Category: किताबें

0

कविता के नए प्रदेश की नए महत्व की कविताएँ

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम हिंदी कविता की नई ज़मीन जिस तेज़ी से बड़ी हो रही है, विकसित हो रही है, यह देखकर कविता के इतिहासकारों को प्रसन्नता ज़रूर होनी चाहिए, कविता के उन इतिहासकारों को, जो कविता-इतिहास-लेखन के समय ईमानदार बने रहते हैं। मेरे विचार से कविता की ऐतिहासिकता इसी बात...

0

हमारे समय के अँधेरे को रौशन करनेवाले शायर इब्राहीम ‘अश्क’ का ‘सरमाया’

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम इब्राहीम ‘अश्क’ की पहचान उन शायरों में है, जिनका गहरा ताल्लुक़ फ़िल्मी दुनिया से है। ‘कहो न प्यार है’, ‘कोई मिल गया’, ‘कृश’, ‘दस कहानियाँ’, ‘वेलकम’, ‘ब्लैक एण्ड व्हाइट’, ‘जाँनशीन’, ‘कोई मेरे दिल से पूछे’, ‘ये तेरा घर ये मेरा घर’ आदि कितनी ही फ़िल्में हैं, जो...

0

आदमी के युगपत से मुठभेड़ करातीं शंभु पी. सिंह की कहानियां

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम यह स्पष्ट है कि आदमी का वर्तमानकाल जितना जटिल है, उतना ही संदिग्ध भी है। आदमी का आज इन्हीं अटकलों में बीत जा रहा है कि कल का दिन नितान्त अभाव से भरा था लेकिन आज का दिन ज़रूर ख़ुशियों भरा गुज़रेगा। इसे आदमी की ऐतिहासिक परंपरा...

0

इस निपात समय को जवान बरगद का पेड़ सौंपते कवि की कविताएँ

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम सुल्तान अहमद समकालीन कविता के वैसे कवियों में शुमार किए जाते रहे हैं, जिनकी कविताएँ हमारे समय की अवनति को, ह्रास को, अध:पतन को को चिह्नित करके जवान, हरियल, उन्नति से भरे पत्ते फागुन और चैत माह को सौंपते रहे हैं। यानी जिस माह में सभी वृक्षों...

0

आदमी की दुनिया को विस्तार देतीं अनिरुद्ध सिन्हा की ग़ज़लें

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम समकालीन हिंदी साहित्य में ग़ज़ल का प्रभाव बढ़ा है, क़द बढ़ा है, स्वीकृति का दायरा बढ़ा है। ग़ज़ल के लिए इस सर्वव्यापकता के पीछे जिन महत्वपूर्ण ग़ज़लकारों का सद्प्रयास रहा है, उनमें समकालीन ग़ज़ल के चर्चित शायर अनिरुद्ध सिन्हा की भूमिका जानी बूझी हुई है। इसलिए कि...

0

तलवार की धार पर खरबूजे की तरह रखी दुनिया में आप कैसे सो सकते हैं

अरविंद श्रीवास्तव ’तुम्हें सोने नहीं देगी’ सरला माहेश्वरी की दूसरी काव्य-कृति है।  संग्रह की तमाम कविताएं साम्राज्यवादी सामंती सोच को बेनकाब करती है। ये कविताएं जहाँ आदमी में धंस रही जड़ता, अकर्मण्यता एवं लिज़लिजेपन को झकझोरती हैं वहीं सत्ता को और अधिक मानवीय बनाने की बात करती है। नई सदी...

0

‘सड़क पर ज़िंदगी’: मनुष्य-जीवन के संघर्ष-काल को कमाल का शब्द देती कविताएं

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम यह सच है कि आदमी के जीवन का संघर्ष रहस्यों से भरा रहता है। ये संघर्ष-रहस्य आदमी के जीवन में चुपचाप चले नहीं आए हैं। मेरे ख़्याल से पूरी चालाकी से दुनिया भर के पूँजीवादियों ने और दुनिया भर की अमीर, क्रूर, दंभी सरकारों ने आदमी के...

0

स्मृतियां और शुभेच्छाएं नहीं मानतीं ‘सरहदें’

 पुस्तक समीक्षा ऋषभदेव शर्मा सुबोध श्रीवास्तव  कविता, गीत, गज़ल, दोहे, मुक्तक, कहानी, व्यंग्य, निबंध, रिपोर्ताज और बाल साहित्य जैसी विविध साहित्यिक विधाओं में दखल रखने वाले बहुआयामी प्रतिभा के धनी कलमकार है। पत्रकारीय लेखन के अतिरिक्त वे अपने काव्य संग्रह ‘पीढ़ी का दर्द’, लघुकथा संग्रह ‘ईर्ष्या’, बालकथा संग्रह ‘शेरनी माँ’...

