Category: कविता

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डॉ विनीता राहुरिकर की दो कविताएं

  डॉ विनीता राहुरिकर M.Sc. botany, spec. Air microflora, plant pathology.M.A. drawing painting, हिंदीD.C.H.,  1. अब तक विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में 150 से अधिक रचनाओं का प्रकाशन। जिसमे से 62 कहानियां। 2. पराई ज़मीन पर उगे पेड़- कहानी संग्रह,ऊँचे दरख्तों की छाँव में- कविता संग्रहघर-आँगन, पुस्तक मित्र  बाल कथा संग्रहTwo loves of...

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अनुपम निशान्त के तीन गीत

  अनुपम निशान्त 1. तुम प्रेम का दीप जला देना जब जीवन की साँझ ढलेगी, दिन धुंधले पड़ जाएंगे तब दरवाजे की चौखट पर तुम प्रेम का दीप जला देना। अभी तो सबका संग-साथ है, हर दिन कोई नई बात है, ऋतुएं मद्धम राग सुनाती हैं, अभी प्रकृति में उल्लास...

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डॉ सजल प्रसाद की कविता ‘इंकलाब’

  डॉ सजल प्रसाद शिक्षा- एम.ए.(हिन्दी), पी-एच.डी.लेखन – ‘अज्ञेय और उनके उपन्यास’ पुस्तक प्रकाशित। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में दर्जनाधिक शोधालेख प्रकाशित। राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय सेमिनार में आलेख प्रस्तुत। सोशल मीडिया के दसाधिक साहित्यिक समूहों में निरंतर काव्य-लेखन।पत्रकारिता – ‘हिन्दुस्तान’ हिन्दी दैनिक से सम्बद्ध। इसके पूर्व ‘आज’ और ‘नवभारत...

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पल्लवी मुखर्जी की चार कविताएं

  पल्लवी मुखर्जी जन्म- 26 नवंबर, 1967 रामानुजगंज,सरगुजा,छत्तीसगढ़शिक्षा- बी.एएकइस पूरे प्रकरण मेंवे दोनों साक्षी थेपर हर बार तुमजलील होती रहीऔर वोतमाम बेगुनाही का सबूत देकरबच निकलता थाहर बार वो तय मुताबिक उसके अस्तित्व को तार-तार कर देता थावो मूक स्तब्ध होकरदेख रही थी उन आँखों कोजिसने उसे एक नज़र दी थीदुनिया...

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रमेश शर्मा की पांच कविताएं

  रमेश शर्मा जन्म: 06.6.1966, रायगढ़ छत्तीसगढ़ में . शिक्षा: एम.एस.सी. (गणित) , बी.एड. सम्प्रति: व्याख्याता सृजन: एक कहानी संग्रह मुक्ति 2013 में बोधि प्रकाशन जयपुर से प्रकाशित . छह खंड में प्रकाशित कथा मध्यप्रदेश के छठवें खंड में कहानी सम्मिलित . *कहानियां: समकालीन भारतीय साहित्य , परिकथा, हंस ,पाठ...

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शहंशाह आलम की पांच कविताएं

  शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’ पांच कविता-संग्रह प्रकाशित। सभी संग्रह चर्चित। आलोचना की पहली किताब ‘कवि का...

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निर्मल गुप्त की कविता ‘कलिंग कहां-कहां है?’

  निर्मल गुप्त बहुत दिन बीते कलिंग की कोई सुधबुध नहीं लेता चक्रवर्ती सम्राट को बिसराए हुए अरसा हुआ प्रजा लोकल गोयब्ल्स के इर्द गिर्द जुटती है उसे इतिहास की तह में उतरने से अधिक शब्द दर शब्द फरेब के व्याकरण में अपना त्रिदर्शी भविष्यकाल इस किनारे से साफ साफ...

