Category: मुद्दा

0

हाशिेए पर अब और नहीं

महिला दिवस पर विशेष डाॅ. मृणालिका ओझा अगस्त सन् 1910 में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाना तय हो चुका था। महिलाओं को समानता, अधिकार व सम्मान प्राप्त हो सके इसके लिए कोपेन हेगेन में कुछ समाजवादी राष्ट्रों के सम्मेलन में इसे तय किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक रूप से...

0

लोकप्रिय साहित्य एक आवश्यक सीढ़ी

वीणा भाटिया एक समय हिंदी में लघु पत्रिका आंदोलन ने काफी जोर पकड़ा था। अमूमन हर बड़े शहर ही नहीं, छोटे कस्बों से भी लघु पत्रिकाएं निकलती थीं। भले ही इनका प्रसार कम होता था, पर स्थानीय स्तर पर ही सही, साहित्य के प्रचार-प्रसार में इनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं...

0

हिन्दी साहित्य का बाजारकाल

भरत प्रसाद                                                        नयी सदी, नया जमीन, नयी आकाश, नया लक्ष्य, नयी उम्मीदें, नयी आकांक्षाएँ। यकीनन मौजूदा सदी ने मनुष्य और उसके जीवन के प्रत्येक पहलू को नयेपन की आँधी में उलट-पलट कर रख दिया है। परम्परागत मूल्य, मान्यताएँ, रिवाज, संस्कार और तौर-तरीके विलुप्त प्रजातियों की नियति प्राप्त करने वाले...