Category: कविता

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शुक्ला चौधुरी की 3 कविताएं

शुक्ला चौधुरी मां एक जब घर से अचानक गायब हो जाती थी मां पहले हम चावल के कनस्तर में झांकते फिर दाल मसाले के डिब्बे से पूछते तब भी अगर मां आवाज़ नहीं देती तब हम चूल्हे के पास खड़े हो जाते और जोर-जोर से रोते मां मां मां चूल्हे...

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डा.अमरजीत कौंके की 12 क्षणिकाएं

अमरजीत कौंके  1सुरमई संध्या कोहरी घास पर उस की आँखों में देखते  सोचा मैंने- अगर सारी जिंदगी यूँ ही गुज़रती तो बस क्षण भर की होती…. 2सुरमई संध्या को हरी घास पर उसके पास बैठे मैंने कहा उस से – कोई बात करो वह बोली -जब ख़ामोशी ख़ामोशी से संवाद कर रही होतो शब्दों को निरर्थक गँवाने का क्या...

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पल्लवी मुखर्जी की 6 कविताएं

पल्लवी मुखर्जी पिंजरा गहन सन्नाटा है यहाँ मत झाँको इस पिजंड़े के अंदर यहाँ कुलांचे भरती कोई हिरनी नहीं उछलेगी न ही दिखेगी…. दूर-दूर तक कोई हरीतिमा जिस पर छोटे-छोटे खरगोशों के नन्हें-नन्हें पाँव होते हैं और जाने कहाँ -कहाँ से आ जाती हैं अनगिनत चिड़ियाँ… जिनकी चहचहाहट से तुम...

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रोहित ठाकुर की 5 कविताएं

रोहित ठाकुर  आखिरी दिन    आखिरी दिन आखिरी दिन नहीं होता जैसे किसी टहनी के आखिरी छोर पर उगता है हरापन दिन की आखिरी छोर पर उगता है दूसरा दिन आज व्यस्त है शहर शहर की रोशनी जहाँ खत्म हो जाती है वहाँ जंगल शुरू होता है आज व्यस्त है...

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सुशान्त सुप्रिय की 5 कविताएं

सुशान्त सुप्रिय A-5001, गौड़ ग्रीन सिटी, वैभव खंड, इंदिरापुरम, ग़ाज़ियाबाद – 201014 ( उ.प्र. ) मो : 8512070086 ई-मेल : sushant1968@gmail.com बचपन  दशकों पहले एक बचपन था बचपन उल्लसित, किलकता हुआ सूरज, चाँद और सितारों के नीचे एक मासूम उपस्थिति बचपन चिड़िया का पंख था बचपन आकाश में शान से उड़ती रंगीन पतंगें थीं बचपन माँ का दुलार था बचपन पिता की गोद का प्यार था समय के साथ चिड़ियों के पंख कहीं खो गए सभी पतंगें कट-फट गईं माँ सितारों में जा छिपी पिता सूर्य में समा गए बचपन अब एक लुप्तप्राय जीव है जो केवल स्मृति के अजायबघर में पाया जाता है वह एक खो गई उम्र है जब क्षितिज संभावनाओं से भरा था एकदिन  एक दिन मैंने कैलेंडर से कहा — आज मैं मौजूद नहीं हूँ और अपने मन की करने लगा एक दिन मैंने कलाई-घड़ी से कहा — आज मैं मौजूद नहीं हूँ और खुद में खो गया एक दिन मैंने बटुए से कहा — आज मैं मौजूद नहीं हूँ और बाज़ार को अपने सपनों से निष्कासित कर दिया एक दिन मैंने आईने से कहा — आज मैं मौजूद नहीं हूँ और पूरे दिन उसकी शक्ल नहीं देखी एक दिन मैंने अपनी बनाईं...

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पल्लवी मुखर्जी की 5 कविताएं

पल्लवी मुखर्जी एक आओ सुनते है एक दूसरे की धड़कनों को धड़कनेंधड़कती हैं जैसेघड़ी की सुईटिक-टिक करती और ले जाती हैं हमेंं उम्र के उस दौर मेंजहाँ न मैं….मैं रहती हूँन तुम….तुम रहते हो हम एक हो जाते हैंउम्मीदों का हरापन लेकर  दो तुम एक पुल होजिस पर सेतमाम रिश्ते गुज़र रहे हैंधड़ाधड़ जैसे गुज़रती...

