Category: GHAZAL

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पीयूष शिवम की ग़ज़ल ‘छाँव तो कर दे’

कब  से चल रहा हूँ धूप में तेरी, ज़िन्दगी इस दोपहर में छाँव तो कर दे। याद धुंधली हो गई गर्दिश में गहरा कर, इक दफ़ा मेरे शहर को गाँव तो कर दे। ख़ून देखा है नहीं अपना बहुत दिन से, ख़ंजर-ए-हालात के कुछ घाव तो कर दे। ये तसल्ली...

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नकुल गौतम की ग़ज़ल

अब मेरे दिल में नहीं है घर तेरा ज़िक्र होता है मगर अक्सर तेरा हाँ! ये माना है मुनासिब डर तेरा आदतन नाम आ गया लब पर तेरा भूल तो जाऊँ तुझे पर क्या करूँ उँगलियों को याद है नम्बर तेरा कर गया ज़ाहिर तेरी मजबूरियां टाल देना बात यूँ...

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नकुल गौतम की ग़ज़ल

ग़ज़ल झड़ी जब लग रही हो आँसुओं की कमी महसूस क्या हो बदलियों की हवेली थी यहीं कुछ साल पहले जुड़ी छत कह रही है इन घरों की वो मुझ पर मेहरबां है आज क्यों महक-सी आ रही है साज़िशों की मुझे पहले मुहब्बत हो चुकी है मुझे आदत है...

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पीयूष शिवम की ग़ज़ल ‘अम्मा’

रो रहा था मैं करूँगा क्या अंधेरा हो गया, ज्यों छिपाया माँ ने आँचल में सवेरा हो गया।   मिल्कियत सारे जहाँ की छान ली कुछ न मिला, गोद में जाकर गिरे माँ की, बसेरा हो गया।   इस फ़रेब-ओ-झूठ  की दुनिया की नज़र न लगे, माँ की बाँहों में...