Category: HINDI

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विष्णु खरे को हार्दिक श्रद्धांजलि

कवि-आलोचक-संपादक विष्णु खरे का जाना सचमुच हिन्दी साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है। लिटरेचर प्वाइंट की ओर से उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि। वे हमारे दिलों में अमर रहेंगे। उनकी इस कविता को पढ़िए और महसूस कीजिए कि वो कितने महान कवि थे।   नींद में कैसे मालूम कि जो नहीं रहा...

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विनोद कुमार दवे की कहानी ‘सहायता’

विनोद कुमार दवे बस में बैठे-बैठे मैंने अनुमान लगाया, जयपुर पहुंचते पहुंचते बारह बज जाएंगे। जगह-जगह बस का रुकना मुझे बेचैन कर रहा था, अभी सात घंटे बाकी थे। इतना लंबा वक़्त बस में काटना बहुत मुश्किल है। मैं पछता रहा था, ट्रेन से आता तो बहुत सुविधाजनक रहता। “खैर...

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विमलेश त्रिपाठी की 5 प्रेम कविताएं

विमलेश त्रिपाठी विमलेश त्रिपाठी के कविता संग्रह ‘उजली मुस्कुराहटों के बीच’ को अभी किंडल से डाउनलोड करें और अपनी प्रतिक्रिया से हमें अवगत कराएं। डाउनलोड करने के लिए नीचे की तस्वीर पर क्लिक करें। एक भाषा हैं हम शब्दों के महीन धागे हैं हमारे संबंध कई-कई शब्दों के रेशे-से गुंथेसाबुत खड़े...

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विशाल मौर्य ‘विशु’ की 3 प्रेम कविताएं

विशाल मौर्य ‘विशु’ नूर मुहम्मद नूर के ग़ज़ल संग्रह ‘सबका शायर’ बुक करने के लिए नीचे के लिंक पर क्लिक करें 1.मेरा प्रेम मेरा प्रेमदिल की चहारदीवारी फांदकरतुम्हारे पास जाकर चुपचाप बैठना चाहता हैंवैसे ही जैसे कोई छोटा लड़कापाठशाला की दीवारें फांदकर बैठा रहता हैं बग़ीचे मेंमहुआ के पेड़ से बतियाते हुए मेरा...

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ध्रुप गुप्त की 4 ग़ज़लें

ध्रुव गुप्त एक हम हाज़िर हैं हाथ उठाए सपना जहां, जिधर ले जाए दरवाज़े पर आस टंगी है खिड़की पर लटके हैं साए तन्हाई में शोर था कितना चीखो तो आवाज़ न आए हम सड़कों पे खड़े रह गए सड़कों ने कल धूल उड़ाए हर कंधे पर बोझ है कितना...

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अनवर सुहैल की 4 कविताएं

अनवर सुहैल ये कविताएं अनवर सुहैल के कविता संग्रह डरे हुए शब्द से ली गई हैैं। संग्रह किंंडल पर उपलब्ध है। डाउनलोड करने के लिए नीचे क्लिक करें कितना ज़हर है भरा हुआ समय का ये खंड भोगना ज़रूरी था वरना हम जान नहीं पाते कि हमारे दिलों में एक-दूजे...

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चांदनी सेठी कोचर की लघुकथा ‘कामवाली’

चादनी सेठी कोचर रेणु की काम वाली सुनीता उसके घर में पिछले 4 साल से काम कर रही थी। दोनों एक दूसरे को बखूबी समझते थे लेकिन आज सुनीता को काम पर आने में थोड़ी देर क्या हुई, रेणु उस पर चिल्लाने लगी। “क्या बाता है सुनीता, आज तुमने आने...

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आशीष श्रीवास्तव की लघु कथा ‘तबीयत’

आशीष श्रीवास्तव पिछले एक सप्ताह से राकेश कार्यालय आता और अपने कार्यालयीन सहयोगी नरेश को काम में सहयोग करने के लिए कहता, फिर बहुत-सा काम बताकर चला जाता। कहता : पिताजी की तबियत ठीक नहीं है उन्हें दिखाने जाना है, भाई संभाल ले। नरेश  ने संवेदनशीलता और गंभीरता दिखाई और...

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दिलीप कुमार की पांच लघुकथाएं

  दिलीप कुमार बलरामपुर जन्मभूमि मुंबई कर्मभूमि रचनाएं विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित संपर्क –9454819660 धूप की छांह पुरानी दिल्ली, सीलमपुर की मंडी। लोग बाग खचाखच, तर-ब-तर, रेलमपेल। सहाफी शीबा ने मुझे मछली मंडी की राह दिखायी। चिलचिलाती धूप, सकीनन अप्रैल, की थी मगर मौसम की बेदर्दी साफ नुमाया थी।...

