Category: HINDI

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शिवानी शर्मा की 5 लघुकथाएं

अपनी अपनी बारी सरकारी अस्पताल में एक डॉक्टर के कमरे के बाहर पंक्तिबद्ध लोग अपनी-अपनी बारी की प्रतीक्षा में थे। वहीं कतार में एक बुजुर्ग महिला भी थीं जो प्रतीक्षा के पलों में अपने झोले में से कभी बिस्किट तो कभी चूरन की गोली और कभी सौंफ जैसी कोई चीज़...

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नज़्म सुभाष की 3 लघुकथाएं

सौदा दिन पर दिन रोजी रोटी का जुगाड़ मुश्किल होता जा रहा है। मार्केट जैसे कोई आता ही नहीं ….ऐसे कैसे चलेगा गुजारा ?….कमाई कुछ भी नहीं और खर्चा … सुरसा की तरह हमेशा मुंह बाये रहता…करीब हफ्ते भर से बिटिया रोज कहती है -“पापा मेरा बस्ता फट गया है”...

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प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथा ‘कर्ज़’

वह बहुत चिंतित था. ‘लाकडाउन की वजह से काम से बैठे हुए चार महीने से ऊपर हो गए. फैक्ट्री चालू हो तब तो कोई काम हो और पैसा आए. हमारी हालत तो ऐसी है. न सड़क पर बंट रहे खाने पीने की सामग्री ले सकते हैं और न ही फ्री...

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आलोक कौशिक की लघुकथा ‘नालायक बेटा’

रामानंद बाबू को अस्पताल में भर्ती हुए आज दो महीने हो गये। वे कर्क रोग से ग्रसित हैं। उनकी सेवा-सुश्रुषा करने के लिए उनका सबसे छोटा बेटा बंसी भी उनके साथ अस्पताल में ही रहता है। बंसी की मां को गुजरे हुए क़रीब पांच वर्ष हो चुके हैं। अपनी मां...

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गोपाल मोहन मिश्र की एक ग़ज़ल

गोपाल मोहन मिश्र लहेरिया सराय, दरभंगा 9631674694   हराया है तूफ़ानों को, मगर अब ये क्या तमाशा है, हवा करती है जब हलचल, बदन ये कांप जाता है। है सूरज रौशनी देता, सभी ये जानते तो हैं, है आग दिल में बसी कितनी, न कोई भाँप पाता है। है ताकत प्रेम...

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दिलीप कुमार की लघु कथा ‘चांडाल चौकड़ी’

दिलीप कुमार पहली वो वो स्त्रियों के सौन्दर्य का सामान, कट-पीस का ब्लाउज, पेटीकोट आदि बेचा करती थी मगर रोड पर दुकान न होने के कारण उसका माल बिक नहीं पाता था वैसे वो बहुत सी महिलाओं के घर जाकर भी कुछ न कुछ बेचने का प्रयास किया करती थी।...

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आलोक कौशिक की लघुकथा ‘डॉग लवर’

आलोक कौशिक शिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य)पेशा- पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखनसाहित्यिक कृतियां- प्रमुख राष्ट्रीय समाचारपत्रों एवं साहित्यिक पत्रिकाओं में दर्जनों रचनाएं प्रकाशितपता:- मनीषा मैन्शन, जिला- बेगूसराय, बिहार, 851101,Email  devraajkaushik1989@gmail.com    ओमप्रकाश भारतीय उर्फ पलटू जी शहर के सबसे बड़े उद्योगपति होने के साथ ही फेमस डॉग लवर अर्थात् प्रसिद्ध कुत्ता प्रेमी भी...

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बाज़ारवाद के घातक हमलों की कहानियां

चर्चित किताब कहानी संग्रह : आईएसओ 9000 लेखक  : जयनंदन मूल्य  : 380 रुपए (हार्ड कवर) प्रकाशक  : नेशनल पेपरबैक्स, दिल्ली सत्येंन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव जयनंदन संघर्षशील लोगों के कथाकार हैं। जयनन्दन मज़दूरों के बीच रहे हैं। उनकी ज़िन्दगी जी है। खुद भी मजदूर रहे हैं। इसलिए उनके दर्द को उनसे...