2

वर्तमान को राह दिखाती कविताएं

पुस्तक समीक्षा सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव  ‘कट रहे वन-उपवन बना जीवन विजन। सुख-शांति के आगार बने कारागार साकार बने निर्जन’’ शहर की लपलपाती जीभ अपनी सीमा का अतिक्रमण कर खेत-खलिहान-जंगलों को लगातार निगल रही है। वो हर कुछ खा जाना चाहती है। वो खेत-खलिहानों को मॉल में बदल देना चाहती है।...

0

‘रेजाणी पानी’ : इस पूरे समय की अंतर्व्याधि प्रकट करती कविताएँ

पुस्तक समीक्षा शहंशाह आलम समकालीन हिंदी कविता की स्वरलहरियाँ ऐसी हैं, जैसे हम पेड़ों के हरे पत्तों से जगमग किसी प्रदेश से गुज़रते हुए उन पेड़ों का जो संगीत कानों को सुनाई दे और मंत्रमुग्ध हम उसी पेड़ों के अनुभवों से भरे प्रदेश का होकर रह जाने के एहसास से...

1

मुझमें कुछ है जो आईना-सा है : परदे में छिपी आवाज़ को बाहर लातीं ग़ज़लें

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम भारतीय हिंदी ग़ज़लकारों में ध्रुव गुप्त बहुत ही इज़्ज़त और मुहब्बत से लिया जानेवाला नाम है। इसका मुख्य कारण ध्रुव गुप्त की ग़ज़लें हैं, जो पाठ के समय कुछ ऐसा अद्भुत समा बाँधती हैं, जैसे किसी बहती हुई नदी को आप बारिश के वक़्त देखते हैं। बारिश...

1

इस संसार को देखने की समझ देती कविताएँ

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम हर कवि अपने समय को गहराई में जाकर सुनता है, तब अपने सुने हुए समय को एकदम विलक्षण प्रकट करता है। सच्चाई यही है, कवि के समय में जो कुछ घटित हुआ होता है, हर कवि उसी घटे हुए के प्रभाव में होता हुआ ख़ुद को रचनारत...

0

निराला की कविता का विस्तार -‘‘राजा की दुनिया’’

अमीरचंद वैश्य बुद्धिलाल पाल पुलिस विभाग में उच्चपद पर सेवारत है। ऐसी अवस्था में व्यवस्था की आलोचना करते समय उन्हें सघन अन्तद्र्वन्द्व का तनाव झेलना पड़ता होगा। फिर भी उन्होंने साहस किया है। ‘राजा की दुनिया’ से साक्षात्कार करवाके वर्तमान क्रूर व्यवस्था की सटीक आलोचना की है। मुक्तिबोध के बहुप्रयुक्त...

0

एक अच्छी दुनिया का मतलब समझाती कविताएं

शहंशाह आलम कविता का मतलब प्रार्थना के शब्द नहीं होते। मेरा मानना है कि कोई कवि जैसे ही अपनी कविता को प्रार्थना का माध्यम बना लेता है, कविता की मृत्यु उसी क्षण हो जाती है। इसलिए कि कविता-लेखन का अर्थ यह तो क़तई नहीं है कि कवि अपने आस-पास की...

0

जीवन से छूट रहे जीवन को बचाने का उपक्रम

शहंशाह आलम कुँवर रवीन्द्र जिस दुस्साहस से सजग, विनम्र, पानीदार होकर कवितारत रहते आए हैं, मुझे इनका इस तरह कवितारत रहना अचंभित करता है, जैसे इनकी रंगों से दोस्ती मुझे विस्मित करती रही है। अब इनकी अस्सी से अधिक कविताओं का संग्रह ‘रंग जो छूट गया था’ जिस उम्दा तरीक़े...

0

मनुष्य और लोकजीवन के कभी न अंत होने की कविताएँ

शहंशाह आलम   मेरा मानना है कि कविता की आँखें होती हैं, तभी तो जिस तरह कवि की पुतली अपने समय को देखने के लिए हर तरफ़ घूमती-घामती है, वैसे ही कविता की भी पुतली चहुँओर घूमती रहती है। कवि और कविता के लिए यह ज़रूरी भी है कि दोनों...

7

हमारे समय की पटकथा

राजकिशोर राजन   हम ऐसे समय में जी रहे हैं जब साहित्य भी बाजारवाद के ढाँचे में समाहित हो रहा है। प्रतिरोध के स्वर नेपथ्य में जा रहे हैं। वैसे में एक कविता ही है जो सबसे ज्यादा बेचैन है, चूँकि उसका सपना संसार को सुन्दर, कलात्मक, भय-भूख और शोषण...

0

रूपेश कश्यप की सच्ची कविताएं

राकेश कायस्थ   कुछ कविताएं अच्छी होती हैं। कुछ कविताएं कच्ची होती हैं लेकिन ज्यादातर कविताएं सच्ची होती हैं। ऐसी ही एक सच्ची कविता से पिछले दिनों मुलाकात हो गई- नन्ही-सी उम्र से ही हमारा नन्ही चवन्नियों से याराना था वो भी क्या खूब ज़माना था कि हर बाजी पर...