पीड़ा और प्रेम की अजस्र धारा वाली ‘एक नदी जामुनी सी’

पुस्तक समीक्षा सुशील कुमार मालिनी गौतम अंग्रेजी साहित्य की प्राध्यापिका होते हुए हिंदी में लिखती हैं जो हिंदी के लिए

अभी खरीदें ‘रोटियों के हादसे’

लिटरेचर प्वाइंट द्वारा प्रकाशित सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव का कविता संग्रह अमेजन पर उपलब्ध है। खरीदने के लिए नीचे के लिंक

हमारे समय के अँधेरे को रौशन करनेवाले शायर इब्राहीम ‘अश्क’ का ‘सरमाया’

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम इब्राहीम ‘अश्क’ की पहचान उन शायरों में है, जिनका गहरा ताल्लुक़ फ़िल्मी दुनिया से है। ‘कहो न

आदमी के युगपत से मुठभेड़ करातीं शंभु पी. सिंह की कहानियां

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम यह स्पष्ट है कि आदमी का वर्तमानकाल जितना जटिल है, उतना ही संदिग्ध भी है। आदमी का

इस निपात समय को जवान बरगद का पेड़ सौंपते कवि की कविताएँ

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम सुल्तान अहमद समकालीन कविता के वैसे कवियों में शुमार किए जाते रहे हैं, जिनकी कविताएँ हमारे समय

आदमी की दुनिया को विस्तार देतीं अनिरुद्ध सिन्हा की ग़ज़लें

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम समकालीन हिंदी साहित्य में ग़ज़ल का प्रभाव बढ़ा है, क़द बढ़ा है, स्वीकृति का दायरा बढ़ा है।

तलवार की धार पर खरबूजे की तरह रखी दुनिया में आप कैसे सो सकते हैं

अरविंद श्रीवास्तव ’तुम्हें सोने नहीं देगी’ सरला माहेश्वरी की दूसरी काव्य-कृति है।  संग्रह की तमाम कविताएं साम्राज्यवादी सामंती सोच को

‘सड़क पर ज़िंदगी’: मनुष्य-जीवन के संघर्ष-काल को कमाल का शब्द देती कविताएं

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम यह सच है कि आदमी के जीवन का संघर्ष रहस्यों से भरा रहता है। ये संघर्ष-रहस्य आदमी

स्मृतियां और शुभेच्छाएं नहीं मानतीं ‘सरहदें’

 पुस्तक समीक्षा ऋषभदेव शर्मा सुबोध श्रीवास्तव  कविता, गीत, गज़ल, दोहे, मुक्तक, कहानी, व्यंग्य, निबंध, रिपोर्ताज और बाल साहित्य जैसी विविध

वर्तमान को राह दिखाती कविताएं

पुस्तक समीक्षा सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव  ‘कट रहे वन-उपवन बना जीवन विजन। सुख-शांति के आगार बने कारागार साकार बने निर्जन’’ शहर

‘रेजाणी पानी’ : इस पूरे समय की अंतर्व्याधि प्रकट करती कविताएँ

पुस्तक समीक्षा शहंशाह आलम समकालीन हिंदी कविता की स्वरलहरियाँ ऐसी हैं, जैसे हम पेड़ों के हरे पत्तों से जगमग किसी

मुझमें कुछ है जो आईना-सा है : परदे में छिपी आवाज़ को बाहर लातीं ग़ज़लें

पुस्तक-समीक्षा शहंशाह आलम भारतीय हिंदी ग़ज़लकारों में ध्रुव गुप्त बहुत ही इज़्ज़त और मुहब्बत से लिया जानेवाला नाम है। इसका

निराला की कविता का विस्तार -‘‘राजा की दुनिया’’

अमीरचंद वैश्य बुद्धिलाल पाल पुलिस विभाग में उच्चपद पर सेवारत है। ऐसी अवस्था में व्यवस्था की आलोचना करते समय उन्हें