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भास्कर चौधुरी की पांच कविताएं

  भास्कर चौधुरी परिचय जन्म: 27 अगस्त 1969 रमानुजगंज, सरगुजा (छ.ग.) शिक्षा: एम. ए. (हिंदी एवं अंग्रेजी) बी एड प्रकाशन: एक काव्य संकलन ‘कुछ हिस्सा तो उनका भी है’ एवं गद्य संकलन (यात्रा वृतांत) ‘बस्तर में तीन दिन’ प्रकाशित। लघु पत्रिका ‘संकेत’ का छ्ठा अंक कविताओं पर केंद्रित. कविता, संस्मरण,...

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परितोष कुमार ‘पीयूष’ की दो कविताएं

  परितोष कुमार ‘पीयूष’ इस समय के हत्यारे! हत्यारे अब बुद्धिजीवी होते हैंहत्यारे अब शिक्षित होते हैंहत्यारे अब रक्षक होते हैं हत्यारे अब राजनेता होते हैंहत्यारे अब धर्म गुरु होते हैं हत्यारे अब समाज सेवक होते हैं० हत्यारे अब आधुनिक हो गये हैंहत्यारों ने बदल लिया है हत्या को अंजाम देने के अपने तक तरीकों...

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आचार्य बलवन्त का गीत ‘बेटी’

  आचार्य बलवन्त विभागाध्यक्ष हिंदी कमला कॉलेज ऑफ  मैनेजमेंट स्टडीस 450, ओ.टी.सी.रोड,  कॉटनपेट,  बेंगलूर-560053 (कर्नाटक) मो. 91-9844558064 , 7337810240 Email- balwant.acharya @gmail.com बेटी चेहरे की मुस्कान है बेटी। घर आयी मेहमान है बेटी। क्षमा, प्रेम, करुणा की मूरत, ईश्वर का वरदान है बेटी। श्रद्धा  और विश्वास है बेटी। मन की पावन प्यास है बेटी। चहल-पहल है घर-आँगन की, खुद में ही कुछ खास है बेटी।...

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अनुपम निशान्त की चार कविताएं

  अनुपम निशान्त चुनार (मिर्जापुर) में जन्म। काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से पत्रकारिता में परास्नातक। देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में काम। संप्रति अमर उजाला, वाराणसी में वरिष्ठ उप संपादक। 1- अपना शून्य गढ़ो कभी-कभी जिंदगी के लिए जरूरी खुशी करीब होकर भी गुम जाती है तलाशने लगो तो मिलती...

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संगीता गांधी की कविता ‘शाब्दिक जुलाब’

संगीता गांधी वो लिखते हैं बहुत लिखते हैं लेखन से क्रान्ति उद्घोष करते हैं कल स्वयं क्रांति ने पूछा हे लेखक शिरोमणि चलो जो लिखते हो सार्थक करो आओ दो धक्का सत्ता के मकबरों को एक बार ज़ोर से चिल्लाओ प्रतिष्ठानों की सुरंगों में ऐसे कि सब विसंगतियां हों जाएं कम्पित वो बोले —अभी अस्वस्थ हूँ साथ तुम्हारे न चल सकूँगा लगे हैं ” जुलाब...

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भावना सिन्हा की तीन कविताएं

  डॉ भावना सिन्हा जन्म तिथि -19 जुलाई शिक्षा – पीएचडी (अर्थशास्त्र ) निवास – गया ,बिहार ईमेल — sbhawana190@ gmail.com प्रकाशित कृतियां– यथावत, अंतिम जन, पुस्तक संस्कृति आदि कुछ पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित । 1. पांच बज गए पांच बज गएअभी तक नहीं आए पापा पापा  अब तक क्यों नहीं आएकहीं...

