Category: HINDI

0

चन्द्र की कविता ‘दु:ख’

बहुत दुख से जब ग्रस्त हो जाता हूं मैं तब भीतर भीतर पसीज पसीज के रो रो जाता हूं तब अपनी पलकों पर पसरी हुई कई कई दिनों की मैल को  धो धो जाता हूं और  अंततः किसी घनेरी रात की लम्बी नींद में चुपचाप  सो सो जाता हूं और...

0

मुसाफिर बैठा के कविता संग्रह ‘विभीषण का दु:ख’ से 5 कविताएं

मुसाफिर बैठा तीन स्थितियां आदमी मरने के बाद कुछ नहीं बोलता स्वाभाविक स्थिति! दलित मरने के पहले  कुछ नहीं बोलता अस्वाभाविक स्थिति ! ! दलित को आदमी नहीं भी कहा जा सकता स्वाभाविक  स्थिति ! ! ! (उदयप्रकाश की एक कविता से प्रेरित)   डर में घर जिसे तुम कहते...

0

ओम नागर की 7 प्रेम कविताएं

ओम नागर 20 नवम्बर, 1980 को गाँव -अन्ताना, तहसील -अटरु, जिला- बारां  ( राजस्थान ) में  जन्मे ओम नागर ने कोटा विश्वविद्यालय,कोटा से  हिन्दी  एवं राजस्थानी में स्नातकोत्तर और  पी-एचडी की उपाधि प्राप्त की। हिन्दी एवं राजस्थानी साहित्य में कवि,अनुवादक और डायरी लेखक के रूप में  विशिष्ट पहचान रखने वाले युवा कवि- लेखक...

0

संजय शांडिल्य की प्रेम कविताएं

संजय शांडिल्य परिचय जन्म : 15 अगस्त, 1970 | स्थान : जढ़ुआ बाजार, हाजीपुर | शिक्षा : स्नातकोत्तर (प्राणिशास्त्र) | वृत्ति : अध्यापन | रंगकर्म से गहरा जुड़ाव | बचपन और किशोरावस्था में कई नाटकों में अभिनय | प्रकाशन : कविताएँ हिंदी की प्रायः सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित एवं ‘अँधेरे में ध्वनियों के बुलबुले‘ (सारांश प्रकाशन, दिल्ली) तथा ‘जनपद...

0

कैलाश मनहर की 5 कविताएं

कैलाश मनहर एकयदि कोई भटकता आदमी दिखाई दे तुम्हें उसे मेरे नाम से पुकारनावह जरूर तुम्हारी तरफ़ देेखेगा जैसे मैं दोअच्छा चलता हूँ कह कर आया था उसे और अभी तक नहीं हुआठहरना या लौटनापहुँचना तो शायद कल्पनातीत है तीनमस्तक पर घाव की असह्य पीड़ा को झेलतेअमरत्व का भोगश्राप है या वरदानकवि ही जाने कविता बखाने चारझेल रहा हूँ शीतलहर इसदुर्बल...

0

कोलकाता में 2 दिवसीय साहित्यिक पत्रिका सम्मेलन

भारतीय भाषा परिषद ने 16-17 फरवरी को साहित्यिक पत्रिका सम्मेलन का आयोजन किया है, जिसमें देश भर से पहुंचने वाले संपादक-लेखक साहित्यिक पत्रिकाओं की दशा-दिशा, वर्तमान और भविष्य पर अपनी राय रखेंगे। भारतीय भाषा परिषद के प्रेक्षागृह में होने वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन प्रसिद्ध हिन्दी कथाकार गिरिराज...

0

प्रद्युम्न कुमार सिंह की 5 कविताएं

प्रद्युम्न कुमार सिंह जन्म : 19 जनवरी सन् 1976 को फतेहपुर जिले की खागा तहसील के घोषी गाँव में शिक्षा : एम० ए० हिन्दी, बीएड हिन्दी संस्कृतप्रकाशन : आलोचना पुस्तक – युगसहचर – सुधीर सक्सेना का सम्पादन ,विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। एम० एम० चन्द्रा के साथ साझा संकलन, समकालीन चालीस कवियों के साथ ‘परिधि पर...

0

पवन कुमार मौर्य की 5 कविताएं

पवन कुमार मौर्य जन्मतिथि- 01 जून, 1993शिक्षा– स्नातक भूगोल (ऑनर्स) (बीएचयू, बनारस) एमए (जनसंचार) एमसीयू, भोपाल. प्रकाशन-जनसत्ता, दैनिक जागरण, अमर उजाला, सुबह सवेरे सहित कई प्रमुख समाचार पत्रों में समसामयिक मसले पर सैकड़ों आलेख, टिप्पणी और पत्र प्रकाशित। डिजिटल साहित्यिक मंच- प्रतिलीपी, हिंदी डाकिया, कंटेंट मोहल्ला सहित कई मंचों पर कविता,...

0

कृष्ण सुकुमार की 5 कविताएं

कृष्ण सुकुमार ए०  एच०  ई०  सी० आई. आई. टी. रूड़की रूड़की-247667 (उत्तराखण्ड) मोबाइल नं० 9917888819 kktyagi.1954@gmail.com एक प्रेमिकाएं उड़ रही थीं आकाश में ! प्रेमी धरती पर चुग रहे थे बिखरा हुआ अपना वर्तमान ! खिलती हुई हवाओं के फूलों ने सपनों में बिखेर रखी थी ख़ुशबू ! जब कि...

