Category: साहित्यकार

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प्यार की रगड़ वाला कवि नीलकमल

  शहंशाह आलम मेरे पास एक माचिस की डिबिया है माचिस की डिबिया में कविता नहीं है माचिस की डिबिया में तीलियाँ हैं माचिस की तीलियों में कविता नहीं है तीलियों की नोक पर है रत्ती भर बारूद रत्ती भर बारूद में भी कहीं नहीं है कविता आप तो जानते...

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परसाई की रचनाओं का रंगमंचीय दृष्टिकोण

  अखतर अली मूलतः नाटककार, समीक्षा एवं लघु कथाआें का निरंतर लेखन, आमानाका, कुकुर बेड़ा रायपुर (छ. ग.) माे. न. 9826126781 हरिशंकर परसाई को पढ़ना स्वयं को अपडेट करना है | जब हम परसाई जी को पढ़ रहे होते हैं दरअसल उस क्षण हम अपने समय को पढ़ रहे होते...

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प्यार करना रचनाकार होना है

  वेद प्रकाश प्यार एक सहज व्यक्ति की सहज अभिव्यक्ति है । हम इसे श्रेणियों में विभक्त नहीं कर सकते । एक मन से दूसरे मन की आभासी बातचीत जब रूपाकार होने लगती है, तो प्रेम का स्वरूप तैयार होने लगता है । यह किसी को बताया नहीं जाता और...

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गरीब-शोषितों के लेखक थे गुरदयाल सिंह

वीणा भाटिया गुरदयाल सिंह भारतीय साहित्य की यथार्थवादी परंपरा के ऐसे साहित्यकार हैं जिन्होंने पूरी दुनिया में पंजाबी उपन्यास और कथा साहित्य को एक विशिष्ट पहचान दिलाई। विश्व साहित्य में इन्हें प्रेमचंद, गोर्की और लू शुन के समकक्ष माना जाता है। प्रेमचंद के बाद शायद ही किसी भारतीय साहित्यकार को दुनिया...

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आत्मसंघर्ष के महत्वपूर्ण कवि तेजिंदर गगन

सुशील कुमार “यह कविता नहीं एक बयान है कि अब चिड़िया को कविता में आने की इजाजत नहीं दी जाएगी। चिड़ियां, पेड़, बच्चा और मां – इनमें से कोई भी नहीं आएगा कविता में यहां तक कि कविता भी नहीं । समय के ऐसे दौर में जब बादशाह खाता है...

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मुक्तिबोध : सातवीं इन्द्री का औघड़ साधक

भरत प्रसाद कुल आयु कुछ अधिक नहीं- महज 47 साल। मतलब नौजवानी से कुछ ही कदम आगे। पथ-प्रदर्शक आलोचना की विलक्षण मौलिकता लिए जीना, कविता की तीखी धार चमका-चमका कर महाबली कुसमय से लड़ने का हौसला बांधना और बित्ता भर की कलम के आगे अपने सुख, आनन्द, सुकून, शान्ति, स्वास्थ्य...

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महाश्वेता देवी का जीवन और साहित्य

कृपाशंकर चौबे चौदह जनवरी 1926 को ब्रह्म मुहूर्त में, ढाका के जिंदाबहार लेन में जिस शिशु का जन्म हुआ, उसकी मौजूदा परिणति स्वाभाविक है। महाश्वेता देवी के जन्म के समय माँ धरित्री देवी मायके में थीं। माँ की उम्र तब 18 वर्ष और पिता मनीष घटक की 25 वर्ष थी।...

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बी आर विप्लवी की रचना प्रक्रिया : आदमियत का आरजूनामा

राजकिशोर राजन मानवता का दर्द लिखेंगे माटी की बू-बास लिखेंगे हम अपने इस कालखंड का एक नया इतिहास लिखेंगे जब मैं अपने समय के एक महत्वपूर्ण गजलकार बी.आर.विप्लवी के रचना कर्म से गुजर रहा था तो अदम गोंडवी की ये पंक्तियाँ रह-रह कौंध जा रही थी। कारण कि विप्लवी जी...