Category: लघु कथा

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सेवा सदन प्रसाद की लघुकथा ‘रिवाज’

विमलेश शोध के सिलसिले में जलपाईगुड़ी पहुंचा ।वह जनजाति पर शोध कर रहा था ।जलपाईगुड़ी के टोटापड़ा कस्बे में जनजातियों की काफी संख्या है ।विमलेश को वही जगह उचित लगा ।वहां पर आवास की व्यवस्था करने में जुटा था तभी बाबलू से मुलाकात हुई जो जनजाति का ही था ।बाबलू...

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सुषमा सिन्हा की चार लघुकथाएं

1. बेटा स्थानांतरण के फलस्वरूप कार्यालय में आये नये साहब ने अनुकम्पा पर नियुक्ति पाये एक क्लर्क से पूछा- ‘क्या बात है? तुम बार-बार छुट्टी क्यों लेते रहते हो?’ कलर्क ने उत्तर दिया- ‘क्या करें साहेब, माँ बहुते बीमार रहती है। उसका देखभाल करना पड़ता है न। उसको दस हजार...

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यशपाल शर्मा की तीन लघुकथाएं

सच्चा प्यार “यार मैं कोमल के बिना ज़िंदा नहीं रह सकता।” रमण ने बड़ी ही मासूमियत के साथ कहा। “क्यूँ? ” मैंने अनायास ही पूछ लिया। ” तुम नहीं जानते मैं कोमल से कितना प्यार करता हूँ।  सच्चा प्यार।  बहुत ज़्यादा चाहता हूँ मैं उसे। अपनी जान से भी ज़्यादा।...

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हंस राज की लघु कथा ‘दान’

आज मैं बहुत जल्दी में था।  दफ्तर के लिए घर से निकलते-निकलते देर हो गई थी।  सोचा पैदल मेट्रो स्टेशन तक जाऊंगा तो और देर हो जाएगी। अतः रिक्शा ले लिया।  रिक्शेवाला लोहे के छर्रे पर अपनी बूढी हड्डियों के सहारे रिक्शा को खींचता स्टेशन की तरफ चल पड़ा।  स्टेशन...

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डॉ संध्या तिवारी की लघु कथा ‘ठेंगा’

उसके आगे तंगी हमेशा मुंह बाए खड़ी रहती थी लेकिन देह को धंधे के लिये उपयोग में लाना उसे कभी मंजूर न था लेकिन गरीबी कैसे दूर की जाये इस का उपाय वह खोजती ही रहती थी। इसी क्रम में किसी ने उसे बताया , कि वह गुरुवार का व्रत...

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सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की लघु कथा ‘स्मार्ट फैमिली, स्मार्ट ज़िन्दगी’

डिनर का वक्त परिवार का वक्त होता है। यही वक्त होता है जब परिवार के सारे सदस्य एक साथ मौजूद होते हैं अपने अपने मोबाइल के साथ। सब साथ होते हैं लेकिन कोई किसी की तरफ ठीक से देखता नहीं। मम्मी अपनी फोटो पर लगातार आ रही लाइक की संख्या...