Category: पुस्तक अंश

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शिवदयाल के उपन्यास ‘एक और दुनिया होती’ का एक अंश

                       रात को ओढ़ने के लिए मेरे पास तो कुछ था नहीं। रात एक झोपड़ी के ओसारे में गुजारनी थी। पुआल का बिस्तर लगा और मुझे सहारा मिला बम्बइया से। उनके पास कंबल था। बीड़ी सुलगाने के पहले उन्होंने कंबल खोला और मुझ पर डाल दिया। कुछ इधर-उधर की बात...

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आशीष कुमार त्रिवेदी के उपन्यास ‘तुम्हारे लिए’ का एक अंश

नीचे की पुस्तकों को पढ़ने के लिए तस्वीर पर क्लिक करें उपन्यास अंश आशीष कुमार त्रिवेदी के उपन्यास ‘तुम्हारे लिए’ का एक अंश मदन से मिलने के बाद से जय और भी बेचैन हो गया था। मन में उथल पुथल मची थी। इतना सब कुछ होने के बाद भी क्या...

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सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव के आने वाले उपन्यास ‘ये इश्क बड़ा आसां’ एक अंश

उसने ध्यान से अहोना की ओर देखा। 50 फीसदी से ज्यादा बाल सफेद हो गए थे। कच्चे-पके बालों की मिलावट ने उसके व्यक्तित्व को और निखार दिया था। उम्र 55 के आसापास तो थी ही लेकिन चेहरे पर बुढ़ापे की दस्तक अभी नहीं पड़ी थी। गोरा चेहरा पहले की तरह...