Category: AWARD

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मौजूदा साहित्यिक परिदृश्य में लोकोदय प्रकाशन का ऐतिहासिक हस्तक्षेप

अगर समाज में सबकुछ ठीक हो, सबकुछ अनुकूल हो तो लेखक कुछ नहीं लिख पाएगा क्योंकि साहित्य की प्रासंगिकता विरोध में ही होती है। यह मानना है वरिष्ठ और मशहूर आलोचक कर्ण सिंह चौहान का। लखनऊ के लोकोदय प्रकाशन की ओर से “समकालीन साहित्यिक परिदृश्य और घटती पाठकीयता” विषय पर...

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लोकोदय नवलेखन सम्मान के लिए पांडुलिपियां आमंत्रित

लोकधर्मी लेखन को बढ़ावा देने के लिए दिसम्बर 2015 में लोकोदय प्रकाशन की शुरूआत की गई थी। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया था कि युवा लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रकाशन की ओर से नवलेखन सम्मान प्रारम्भ किया जाएगा। लोकोदय नवलेखन सम्मान का उद्देश्य उन युवा लेखकों...