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विजय शंकर विकुज की कहानी ‘संक्रमण’

विजय शंकर विकुज जन्म 12 सितंबर 1957, आसनसोल शिक्षा – स्नातक प्रकाशन – वागर्थ, वर्तमान साहित्य,  कतार,  संवेद,  निष्कर्ष,  मधुमती,  कथाबिम्ब,  प्रेरणा,  जनसत्ता, छपते छपते, उत्तर प्रदेश, भाषा, युद्धरत आम आदमी,  वैचारिकी,  स्वाधीनता,  सृजनपथ, समय के साखी इत्यादि पत्रिकाओं में कहानियां प्रकाशित। कहानी के अलावा आलेख, संस्मरण, रिपोतार्ज, साक्षात्कार तथा अन्य कई विधाओं में लेखन। बहुत – सी रचनाओं...

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संजीव ठाकुर की बाल कविताएं

संजीव ठाकुर ताल      पंखा चलता हन-हन–हन हवा निकलती सन-सन–सन । टिक-टिक टिक–टिक चले घड़ी ठक-ठक –ठक–ठक करे छड़ी । बूंदें गिरतीं टिप–टिप–टिप आँधी आती हिप–हिप–हिप । फू–फू–फू फुफकारे नाग धू–धू-धू जल जाए आग । कोयल बोले कुहू-कुहू पपीहा बोले पिऊ-पिऊ । धिनक-धिनक–धिन बाजे ताल लहर–लहर लहराए बाल ।...

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मज़दूरों की पीड़ा को आवाज़ देने वाला उपन्यास ‘धर्मपुर लॉज’

चर्चित किताब उपन्यास : धर्मपुर लॉज लेखिका : प्रज्ञा प्रकाशक :  लोकभारती प्रकाशन मूल्य : 200 रुपए सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव मज़दूरों की अंधेरी गंदी बस्ती में अब कोई कुछ नहीं बोलता एक अजीब सन्नाटे ने कफन की तरह ढांप लिया है पूरी बस्ती को जहां हर चीज भयावह लगती है।...

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संजय शांडिल्य की प्रेम कविताएँ

संजय शांडिल्य जन्म : 15 अगस्त, 1970 |स्थान : जढ़ुआ बाजार, हाजीपुर |                     शिक्षा : स्नातकोत्तर (प्राणीशास्त्र) | वृत्ति : अध्यापन | रंगकर्म से गहरा जुड़ाव | बचपन और किशोरावस्था में कई नाटकों में अभिनय | प्रकाशन : कविताएँ हिंदी की...

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कैलाश सत्यार्थी की कविता ‘तब हम होली खेलेंगे’

कैलाश सत्यार्थी कवि नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित मशहूर बाल अधिकार कार्यकर्ता हैं हर साल होली पर उगते थे इंद्रधनुष दिल खोल कर लुटाते थे रंग मैं उन्हीं रंगों से सराबोर होकर तरबतर कर डालता था तुम्हें भी तब हम एक हो जाते थे अपनी बाहरी और भीतरी पहचानें भूल...

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विजय सिंह को जनकवि केदारनाथ अग्रवाल सम्मान 2020

केन के कवि केदारनाथ अग्रवाल की पुण्यतिथि 22 जून 2020 को जनवादी लेखक मंच एवं मुक्तिचक्र पत्रिका के तत्वाधान में छत्तीसगढ़ जगदलपुर के रहवासी जाने माने रंगकर्मी एवं कवि विजय सिंह को वर्ष 2020 का जनकवि केदारनाथ अग्रवाल सम्मान दिया जायेगा यह निर्णय “मुक्तिचक्र केदार सम्मान कमेटी बाँदा” ने लिया...

