सकते । एक मन से दूसरे मन की आभासी बातचीत जब रूपाकार होने लगती है, तो प्रेम का स्वरूप तैयार होने लगता है । यह किसी को बताया नहीं जाता और...

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गरीब-शोषितों के लेखक थे गुरदयाल सिंह

वीणा भाटिया गुरदयाल सिंह भारतीय साहित्य की यथार्थवादी परंपरा के ऐसे साहित्यकार हैं जिन्होंने पूरी दुनिया में पंजाबी उपन्यास और कथा साहित्य को एक विशिष्ट पहचान दिलाई। विश्व साहित्य में इन्हें प्रेमचंद, गोर्की और लू शुन के समकक्ष माना जाता है। प्रेमचंद के बाद शायद ही किसी भारतीय साहित्यकार को दुनिया...

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आत्मसंघर्ष के महत्वपूर्ण कवि तेजिंदर गगन

सुशील कुमार “यह कविता नहीं एक बयान है कि अब चिड़िया को कविता में आने की इजाजत नहीं दी जाएगी। चिड़ियां, पेड़, बच्चा और मां – इनमें से कोई भी नहीं आएगा कविता में यहां तक कि कविता भी नहीं । समय के ऐसे दौर में जब बादशाह खाता है...

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मुक्तिबोध : सातवीं इन्द्री का औघड़ साधक

भरत प्रसाद कुल आयु कुछ अधिक नहीं- महज 47 साल। मतलब नौजवानी से कुछ ही कदम आगे। पथ-प्रदर्शक आलोचना की विलक्षण मौलिकता लिए जीना, कविता की तीखी धार चमका-चमका कर महाबली कुसमय से लड़ने का हौसला बांधना और बित्ता भर की कलम के आगे अपने सुख, आनन्द, सुकून, शान्ति, स्वास्थ्य...

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महाश्वेता देवी का जीवन और साहित्य

कृपाशंकर चौबे चौदह जनवरी 1926 को ब्रह्म मुहूर्त में, ढाका के जिंदाबहार लेन में जिस शिशु का जन्म हुआ, उसकी मौजूदा परिणति स्वाभाविक है। महाश्वेता देवी के जन्म के समय माँ धरित्री देवी मायके में थीं। माँ की उम्र तब 18 वर्ष और पिता मनीष घटक की 25 वर्ष थी।...

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बी आर विप्लवी की रचना प्रक्रिया : आदमियत का आरजूनामा

राजकिशोर राजन मानवता का दर्द लिखेंगे माटी की बू-बास लिखेंगे हम अपने इस कालखंड का एक नया इतिहास लिखेंगे जब मैं अपने समय के एक महत्वपूर्ण गजलकार बी.आर.विप्लवी के रचना कर्म से गुजर रहा था तो अदम गोंडवी की ये पंक्तियाँ रह-रह कौंध जा रही थी। कारण कि विप्लवी जी...