Category: HINDI

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शिव कुशवाहा की 6 कविताएं

1.उम्मीदों का नया आकाशकिसी शहर की सड़क कीपरित्यक्त पुलिया के किनारेठहरकर देखना कभी कि वहां दिखेंगे तुम्हेंधंसते हुए से  धरातलमटमैले से भावों को समेटेस्याह बादलों मेंगुम होता हुआ जीवन जीवन ,हां वह जीवनजो संघर्ष करता है अंधियारे भोर से लेकर मटमैली शाम तकजिजीविषा से जूझते हुएबाज़ार के किनारे परलगा लेते हैं अपनी...

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अरुण कुमार की 5 कविताएं

क्या है जिन्दगी? जिन्दगी पायजामे के उस नाड़े सी है जिसे, जितना जल्दी सुलझाना चाहता हूं, उतनी ही उलझती चली जाती है। जिंदगी शहर के, उस ट्रेफिक जाम जैसी है कि जब दौड़ना चाहता हूं, फंस सी जाती है। जिंदगी गांव के छोर की उस अंतिम बस्ती सी है, जो...

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केशव शरण की 5 कविताएं

इस राष्ट्र में इस राष्ट्र में मंदिर भी होना चाहिए इस राष्ट्र में  मसजिद भी इस राष्ट्र में चर्च भी इस राष्ट्र में हिंदू भी होने चाहिए इस राष्ट्र में मुसलमान भी इस राष्ट्र में ईसाई भी इस राष्ट्र में क्या सब मानव ही रहते हैं ? अजब उधेड़बुन चल...

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नीतेश मिश्र की 4 कविताएं

1. क्या हो कि अगर क्या हो कि अगर शहर ना हो तो शायद  नहीं बिकेंगी शरीर और आत्माएँ ‘इश्क़ में शहर होना’ जैसी सारी संभावनाएं सिरे से खारिज की जा सकेंगी नहीं करेगी कोई प्रेमिका अपने प्रेमी का इंतज़ार शहर के बगीचे में सभी रास्ते सिर्फ गाँव को जाते...

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डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी की 2 लघुकथाएं

मुखौटे साथ-साथ खड़े दो लोगों ने आसपास किसी को न पाकर सालों बाद अपने मुखौटे उतारे। दोनों एक-दूसरे के ‘दोस्त’ थे। उन्होंने एक दूसरे को गले लगाया और सुख दुःख की बातें की। फिर एक ने पूछा, “तुम्हारे मुखौटे का क्या हाल है?” दूसरे ने मुस्कुरा कर उत्तर दिया, “उसका...

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प्रतिभा चौहान की 5 कविताएं

मत करो नियमों की बात आज सिसकियाँ और रुदन के बीज क्या पनपते रहेंगे बलिदानों की धरा पर क्या पसीने की बूँदे न पिघला देंगी तुम्हारे पत्थर के सीने को चहकते महकते मचलते उछलते बच्चों की कोहनियों की चोटें कब तक बोती रहेंगी व्यथा की फ़सल क्या आज बोए बीज...

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शिवदयाल के उपन्यास ‘एक और दुनिया होती’ का एक अंश

                       रात को ओढ़ने के लिए मेरे पास तो कुछ था नहीं। रात एक झोपड़ी के ओसारे में गुजारनी थी। पुआल का बिस्तर लगा और मुझे सहारा मिला बम्बइया से। उनके पास कंबल था। बीड़ी सुलगाने के पहले उन्होंने कंबल खोला और मुझ पर डाल दिया। कुछ इधर-उधर की बात...

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पुस्तक विमोचन व सम्मान समारोह

लोकोदय प्रकाशन द्वारा दिनांक 16-12-2018 को वन अवध सेण्टर (One Awadh Center), सिनेपोलिश, विभूति खण्ड, गोमती नगर, लखनऊ में अपराह्न 1.00 बजे से पुस्तक विमोचन व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ नवगीतकार मधुकर अष्ठाना को स्व. जगदीश गौतम स्मृति सम्मान से सम्मानित किया जाएगा...

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अवधेश कुमार ‘अवध’ के 2 गीत

1. दीपों का बलिदान याद हो जब  मन में अज्ञान भरा हो, अंधकार अभिमान भरा हो, मानव  से  मानव  डरता हो, दिवा  स्वप्न  देखा करता हो, गलत राह मन को भाती हो, मानवता   खुद   शर्माती हो,          धर्म कर्म अभियान याद हो ।        ...

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संजय शांडिल्य की 5 कविताएं

पिता की तस्वीर आज झाड़ते हुए आलमारी अखबार के नीचे मिल गई पिता की वही तस्वीर कई साल पहले ढूधवाले के हिसाब के वक्त भी यह इसी तरह पाई गई थी माँ की डायरी में फूल की पँखुरी-सी सुरक्षित फिर एक रात जब दादी के दाँतों में हुआ था भीषण...

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मीनू परियानी की लघुकथा ‘माता का जगराता’

सुबह से ही कोठी में रौनक थी। नौकर-चाकर सब दौड़ रहे थे। शाम को माता का जगराता जो होने वाला था। बेटा, बहू सब अति व्यस्त। आज सुबह से माँ कुछ अस्वस्थ थी। बेटा एक बार जाकर माँ का हाल पूछ आया था। बहू तो वैसे  ही अतिव्यस्त थी। ‘माँ को भी...

