Category: HINDI

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दिलीप कुमार की पांच लघुकथाएं

  दिलीप कुमार बलरामपुर जन्मभूमि मुंबई कर्मभूमि रचनाएं विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित संपर्क –9454819660 धूप की छांह पुरानी दिल्ली, सीलमपुर की मंडी। लोग बाग खचाखच, तर-ब-तर, रेलमपेल। सहाफी शीबा ने मुझे मछली मंडी की राह दिखायी। चिलचिलाती धूप, सकीनन अप्रैल, की थी मगर मौसम की बेदर्दी साफ नुमाया थी।...

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मीनू परियानी की लघुकथा ‘कन्यापूजन’

  मीनू परियानी कल ही बड़ी बहू को चेक अप के लिए हॉस्पिटल ले गये थे , डॉक्टर ने बड़ी मुश्किल  से हाँ की थी, लिंग परीक्षण कानूनन अपराध जो था आजकल . एक पोती पहले से ही थी इसलिए सेठ जी इस बार पोता ही चाहते थे. रिपोर्ट और डॉक्टर...

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मो. शफ़ीक़ अशरफ की लघुकथा ‘सुबह के पटाखे’

  मो0 शफ़ीक़ अशरफ मोहिउद्दीनपुर, समस्तीपुर (बिहार) टीवी पर संदेश आ रहा था, दिवाली पर पटाखे कम जलाएँ वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और साथ ही ध्वनि-प्रदूषण भी, पटाखों की तेज़ आवाज़ से बच्चे-बूढ़े, पशु-पक्षी सब परेशान हो रहे हैं, ऑफिस जाने का समय हो रहा था जल्दी से तैयार...

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सेवा सदन प्रसाद की तीन लघुकथाएं

  सेवा सदन प्रसाद एक हिंदी लेखक मोबाइल की घंटी बजी ।ऑन करने पे आवाज आई — “हेलो,  सुधीर जी नमस्कार ।” ” नमस्कार भाई साहब ।” ” सुधीर जी, आपकी कहानी बहुत अच्छी लगी “कैसी कहानी  ? ” सुधीर जी ने थोड़ा आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा । ”...

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सारिका भूषण की दो लघुकथाएं

सारिका भूषण शिक्षा – विज्ञान स्नातक प्रकाशित काव्यसंग्रह —-  ” माँ और अन्य कविताएं ” 2015                            ” नवरस नवरंग ”  साझा काव्य संग्रह 2013  “कविता अनवरत ” (अयन प्रकाशन ) 2017 एवं  ” लघुकथा अनवरत ” ( अयन...

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अर्जित पांडेय की लघुकथा ‘लाल लिपस्टिक’

अर्जित पांडेयछात्र, एम टेकआईआईटी, दिल्लीमोबाइल–7408918861 मैंने देखा उसे ,वो शीशे में खुद को निहार रहा था ,होठों पर लिपस्टिक धीरे धीरे लगाकर काफी खुश दिख रहा था मानो उसे कोई खजाना मिल गया हो । बेहया एक लड़का होकर लडकियों जैसी हरकतें! हां,  इसके आलावा मैं और क्या सोच सकता...

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सेवा सदन प्रसाद की लघुकथा ‘चैट’

  सेवा सदन प्रसाद — हेलो , सलमा कैसी हो  ? — बस ठीक हूं यार – – जरा क्रिकेट का बुखार चढ़ा है । — इधर भी वही हाल है – –  मैं तो सचिन के बैटिंग की दीवानी थी पर अब विराट भी अच्छा लगने लगा है ।...

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सविता मिश्रा की लघुकथा ‘परिपाटी’

सविता मिश्रा w/o देवेन्द्र नाथ मिश्रा (पुलिस निरीक्षक ) फ़्लैट नंबर -३०२ ,हिल हॉउस खंदारी अपार्टमेंट , खंदारी आगरा २८२००२ अपनी बहन की शादी में खींची गयी उस अनजान लड़की की तस्वीर को नीलेश जब भी निहारता, तो सारा दृश्य आँखों के सामने यूँ आ खड़ा होता, जैसे दो साल...

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सविता मिश्रा की दो लघुकथाएं

एक “क्या हुआ बेटा ? तेरी आवाज क्यों काँप-सी रही हैं ? जल्दी से बता ..हुआ क्या ..?” “माँ वो गिर गया था सुबह-सुबह…।” “कैसे, कहाँ गिरा, ज्यादा लगी तो नहीं ? डॉक्टर को दिखाया! क्या बताया डॉक्टर ने ?” “न माँ ज्यादा तो नहीं लगी, पर डॉक्टर कह रहे...