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निर्मल गुप्त की कविता ‘सदाकत का शिनाख्ती कार्ड’

निर्मल गुप्त सदाकत देखते ही देखते चौरसी* से कुरेद लेता सख्त से सख्त काठ पर खूबसूरत बेल बूटे , नाचता हुआ मोर छायादार पेड़ ,फुदकती गिलहरी , उड़ती तितली खिला हुआ फूल , खपरेल वाला सुंदर मकान मटकी लिए जाती पतली कमर वाली षोडशी. उसे मिला हुआ था सरकार बहादुर से माकूल...

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विवेक आसरी की 6 कविताएं

विवेक आसरी विवेक आसरी कर्म से पत्रकार. मन से यायावर. और वचन से लेखक. वह 15 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं. भारत, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के मीडिया संस्थानों में ऑनलाइन, रेडियो और टीवी पत्रकारिता कर चुके हैं. फिलहाल ऑस्ट्रेलिया के एसबीएस रेडियो की हिंदी सेवा के लिए बतौर प्रोड्यूसर काम कर...

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स्वाति शर्मा की 4 कविताएं

स्वाति शर्मा बातें कुछ ऐसी बातें होती हैं कुछ यूं ही यादें होती हैं कुछ डूब उतर के जाती हैं कुछ देख़ती ही रह जाती हैं कुछ ख़ुद ही खुद में खोती हैं कुछ ऐसी बातें होती हैं सांसों में चलती रहती हैं कुछ चुप हैं तो कुछ कहती हैं कुछ दम ही में अटक गईं और ख़्याल की स्याही टपक गई जो जी-जी कर जोती हैं कुछ ऐसी बातें होती हैं अनकही तो ख़ालिस ख़ुशबू है कह दी तो बिखरा जादू है कुछ आस में पलती रहती हैं कुछ आह में जलती रहती हैं कुछ बीज नए भी बोती हैं कुछ ऐसी बातें होती हैं बातें कुछ कह दी जाती हैं काफ़ी पर रह ही जाती हैं जब रातों से डर लगता है और रातें साथी होती हैं दिन भर तब ख़ुद से होती हैं कुछ ऐसी बातें होती हैं अधूरे चाँद सा आज दिल है कुछ अधूरे नग़मे सुनने का अधूरी बातें अधूरे सपने अधूरी यादें बुनने का कुछ कहो जो...

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परिकथा का नववर्ष अंक

परिकथा का जनवरी-फरवरी 2020 अंक नववर्ष अंक है। इस अंक में अच्छी कहानी की अवधारणा और पहचान पर बहुत ही सार्थक परिचर्चा की गई है। कथाकार हरियश राय द्वारा संयोजित इस परिचर्चा में डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी, डॉ खगेंद्र ठाकुर, मधुरेश, राजेंद्र कुमार, विजय राय, जानकी प्रसाद शर्मा, तरसेम गुजराल, कर्मेंदु...

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बढ़ती अमानुिषकता पर केंद्रित ‘कथन’ का नया अंक

‘कथन’ का अंक 83-84 ‘बढ़ती अमानुषिकता से जूझती दुनिया’ विषय पर केंद्रित है। वर्तमान दौर में हिंसा, अमानुषीकरण, युद्धोन्माद जैसे जिन सवालों से हमारे देश में ही नहीं, दुनिया भर में लोग जूझ रहे हैं, उन सवालों पर महत्त्वपूर्ण सामग्री इस अंक में है। अंक में दिवंगत कवि मलखान सिंह...

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सुधीर सक्सेना को जनकवि केदारनाथ अग्रवाल सम्मान

Previous Next वरिष्ठ कवि सुधीर सक्सेना को 2018 के जनकवि केदारनाथ अग्रवाल सम्मान से नवाजा गया। मुक्तिचक्र और जनवादी लेखक मंच यह सम्मान प्रदान करता है। बाँदा और कालिंजर में 22 और 23 दिसम्बर को दो दिवसीय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। डीसीडीएफ स्थित कवि केदारनाथ अग्रवाल सभागार...