Category: किताबें

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एक अच्छी दुनिया का मतलब समझाती कविताएं

शहंशाह आलम कविता का मतलब प्रार्थना के शब्द नहीं होते। मेरा मानना है कि कोई कवि जैसे ही अपनी कविता को प्रार्थना का माध्यम बना लेता है, कविता की मृत्यु उसी क्षण हो जाती है। इसलिए कि कविता-लेखन का अर्थ यह तो क़तई नहीं है कि कवि अपने आस-पास की...

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जीवन से छूट रहे जीवन को बचाने का उपक्रम

शहंशाह आलम कुँवर रवीन्द्र जिस दुस्साहस से सजग, विनम्र, पानीदार होकर कवितारत रहते आए हैं, मुझे इनका इस तरह कवितारत रहना अचंभित करता है, जैसे इनकी रंगों से दोस्ती मुझे विस्मित करती रही है। अब इनकी अस्सी से अधिक कविताओं का संग्रह ‘रंग जो छूट गया था’ जिस उम्दा तरीक़े...

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मनुष्य और लोकजीवन के कभी न अंत होने की कविताएँ

शहंशाह आलम   मेरा मानना है कि कविता की आँखें होती हैं, तभी तो जिस तरह कवि की पुतली अपने समय को देखने के लिए हर तरफ़ घूमती-घामती है, वैसे ही कविता की भी पुतली चहुँओर घूमती रहती है। कवि और कविता के लिए यह ज़रूरी भी है कि दोनों...

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हमारे समय की पटकथा

राजकिशोर राजन   हम ऐसे समय में जी रहे हैं जब साहित्य भी बाजारवाद के ढाँचे में समाहित हो रहा है। प्रतिरोध के स्वर नेपथ्य में जा रहे हैं। वैसे में एक कविता ही है जो सबसे ज्यादा बेचैन है, चूँकि उसका सपना संसार को सुन्दर, कलात्मक, भय-भूख और शोषण...

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रूपेश कश्यप की सच्ची कविताएं

राकेश कायस्थ   कुछ कविताएं अच्छी होती हैं। कुछ कविताएं कच्ची होती हैं लेकिन ज्यादातर कविताएं सच्ची होती हैं। ऐसी ही एक सच्ची कविता से पिछले दिनों मुलाकात हो गई- नन्ही-सी उम्र से ही हमारा नन्ही चवन्नियों से याराना था वो भी क्या खूब ज़माना था कि हर बाजी पर...