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डॉ संगीता गांधी की लघुकथा ‘गंवार’

“ए, ये क्या कर रहा है ?” खेत के कोने में दीर्घशंका को  बैठे रमेश को देख  चौधरी साहब ने कहा । चौधरी साहब  मुम्बई में रहते थे ।गांव में भी घर था तो दो -चार साल में गांव का चक्कर लगा लेते थे । ……….गांव वाले उनकी नज़र में...

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पवन तिवारी की कविता किताबें

अब लोगों के हाथों में किताबें नहीं दिखतीं पर सच यह भी है कि मेरे हाथों में भी किताबें नहीं दिखतीं कुछ दोस्तों के हाथों में कभी-कभी दिखती थीं किताबें पर मेरे हाथों में तो रोज रहती थी किताबें जो रिश्ता था रुहानी सा किताबों से,किताबी हो गया कल जब...

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लिटरेचर प्वाइंट काव्यगोष्ठी में आनन्द गुप्ता का कविता पाठ

लिटरेचर प्वाइंट लाइव में सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव का कविता पाठ लिटरेचर प्वाइंट लाइव में राजेंद्र राजन की कविता ‘बामियान में बुद्ध’ Literature Point LIVE में राजेंद्र राजन का कविता पाठ भाग 2 लिटरेचर प्वाइंट LIVE में राजेंद्र राजन का कविता पाठ : भाग 1

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लिटरेचर प्वाइंट लाइव में सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव का कविता पाठ

अनुपम निशान्त की चार कविताएं भावना सिन्हा की तीन कविताएं पल्लवी मिश्रा की दो कविताएं शहर काइयांपन सिखाता है दीप्ति शर्मा की पांच कविताएं

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लिटरेचर प्वाइंट लाइव में राजेंद्र राजन की कविता ‘बामियान में बुद्ध’

भावना सिन्हा की तीन कविताएं पल्लवी मिश्रा की दो कविताएं शहर काइयांपन सिखाता है दीप्ति शर्मा की पांच कविताएं डॉ निधि अग्रवाल की तीन कविताएं

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Literature Point LIVE में राजेंद्र राजन का कविता पाठ भाग 2

अनुपम निशान्त की चार कविताएं भावना सिन्हा की तीन कविताएं पल्लवी मिश्रा की दो कविताएं शहर काइयांपन सिखाता है दीप्ति शर्मा की पांच कविताएं

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संगीता गांधी की लघुकथा ‘अज्ञात अंधेरे’

सरकारी हस्पताल के एक कोने में आमिर  बुत बना बैठा था ।अनजाना अँधेरा उसके चारों ओर छाया था । ये क्या हो गया ?उसने अपने ही हाथों से अपने दिल के टुकड़े को कैसे मार दिया ! अंदर डॉ उसके 12 साल के बेटे का इलाज कर रहे थे ।सर...

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लिटरेचर प्वाइंट LIVE में राजेंद्र राजन का कविता पाठ : भाग 1

अनुपम निशान्त की चार कविताएं भावना सिन्हा की तीन कविताएं पल्लवी मिश्रा की दो कविताएं शहर काइयांपन सिखाता है दीप्ति शर्मा की पांच कविताएं

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मीनू परियानी की लघुकथा ‘मज़बूरी’

आज राधा को कुछ ज्यादा ही देर हो गयी थी मै दो बार बाहर जा कर देख आई थी पर उसका दूर दूर तक पता नही था. राधा मेरी कामवाली बाई थी जो कभी कभी अपनी बेटी को भी काम पर ले आती थी। रानी उसकी बेटी जिसकी उसने छोटी उम्र में...

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कमलेश भारतीय की दो लघुकथाएं

ईश्वर का जन्म वे टूटे घरों का मलबा या कबाड़ उठाने का काम करते थे । कभी काम मिलता , कभी नहीं । रेहड़ी खडी रहती । खच्चर का चारे का खर्च अलग । ऐसे खाली समय में बैठे सोच रहे थे कि क्या किया जाए । ईश्वर तुम कहां...

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हाशिेए पर अब और नहीं

महिला दिवस पर विशेष डाॅ. मृणालिका ओझा अगस्त सन् 1910 में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाना तय हो चुका था। महिलाओं को समानता, अधिकार व सम्मान प्राप्त हो सके इसके लिए कोपेन हेगेन में कुछ समाजवादी राष्ट्रों के सम्मेलन में इसे तय किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक रूप से...