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आनन्द विश्वास के चार गीत

  आनन्द विश्वास जन्म तारीखः– 01- 07-1949 जन्म एवं शिक्षा- शिकोहाबाद (उत्तर प्रदेश) अध्यापन- अहमदाबाद (गुजरात) और अब- स्वतंत्र लेखन (नई दिल्ली) प्रकाशित कृतियाँ- *देवम* (बाल-उपन्यास) (वर्ष-2012) डायमंड बुक्स दिल्ली। *मिटने वाली रात नहीं* (कविता संकलन) (वर्ष-2012) डायमंड बुक्स दिल्ली। *पर-कटी पाखी* (बाल-उपन्यास) (वर्ष-2014) डायमंड बुक्स दिल्ली। 4.*बहादुर बेटी* (बाल-उपन्यास)...

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पल्लवी मिश्रा की दो कविताएं

  पल्लवी मिश्रा असिस्टेंट प्रोफेसर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डोईवाला, देहरादून एक पन्नों पर कलम दर्ज़ करती है, दिनों की बर्खास्तगी रातों के बदलते मायने, पन्नों की तारीखें बयाँ करती हैं – दिनों के दस्तावेज़ो में कमतर होती रोशनी और महसूस होती है कलम की मायूसी l पन्नों पर बने फूल,चिड़ियाँ,तारे...

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अंशू सिंह की कविता ‘अंतहीन भूख’

                  अंशू सिंह जन्म 30 अक्टूबर 1987 वाराणसी   काशी हिन्दू वि वि  से स्नातक एवं   स्नातकोत्तर मिट न सकी अंतहीन भूखअभ्यंतर से मेरे अभ्यंतर से बार बार पुनःजन्म हुआचाहिये मुझकोभरपाईतृप्त भरपाई संकीर्ण से अनंततक की प्यास पुनः बुझानी है कालविजयी दशाओं मेंअक्सर भूखा थाउस रोज़ और प्यासा था जब फूटती थीएक...

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परमानन्द रमन की चार कविताएं

परमानन्द रमन जन्मतिथि : 20/12/1983 जन्म-स्थान : जमशेदपुर(तात्कालीन बिहार, वर्तमान झारखण्ड) ग्राम: करहसी, जिला- रोहतास (बिहार) आरंभिक शिक्षा बारहवीं तक जमशेदपुर में ही, तत्पश्चात कला शिक्षा में स्नातक के लिये इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय के मूर्तिकला विभाग में दाखिला। स्नातकोत्तर की शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय  के...

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दीप्ति शर्मा की पांच कविताएं

दीप्ति शर्मा दिल्ली काले तिल वाली लड़की कल तुम जिससे मिलीं फोन आया था वहाँ से तुम तिल भूल आयी हो सुनो लडकियो! ये तिल बहुत आवारा होते हैं चन्द्र ग्रहण की तरह काला तिल आनाज नहीं होता ये पूरी दुनिया होता है जिससे मिलो सँभल कर मिलो ये मिलना...

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डॉ निधि अग्रवाल की तीन कविताएं

डॉ निधि  अग्रवाल मूल निवासी    गाज़ियाबाद उत्तर प्रदेश डॉक्टर (पैथोलोजिस्ट) झाँसी उत्तर प्रदेश तीन तलाक केवल तुम्हें ही नहीं है.. तलाक का हक, मैंने भी दिया है तलाक… उन अवांछित-सी कामनाओं को, जो मुझे मेरे अस्तित्व का हर पल अहसास कराती हैं, जब मैं झुक जाती हूँ तुम्हारे निर्णयों...

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जया यशदीप घिल्डियाल की तीन कविताएं

जया यशदीप घिल्डियाल मूल निवासी – पौड़ी गढ़वाल ,उत्तराखंड स्नातकोत्तर रसायन विज्ञान रसायन विज्ञान अध्यापिका पुणे ,महाराष्ट्र कातिलों के बच्चे कातिलों  के बच्चे  उम्र  भर कत्ल  होते हैं सहम जाते लोकल अखबारों  से , खाकी वर्दी से दरवाज़े पर इक हल्की सी भी आहट दहला देती उन्हें घर में आँखों...