Category: SELF PUBLISHING

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मुकेश बोहरा अमन की कविता ‘शब्द-साधना’

शब्दों को जानो, शब्दों को मानो , शब्दों की बातें होती निराली । शब्दों का व्यापार, शब्दों का व्यवहार , शब्दों से है होली, दीवाली ।। शब्दों से तुम हो , शब्दों से मैं हूँ । शब्दों से हारा , शब्दों से जय हूँ ।। शब्द है करेला व अम्बुआ...

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विशाल मिश्रा की कविता ‘आज भी’

गुलाबी सूती कपड़े पर हरे धागे से कढ़े फूल आज भी ख़ुशबू देते हैं। बेतरतीब बालों को सलीका सिखाने की ख़ातिर वो चार चिमटियां आज भी उनको दाबे हैं। चमकता नग नाक पर उस चेहरे की नूर बढ़ाने में सबसे आगे है। गोरी पतली दूसरी वाली उंगली में सोने का...

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नीरू मोहन की कविता ‘ईश्वर की कृपा जीवलोक तक’

जापानी काव्य शैली ताँका संरचना- 5+7+5+7+7= 31 वर्णदो कवियों के सहयोग से काव्य सृजन पहला कवि-5+7+5 = 17 भाग की रचना , दूसरा कवि 7+7 की पूर्ति के साथ श्रृंखला को पूरी करता |पूर्ववर्ती 7+7 को आधार बनाकर अगली श्रृंखला 5+7+5 यह क्रम चलता रहता है इसके आधार पर अगली...

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मनीषा जोबन देसाई की कहानी ‘अब क्या कहे ?’

“जितवन …..क्या कर रहे हो बाहर ? देखो ये कौन आया है ?” माँ की आवाज़ सुनकर अपने स्कूटर की लाइट ठीक कर रहा जित जल्दी से घर के अंदर आया । “ओह ,कब आये आप बिजल भैया ?” “बस अभी अभी… मेरी मुंबई की पढाई ख़त्म हुई और वापस...

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मनीषा जोबन देसाई की कविता ‘काफी नहीं?’

बैठे रहते है जब हम खोये हुए सपनो की खोज मे , आसमान से टपकते पानी से संवेदना हथेली पर शायद फिर से संजो ले !   पर .. ये जो समय है, वो दूर से चमक कर टूटते हुए तारे की तरह बिखर बिखर जाता है, और ..आंसुओ की...

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राजेश”ललित”शर्मा की कविता ‘पुल’

कहाँ आसान है पुल होना दो पाटों को पाटना टूटने का ख़तरा है हरदम लरजता है जैसे ही कोई गुज़रता है जाता है कोई इस ओर से उस ओर पुल होना बहुत कठिन है दरक जाये ईंट ढह जाता है सारा पानी भी बहता अपनी लय से कभी तेज़ कभी...

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पीयूष शिवम की ग़ज़ल ‘अम्मा’

रो रहा था मैं करूँगा क्या अंधेरा हो गया, ज्यों छिपाया माँ ने आँचल में सवेरा हो गया।   मिल्कियत सारे जहाँ की छान ली कुछ न मिला, गोद में जाकर गिरे माँ की, बसेरा हो गया।   इस फ़रेब-ओ-झूठ  की दुनिया की नज़र न लगे, माँ की बाँहों में...

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शशांक सफ़ीर की कविता याद

याद आए कभी जो मेरी आपको देखकर आईना मुस्कुरा दीजिए अक्स मेरा तेरी आँख में यदि दिखे सनम पलकों का मोती बना लीजिए दिल की दुनिया अमावस सी बदरंग हो जब स्वयं की स्वयं से प्रबल जंग हो राह तन्हा हो या फिर कोई रंज हो दूर मंजिल लगे न...

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दीपक अरोड़ा स्‍मृति पांडुलिपि प्रकाशन योजना-2017 हेतु पांडुलिपियां आमंत्रित

कवि दीपक अरोड़ा की स्‍मृति में शुरु की गई पांडुलिपि प्रकाशन सहयोग योजना के दूसरे वर्ष के लिए बोधि प्रकाशन की ओर से हिन्‍दी कविता पुस्‍तकों की पांडुलिपियां सादर आमंत्रित हैं। पहले वर्ष में पांच पुस्‍तकों का चयन किया गया था- जिनका प्रकाशन हो चुका है। इस वर्ष तथा आने...