0

ऐसे होते हैं हमारे पहले के कवि

जबलपुर में कवि मलय से मुलाकात पर लिखा है डॉ करण सिंह चौहान ने अजीब बात थी कि मध्यप्रदेश के अधिकांश शहरों में जाना हुआ लेकिन जबलपुर में जाना यह पहली बार हुआ । और जाना भी क्या ऐसा-वैसा ! अपने वरिष्ठ कवि मलय का सम्मान करने के लिए जाना...

0

हम हर बार ,बार बार मिलेंगे बाबा रहीमदास

मानबहादुर सिंह लहक सम्मान 2019 के चौथे आयोजन के तहत दिनांक 24- 01- 2019 को दोपहर एक बजे रामघाट चित्रकूट (नवगाँव) स्थित रहीम की कुटिया में कविता पाठ एवं परिचर्चा गोष्ठी सम्पन्न हुई । गोष्ठी का संयोजन युवा कवि नारायण दास गुप्त ने किया एवं अध्यक्षता डा़ कर्णसिंह चौहान ने...

0

मौजूदा साहित्यिक परिदृश्य में लोकोदय प्रकाशन का ऐतिहासिक हस्तक्षेप

अगर समाज में सबकुछ ठीक हो, सबकुछ अनुकूल हो तो लेखक कुछ नहीं लिख पाएगा क्योंकि साहित्य की प्रासंगिकता विरोध में ही होती है। यह मानना है वरिष्ठ और मशहूर आलोचक कर्ण सिंह चौहान का। लखनऊ के लोकोदय प्रकाशन की ओर से “समकालीन साहित्यिक परिदृश्य और घटती पाठकीयता” विषय पर...

0

शिव कुशवाहा की 6 कविताएं

1.उम्मीदों का नया आकाशकिसी शहर की सड़क कीपरित्यक्त पुलिया के किनारेठहरकर देखना कभी कि वहां दिखेंगे तुम्हेंधंसते हुए से  धरातलमटमैले से भावों को समेटेस्याह बादलों मेंगुम होता हुआ जीवन जीवन ,हां वह जीवनजो संघर्ष करता है अंधियारे भोर से लेकर मटमैली शाम तकजिजीविषा से जूझते हुएबाज़ार के किनारे परलगा लेते हैं अपनी...

0

अरुण कुमार की 5 कविताएं

क्या है जिन्दगी? जिन्दगी पायजामे के उस नाड़े सी है जिसे, जितना जल्दी सुलझाना चाहता हूं, उतनी ही उलझती चली जाती है। जिंदगी शहर के, उस ट्रेफिक जाम जैसी है कि जब दौड़ना चाहता हूं, फंस सी जाती है। जिंदगी गांव के छोर की उस अंतिम बस्ती सी है, जो...

0

केशव शरण की 5 कविताएं

इस राष्ट्र में इस राष्ट्र में मंदिर भी होना चाहिए इस राष्ट्र में  मसजिद भी इस राष्ट्र में चर्च भी इस राष्ट्र में हिंदू भी होने चाहिए इस राष्ट्र में मुसलमान भी इस राष्ट्र में ईसाई भी इस राष्ट्र में क्या सब मानव ही रहते हैं ? अजब उधेड़बुन चल...

0

नीतेश मिश्र की 4 कविताएं

1. क्या हो कि अगर क्या हो कि अगर शहर ना हो तो शायद  नहीं बिकेंगी शरीर और आत्माएँ ‘इश्क़ में शहर होना’ जैसी सारी संभावनाएं सिरे से खारिज की जा सकेंगी नहीं करेगी कोई प्रेमिका अपने प्रेमी का इंतज़ार शहर के बगीचे में सभी रास्ते सिर्फ गाँव को जाते...

0

डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी की 2 लघुकथाएं

मुखौटे साथ-साथ खड़े दो लोगों ने आसपास किसी को न पाकर सालों बाद अपने मुखौटे उतारे। दोनों एक-दूसरे के ‘दोस्त’ थे। उन्होंने एक दूसरे को गले लगाया और सुख दुःख की बातें की। फिर एक ने पूछा, “तुम्हारे मुखौटे का क्या हाल है?” दूसरे ने मुस्कुरा कर उत्तर दिया, “उसका...

0

प्रतिभा चौहान की 5 कविताएं

मत करो नियमों की बात आज सिसकियाँ और रुदन के बीज क्या पनपते रहेंगे बलिदानों की धरा पर क्या पसीने की बूँदे न पिघला देंगी तुम्हारे पत्थर के सीने को चहकते महकते मचलते उछलते बच्चों की कोहनियों की चोटें कब तक बोती रहेंगी व्यथा की फ़सल क्या आज बोए बीज...

0

शिवदयाल के उपन्यास ‘एक और दुनिया होती’ का एक अंश

                       रात को ओढ़ने के लिए मेरे पास तो कुछ था नहीं। रात एक झोपड़ी के ओसारे में गुजारनी थी। पुआल का बिस्तर लगा और मुझे सहारा मिला बम्बइया से। उनके पास कंबल था। बीड़ी सुलगाने के पहले उन्होंने कंबल खोला और मुझ पर डाल दिया। कुछ इधर-उधर की बात...

0

पुस्तक विमोचन व सम्मान समारोह

लोकोदय प्रकाशन द्वारा दिनांक 16-12-2018 को वन अवध सेण्टर (One Awadh Center), सिनेपोलिश, विभूति खण्ड, गोमती नगर, लखनऊ में अपराह्न 1.00 बजे से पुस्तक विमोचन व सम्मान समारोह का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ नवगीतकार मधुकर अष्ठाना को स्व. जगदीश गौतम स्मृति सम्मान से सम्मानित किया जाएगा...