Category: HINDI

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दुष्प्रचारों से नहीं दब सकता गांधी का सत्य

पुस्तक समीक्षा सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव गांधी के देश में गोडसे की पूजा होने लगे, तो खुद से यह सवाल पूछना ही चाहिए कि गांधी की विरासत को संभालने में हमसे कहां चूक हो गई? गांधी को जितना समझा है, उससे मैं यह अनुमान लगा सकता हूं कि अगर आज वो...

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आलोक कुमार मिश्रा की कविताएं

बिछोह नदी और बुआ दोनों थीं एक जैसी सावन में ही हमारे गाँव आतीं थीं मंडराती थीं बलखाती थीं बह-बह जाती थीं गाँव घर खेत खलिहान सिवान दलान में  बुआ झूलती थी झूलाऔर गाती थी आशीषों भरे गीतनदी भरती थी मिट्टी में प्राणजैसे निभा रही हो रस्म मना रही हो रीतदोनों लौट जाती थीं जब जाते थे...

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पीयूष कुमार द्विवेदी के 10 दोहे

भीषण सूखा है कहीं, और कहीं सैलाब । हमने जो दोहन किया, देती प्रकृति जवाब ।।१।। नीम कटी जो द्वार की, तरसे मेरे कान । सुनने को मिलता नहीं, मधुर कोकिला गान ।।२।। धरती छाती चीरकर, लेते जल हम खींच । लेकिन लौटते नहीं, कितनी हरकत नीच ।।३।। गंगा बस...

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अमरीक सिंह दीप की कहानी ‘प्रकृति’

वह इतनी सुन्दर है जितनी सुन्दर यह धरती। धरती पर खड़े पहाड़ । पहाड़ पर खड़े देवदार, चीड़ , चिनार , सागवान , बुरुंश के वृक्ष। पहाड़ों से गिरने वाले झरने। झरनों के समूह गान से बनी नदियां। नदियां , जो मैदानों में आकर बाग-बगीचों और खेतों को सींचतीं हैं...

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मधु कांकरिया की कहानी ‘जलकुम्भी’

प्रणीता की कहानी मैं लिखना नहीं चाहती थी क्योंकि उसे सम्पूर्णता में पकड़ पाना, अनंत उदासी के उसके घेरे को बेध पाना मेरे बस की बात नहीं थी. फिर भी उसकी कहानी मैं लिख रही हूँ तो महज इस कारण कि कौन जाने किन सहृदय पाठकों के हाथों में पड़कर यह...

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बाज़ारवाद के घातक हमलों की कहानियां

चर्चित किताब कहानी संग्रह : आईएसओ 9000 लेखक  : जयनंदन मूल्य  : 380 रुपए (हार्ड कवर) प्रकाशक  : नेशनल पेपरबैक्स, दिल्ली सत्येंन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव जयनंदन संघर्षशील लोगों के कथाकार हैं। जयनन्दन मज़दूरों के बीच रहे हैं। उनकी ज़िन्दगी जी है। खुद भी मजदूर रहे हैं। इसलिए उनके दर्द को उनसे...

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विजय शंकर विकुज की कहानी ‘संक्रमण’

विजय शंकर विकुज जन्म 12 सितंबर 1957, आसनसोल शिक्षा – स्नातक प्रकाशन – वागर्थ, वर्तमान साहित्य,  कतार,  संवेद,  निष्कर्ष,  मधुमती,  कथाबिम्ब,  प्रेरणा,  जनसत्ता, छपते छपते, उत्तर प्रदेश, भाषा, युद्धरत आम आदमी,  वैचारिकी,  स्वाधीनता,  सृजनपथ, समय के साखी इत्यादि पत्रिकाओं में कहानियां प्रकाशित। कहानी के अलावा आलेख, संस्मरण, रिपोतार्ज, साक्षात्कार तथा अन्य कई विधाओं में लेखन। बहुत – सी रचनाओं...

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संजीव ठाकुर की बाल कविताएं

संजीव ठाकुर ताल      पंखा चलता हन-हन–हन हवा निकलती सन-सन–सन । टिक-टिक टिक–टिक चले घड़ी ठक-ठक –ठक–ठक करे छड़ी । बूंदें गिरतीं टिप–टिप–टिप आँधी आती हिप–हिप–हिप । फू–फू–फू फुफकारे नाग धू–धू-धू जल जाए आग । कोयल बोले कुहू-कुहू पपीहा बोले पिऊ-पिऊ । धिनक-धिनक–धिन बाजे ताल लहर–लहर लहराए बाल ।...

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संजय शांडिल्य की प्रेम कविताएँ

संजय शांडिल्य जन्म : 15 अगस्त, 1970 |स्थान : जढ़ुआ बाजार, हाजीपुर |                     शिक्षा : स्नातकोत्तर (प्राणीशास्त्र) | वृत्ति : अध्यापन | रंगकर्म से गहरा जुड़ाव | बचपन और किशोरावस्था में कई नाटकों में अभिनय | प्रकाशन : कविताएँ हिंदी की...

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कैलाश सत्यार्थी की कविता ‘तब हम होली खेलेंगे’

कैलाश सत्यार्थी कवि नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित मशहूर बाल अधिकार कार्यकर्ता हैं हर साल होली पर उगते थे इंद्रधनुष दिल खोल कर लुटाते थे रंग मैं उन्हीं रंगों से सराबोर होकर तरबतर कर डालता था तुम्हें भी तब हम एक हो जाते थे अपनी बाहरी और भीतरी पहचानें भूल...