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सुशांत सुप्रिय की 10 कविताएं

1. एक सजल संवेदना-सी उसे आँखों से कम सूझता है अब घुटने जवाब देने लगे हैं बोलती है तो कभी-कभी काँपने लगती है उसकी ज़बान घर के लोगों के राडार पर उसकी उपस्थिति अब दर्ज़ नहीं होती लेकिन वह है कि बहे जा रही है अब भी एक सजल संवेदना-सी समूचे घर में — अरे बच्चों ने खाना खाया कि नहीं कोई पौधों को पानी दे देना ज़रा बारिश भी तो ठीक से नहीं हुई है इस साल 2. निमंत्रण ओ प्रिय आओ कोई ऐसी जगह तलाश करें जहाँ प्रतिदिन मूक समझौतों के सायनाइड नहीं लेने पड़ें जहाँ ढलती उम्र के साथ निरंतर चश्मे का नंबर न बढ़े जहाँ एक दिन अचानक यह भुतैला विचार नहीं सताए कि हम सब महज़ चाबी भरे खिलौने हैं   चलो प्रिय कौमा और पूर्ण-विराम से परे कहीं जिएँ 3.बोलना हर बार जब मैं अपना मुँह खोलता हूँ तो केवल मैं ही नहीं बोलता माँ का दूध भी बोलता है मुझमें से पिता की शिक्षा भी बोलती है मुझमें से मेरा देश मेरा काल भी बोलता है मुझमें से 4. हक़ीक़त हथेली पर खिंची टूटी जीवन-रेखा से क्या डरते हो...

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दीप्ति शर्मा की 5 कविताएं

1. काले तिल वाली लड़की कल तुम जिससे मिलीं फोन आया था वहाँ से तुम तिल भूल आयी हो सुनो लड़कियों, ये तिल बहुत आवारा होते हैं चन्द्र ग्रहण की तरह काला तिल अनाज नहीं होता ये पूरी दुनिया होता है जिससे मिलो सँभल कर मिलो ये मिलना भी ज्वार...

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लोकोदय नवलेखन सम्मान के लिए पांडुलिपियां आमंत्रित

लोकधर्मी लेखन को बढ़ावा देने के लिए दिसम्बर 2015 में लोकोदय प्रकाशन की शुरूआत की गई थी। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया था कि युवा लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रकाशन की ओर से नवलेखन सम्मान प्रारम्भ किया जाएगा। लोकोदय नवलेखन सम्मान का उद्देश्य उन युवा लेखकों...

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उदयराज की कहानी ‘उसकी हंसी’

वह मुझे बन्धु कहकर बुलाती थी। साथ काम करती, साथ गप्पें करती, कभी – कभी गुमसुम हो कर बैठ जाती। मुझे उसका चुप बैठना एकदम अच्छा नहीं लगता, कोई न कोई बहाना बनाकर मैं उसके पास चला जाता, सरगोशी करता, आज मौसम उदास तो नहीं है… ‘फिर’ ? वह अपनी...

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मिथिलेश कुमार राय की 3 कविताएं

मिथिलेश कुमार राय 1. दिसंबर (कल दिसम्बर की बात छिड़ गई तो उसने कहा कि यादों में सब कैद हो जाता है यहाँ तक कि आवाजें भी हमेशा के लिए हवा में कैद होकर रह जाती हैं) मेरी जनवरी में थोड़ी सी सर्दी है गेंदे के कुछ फूल हैं लाल-लाल...

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पल्लवी मुखर्जी की 2 कविताएं

पल्लवी मुखर्जी स्त्री स्त्री शब्द-शब्द उतारती है तुम्हेंअपने जीवन मेंभोर की लालिमा मेंलिपे चूल्हे परतुम्हारी चाय कीभीनी खुशबू सेफैलती है उसकी सुबहपूरा दिन और पूरी रात पढ़ती रहती है तुम्हें स्त्री बिना तुम बासी रोटी पर उगे फफूंद को भी उदरस्थ कर लेते हो  स्त्री तुम्हारे भीतर की सुगंध है…..। जो बासीपन हटा देती है       2.   पुरुष    ...

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देवेंद्र कुमार पाठक के 4 गीत

देवेंद्र कुमार पाठक म.प्र. के कटनी जिले के गांव भुड़सा में 27 अगस्त 1956 को एक किसान परिवार में जन्म. शिक्षा-M.A.B.T.C. हिंदी शिक्षक पद से 2017 में सेवानिवृत्त. नाट्य लेखन को छोड़ कमोबेश सभी विधाओं में लिखा ……’महरूम’ तखल्लुस से गज़लें भी कहते हैं 2 उपन्यास, ( विधर्मी,अदना सा आदमी...

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केशव शरण की 41 कविताएं : व्यथा, जो कविता में ढल गई

कविता एक आवेग है। एक ऐसा आवेग, जिसे कवि शब्दों से संभालने की कोशिश करता है। वह शब्द देता है, आवेग उसमें ढलता जाता है। इस तरह जन्म लेती है एक कविता। कवि अपने और अपने आसपास के लोगों के जीवन, सामाजिक-राजनीतिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों से प्रभावित होता है। यही परिस्थितियां उसे...

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रमेश शर्मा की 5 कविताएं

रमेश शर्मा  92,  श्रीकुंज बीज निगम के सामने , बोईर दादर रायगढ़, छत्तीसगढ़ 496001 मोबाइल 9752685148 छोटी छोटी लड़कियां  क्या करेंगी ये छोटी छोटी  लड़कियां खिलौनों से खेलेंगी पुचकारेंगी सुनाएंगी कहानियां अपनी तोतली भाषा में उन्हें! फिर चुपचाप दुबक जाएंगी खिलौनों की तरह घर के किसी कोने में खिलौनों से...