समकालीन कविता का महत्वपूर्ण दस्तावेज : दिल्ली की सेल्फी कविता विशेषांक

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव लड़ना था हमें भय, भूख और भ्रष्टाचार के खिलाफ हम हो रहे थे एकजुट आम आदमी के पक्ष में पर उनलोगों को नहीं था मंजूर यह। उन्होंने फेंके कुछ ऐंठे हुए शब्द हमारे आसपास और लड़ने लगे हम आपस में ही! वे मुस्कुरा रहे हैं दूर खड़े...