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शनि को परास्त करने वाले नायक की कहानी

उपन्यास : प्यार पर टेढ़ी नज़र : शनि लेखक : पंकज कौरव प्रकाशक : वाणी प्रकाशन मूल्य : 199 रुपए सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ज़िन्दगी में कामयाबी के लिए क्या चाहिए? मेहनत, किस्मत या दोनों? हर आदमी की ज़िन्दगी में कभी-कभी ऐसा पड़ाव आता है, जब वह खुद से यह सवाल...

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निर्मल गुप्त की कविता ‘सदाकत का शिनाख्ती कार्ड’

निर्मल गुप्त सदाकत देखते ही देखते चौरसी* से कुरेद लेता सख्त से सख्त काठ पर खूबसूरत बेल बूटे , नाचता हुआ मोर छायादार पेड़ ,फुदकती गिलहरी , उड़ती तितली खिला हुआ फूल , खपरेल वाला सुंदर मकान मटकी लिए जाती पतली कमर वाली षोडशी. उसे मिला हुआ था सरकार बहादुर से माकूल...

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विवेक आसरी की 6 कविताएं

विवेक आसरी विवेक आसरी कर्म से पत्रकार. मन से यायावर. और वचन से लेखक. वह 15 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं. भारत, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के मीडिया संस्थानों में ऑनलाइन, रेडियो और टीवी पत्रकारिता कर चुके हैं. फिलहाल ऑस्ट्रेलिया के एसबीएस रेडियो की हिंदी सेवा के लिए बतौर प्रोड्यूसर काम कर...

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स्वाति शर्मा की 4 कविताएं

स्वाति शर्मा बातें कुछ ऐसी बातें होती हैं कुछ यूं ही यादें होती हैं कुछ डूब उतर के जाती हैं कुछ देख़ती ही रह जाती हैं कुछ ख़ुद ही खुद में खोती हैं कुछ ऐसी बातें होती हैं सांसों में चलती रहती हैं कुछ चुप हैं तो कुछ कहती हैं कुछ दम ही में अटक गईं और ख़्याल की स्याही टपक गई जो जी-जी कर जोती हैं कुछ ऐसी बातें होती हैं अनकही तो ख़ालिस ख़ुशबू है कह दी तो बिखरा जादू है कुछ आस में पलती रहती हैं कुछ आह में जलती रहती हैं कुछ बीज नए भी बोती हैं कुछ ऐसी बातें होती हैं बातें कुछ कह दी जाती हैं काफ़ी पर रह ही जाती हैं जब रातों से डर लगता है और रातें साथी होती हैं दिन भर तब ख़ुद से होती हैं कुछ ऐसी बातें होती हैं अधूरे चाँद सा आज दिल है कुछ अधूरे नग़मे सुनने का अधूरी बातें अधूरे सपने अधूरी यादें बुनने का कुछ कहो जो...

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बढ़ती अमानुिषकता पर केंद्रित ‘कथन’ का नया अंक

‘कथन’ का अंक 83-84 ‘बढ़ती अमानुषिकता से जूझती दुनिया’ विषय पर केंद्रित है। वर्तमान दौर में हिंसा, अमानुषीकरण, युद्धोन्माद जैसे जिन सवालों से हमारे देश में ही नहीं, दुनिया भर में लोग जूझ रहे हैं, उन सवालों पर महत्त्वपूर्ण सामग्री इस अंक में है। अंक में दिवंगत कवि मलखान सिंह...

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सुधीर सक्सेना को जनकवि केदारनाथ अग्रवाल सम्मान

Previous Next वरिष्ठ कवि सुधीर सक्सेना को 2018 के जनकवि केदारनाथ अग्रवाल सम्मान से नवाजा गया। मुक्तिचक्र और जनवादी लेखक मंच यह सम्मान प्रदान करता है। बाँदा और कालिंजर में 22 और 23 दिसम्बर को दो दिवसीय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। डीसीडीएफ स्थित कवि केदारनाथ अग्रवाल सभागार...

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राहुल कुमार बोयाल की 3 कविताएं

राहुल कुमार बोयाल जन्म दिनांक- 23.06.1985जन्म स्थान- जयपहाड़ी, जिला-झुन्झुनूं( राजस्थान)सम्प्रति- राजस्व विभाग में कार्मिकपुस्तक- समय की नदी पर पुल नहीं होता (कविता संग्रह)            नष्ट नहीं होगा प्रेम ( कविता संग्रह)  विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं यथा वागर्थ, सृजन सरोकार, किस्सा कोताह, कथा, दोआबा, हिन्दी जनचेतना, हस्ताक्षर वेब पत्रिका...

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पवन कुमार मौर्य की 3 कविताएं

पवन कुमार मौर्य जन्मतिथि- 01 जून, 1993 शिक्षा– स्नातक- भूगोल (ऑनर्स) (बीएचयू, बनारस) एमए जनसंचार-एमसीयू, भोपाल. पेशा- दिल्ली में पत्रकारिता पता – वर्तमान – नोएडा स्थाई पता- जन्म- बनारस, अब जिला- चन्दौली गांव- मानिकपुर, पोस्ट- नौबतपुर, थाना-सैयदराजा पिन- 232110 सम्पर्क सूत्र- 9667927643 जंगली संगीत का एक टुकड़ाजब मैं स्वयं, दिमाग...

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केशव शरण की 4 ग़ज़लें

केशव शरण जन्म–23-08-1960 प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)क़दम-क़दम ( चुनी हुई कविताएं ) न संगीत न फूल ( कविता संग्रह)गगन नीला धरा धानी नहीं है ( ग़ज़ल...