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मीनू परियानी की लघुकथा ‘कन्यापूजन’

  मीनू परियानी कल ही बड़ी बहू को चेक अप के लिए हॉस्पिटल ले गये थे , डॉक्टर ने बड़ी मुश्किल  से हाँ की थी, लिंग परीक्षण कानूनन अपराध जो था आजकल . एक पोती पहले से ही थी इसलिए सेठ जी इस बार पोता ही चाहते थे. रिपोर्ट और डॉक्टर...

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मो. शफ़ीक़ अशरफ की लघुकथा ‘सुबह के पटाखे’

  मो0 शफ़ीक़ अशरफ मोहिउद्दीनपुर, समस्तीपुर (बिहार) टीवी पर संदेश आ रहा था, दिवाली पर पटाखे कम जलाएँ वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और साथ ही ध्वनि-प्रदूषण भी, पटाखों की तेज़ आवाज़ से बच्चे-बूढ़े, पशु-पक्षी सब परेशान हो रहे हैं, ऑफिस जाने का समय हो रहा था जल्दी से तैयार...

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सेवा सदन प्रसाद की तीन लघुकथाएं

  सेवा सदन प्रसाद एक हिंदी लेखक मोबाइल की घंटी बजी ।ऑन करने पे आवाज आई — “हेलो,  सुधीर जी नमस्कार ।” ” नमस्कार भाई साहब ।” ” सुधीर जी, आपकी कहानी बहुत अच्छी लगी “कैसी कहानी  ? ” सुधीर जी ने थोड़ा आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा । ”...

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सारिका भूषण की दो लघुकथाएं

सारिका भूषण शिक्षा – विज्ञान स्नातक प्रकाशित काव्यसंग्रह —-  ” माँ और अन्य कविताएं ” 2015                            ” नवरस नवरंग ”  साझा काव्य संग्रह 2013  “कविता अनवरत ” (अयन प्रकाशन ) 2017 एवं  ” लघुकथा अनवरत ” ( अयन...

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अर्जित पांडेय की लघुकथा ‘लाल लिपस्टिक’

अर्जित पांडेयछात्र, एम टेकआईआईटी, दिल्लीमोबाइल–7408918861 मैंने देखा उसे ,वो शीशे में खुद को निहार रहा था ,होठों पर लिपस्टिक धीरे धीरे लगाकर काफी खुश दिख रहा था मानो उसे कोई खजाना मिल गया हो । बेहया एक लड़का होकर लडकियों जैसी हरकतें! हां,  इसके आलावा मैं और क्या सोच सकता...

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सेवा सदन प्रसाद की लघुकथा ‘चैट’

  सेवा सदन प्रसाद — हेलो , सलमा कैसी हो  ? — बस ठीक हूं यार – – जरा क्रिकेट का बुखार चढ़ा है । — इधर भी वही हाल है – –  मैं तो सचिन के बैटिंग की दीवानी थी पर अब विराट भी अच्छा लगने लगा है ।...

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सविता मिश्रा की लघुकथा ‘परिपाटी’

सविता मिश्रा w/o देवेन्द्र नाथ मिश्रा (पुलिस निरीक्षक ) फ़्लैट नंबर -३०२ ,हिल हॉउस खंदारी अपार्टमेंट , खंदारी आगरा २८२००२ अपनी बहन की शादी में खींची गयी उस अनजान लड़की की तस्वीर को नीलेश जब भी निहारता, तो सारा दृश्य आँखों के सामने यूँ आ खड़ा होता, जैसे दो साल...

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सविता मिश्रा की दो लघुकथाएं

एक “क्या हुआ बेटा ? तेरी आवाज क्यों काँप-सी रही हैं ? जल्दी से बता ..हुआ क्या ..?” “माँ वो गिर गया था सुबह-सुबह…।” “कैसे, कहाँ गिरा, ज्यादा लगी तो नहीं ? डॉक्टर को दिखाया! क्या बताया डॉक्टर ने ?” “न माँ ज्यादा तो नहीं लगी, पर डॉक्टर कह रहे...

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डॉ संगीता गांधी की लघुकथा ‘गंवार’

“ए, ये क्या कर रहा है ?” खेत के कोने में दीर्घशंका को  बैठे रमेश को देख  चौधरी साहब ने कहा । चौधरी साहब  मुम्बई में रहते थे ।गांव में भी घर था तो दो -चार साल में गांव का चक्कर लगा लेते थे । ……….गांव वाले उनकी नज़र में...

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पवन तिवारी की कविता किताबें

अब लोगों के हाथों में किताबें नहीं दिखतीं पर सच यह भी है कि मेरे हाथों में भी किताबें नहीं दिखतीं कुछ दोस्तों के हाथों में कभी-कभी दिखती थीं किताबें पर मेरे हाथों में तो रोज रहती थी किताबें जो रिश्ता था रुहानी सा किताबों से,किताबी हो गया कल जब...