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14 वें अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में वार्षिक साहित्यिक सम्मानों हेतु प्रविष्टियाँ आमंत्रित

रायपुर । अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी और हिंदी-संस्कृति को प्रतिष्ठित करने के लिए साहित्यिक वेब पत्रिका ‘सृजनगाथा डॉट कॉम’ द्वारा पिछले 13 वर्षों से प्रतिवर्ष दिए जानेवाले सम्मानों/पुरस्कारों के लिए हिंदी के रचनाकार, प्रकाशक, संपादक, साहित्यिक संस्थाएं एवं अनुशंसक पाठक प्रविष्टियाँ 30 जून 2017 तक प्रेषित कर सकते हैं ।...

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‘कविता लिखना आसान काम नहीं’

1.कविता के प्रति आपका झुकाव कैसे उत्पन्न हुआ ? शहंशाह आलम : मेरा पूरा समय अभाव में गुज़रा है। होश संभाला तो देखा पिता हम पाँच भाई और तीन बहनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिता बिहार स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कंपनी के मुंगेर प्रतिष्ठान में मामूली ड्राइवर थे। जो...

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Literature Point LIVE में राजेंद्र राजन का कविता पाठ भाग 2

अनुपम निशान्त की चार कविताएं भावना सिन्हा की तीन कविताएं पल्लवी मिश्रा की दो कविताएं शहर काइयांपन सिखाता है दीप्ति शर्मा की पांच कविताएं

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अनुपमा शर्मा की कविता ‘अस्तित्व की जड़’

अदृश्य है ,है दृश्य भी, सजीव में है,निर्जीव में भी, ज्ञान में है, अश्रु में है, मुस्कान में है, आवाज़ में है, साज़ में भी, नृत्य की मुद्राओ में भी, अभिनय में भी, शिक्षा में भी, आत्मविश्वास में भी, विश्व की हर काबिलियत में भी, उसकी प्राथमिकता है केवल सम्मान,...

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मनोज चौहान की तीन कविताएं

ऐ कविता   दस्तक देना तुम कभी ऐ कविता दिनभर कमर तोड़ चुके ईंट-भठ्ठे के मजदूरों की उन बास छोड़ती झुग्गियों में बीड़ी के धुंएं और सस्ते देशी ठर्रे के घूंट पीकर जो चाहते हैं मिटा देना थकान और चिंताओं को व भीतर उपजती वेदना को भी और बुनते हैं सपनों...

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পামেলা চক্রবর্তীর কবিতা “একটি রূপকথার জন্ম!”

   সব শব্দের অর্থ থাকলে অর্থহীন শব্দেরা নিঃশব্দ হয়ে যায়।           “হাজার কথা”র ভীড়…                     নিঃশব্দ হলে মন্দ কি? তবে ,সেইদিন, এক ‘সাধারণ’ছেলে….                     যখন এক ‘অ’ মেয়ের...

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দেবারতী পাঠক চ্যাটার্জীর গল্প “এক বৈশাখে দেখা হল দুজনায়…”

এই সুন্দর স্বর্নালী সন্ধায়…. একটানা গানের আওয়াজ ভেসে আসছে পাশের বাড়ি থেকে।   মল্লিকা দি গান গাইছে। খুব সুন্দর গান গায় মল্লিকা দি। কি মিঠে গলা। রোজ ভোরে মল্লিকা দির রেওয়াজের সুরেই ঘুম ভাঙ্গে আমার। প্রথমে সা ধরে রেওয়াজ চলে বেশ কিছুক্ষন।  ভৈরব-ভৈরবীর সুরে আর ভোরের আধো অন্ধকারে চোখ খুলি...

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संगीता गांधी की लघुकथा ‘अज्ञात अंधेरे’

सरकारी हस्पताल के एक कोने में आमिर  बुत बना बैठा था ।अनजाना अँधेरा उसके चारों ओर छाया था । ये क्या हो गया ?उसने अपने ही हाथों से अपने दिल के टुकड़े को कैसे मार दिया ! अंदर डॉ उसके 12 साल के बेटे का इलाज कर रहे थे ।सर...

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लिटरेचर प्वाइंट LIVE में राजेंद्र राजन का कविता पाठ : भाग 1

अनुपम निशान्त की चार कविताएं भावना सिन्हा की तीन कविताएं पल्लवी मिश्रा की दो कविताएं शहर काइयांपन सिखाता है दीप्ति शर्मा की पांच कविताएं

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आरती आलोक वर्मा की दो कविताएं

मैं आज की नारी हूं ढूंढते रहे हर वक्त खामियां दर खामियां दोष मुझमें था या तुम्हारे नजरिए में नापसन्द थी तुम्हेें हर वो चीज, व्यक्ति या परिस्थितियाँ जो मुझे बेहद पसंद थी । मेरे किसी फैसले तक आने से पूर्व, सुना देते अपना निर्णय या फिर धमकियाँ तलाक की...