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पुष्कर बन्धु की 5 कविताएं

पुष्कर बन्धु काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक व परास्नातक ( हिन्दी साहित्य ) 2017 । सोशल मीडिया पर कविताओं का प्रकाशन । साहित्य , समाज और राजनीति में  गहरी रुचि । पता – हौसला सिंह लॉज, नसीरपुर, सुसुवाहि , हैदराबाद गेट , BHU चयन और प्रस्तुति : विहाग वैभव  ...

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नदी पर रोहित ठाकुर की 4 कविताएं

रोहित ठाकुर जन्म तिथि – 06/12/ 1978 शैक्षणिक योग्यता  –   परा-स्नातक राजनीति विज्ञान,विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित, विभिन्न कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ   वृत्ति  –   सिविल सेवा परीक्षा हेतु शिक्षण   रूचि : – हिन्दी-अंग्रेजी साहित्य अध्ययन  पत्राचार :- जयंती- प्रकाश बिल्डिंग, काली मंदिर रोड,संजय गांधी नगर, कंकड़बाग , पटना-800020, बिहार  मोबाइल...

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भास्कर चौधुरी की 10 कविताएं

1 माँ का आना माँ के आते ही मैं असहज हो जाता हूँ हो जाती है पत्नी असहज हम दोनों के कान खड़े छोटी-छोटी बातों को पकड़ लेने की क्षमता एक-ब-एक दुगुनी-तिगुनी हो जाती है   माँ के आते ही खुश हो जाती है हमारी चार साल की बिटिया वह...

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मनोज शर्मा की 2 कविताएं

मनोज शर्मा एक मेरा स्थिर समर्पण साध लो तुम अब नयी सुबह नया आगमन कारवां लिए बढ़ चले अब तुम बूंद नहीं वरन सतत् सत्य हो अनल से दहकते कर्मपथ पर बढ़ चलो तुम हर कदम राह से जोड़ता है तुम अस्थिर हो असहज हो रुको न! दूर कहीं क्षितिज...

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पंखुरी सिन्हा की 4 कविताएं

पंखुरी सिन्हा शिक्षा —एम ए, इतिहास, सनी बफैलो, 2008 पी जी डिप्लोमा, पत्रकारिता, S.I.J.C. पुणे, 1998 बी ए, ऑनर्स, इतिहास, इन्द्रप्रस्थ कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, 1996 अध्यवसाय—-BITV, और ‘The Pioneer’ में इंटर्नशिप, 1997-98 —- FTII में समाचार वाचन की ट्रेनिंग, 1997-98 —– राष्ट्रीय सहारा टीवी में पत्रकारिता, 1998—2000   प्रकाशन———हंस, वागर्थ,...

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विहाग वैभव की 5 कविताएं

विहाग वैभव शोध छात्र – काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) नया ज्ञानोदय , वागर्थ , आजकल , अदहन, सहित विभिन्न महत्वपूर्ण साहित्यिक पत्रिकाओं और ब्लॉगों में कविताएँ प्रकाशित । मोबाइल – 8858356891  1. हत्या-पुरस्कार के लिए प्रेस-विज्ञप्ति वे कि जिनकी आँखों में घृणा समुद्र सी फैली है अनंत नीली-काली जिनके हृदय...

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केशव शरण की 6 कविताएं

केशव शरण प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)सम्पर्कः एस 2/564 सिकरौलवाराणसी  221002मो.   9415295137 न संगीत, न फूल उसका हंसना याद आ रहा है संगीत का बिखरना...

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निशान्त की 8 कविताएं

निशान्त कविताओं का बांग्ला और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में अनुवाद। भारतीय ज्ञानपीठ की युवा पुरस्कार योजना के तहत पहला काव्य संग्रह ‘जवान होते हुए लड़के का कबूलनामा’ प्रकाशित उसके बाद राजकमल प्रकाशन से दूसरा काव्य संग्रह ‘जी हां, मैं लिख रहा हूं’ प्रकाशित पुरस्कार :  भारत भूषण अग्रवाल सम्मान,...

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भास्कर चौधुरी की पांच कविताएं

भास्कर चौधुरी 1 मनुष्य तुम्हारे चेहरे में जो उदासी का रंग है ऐसा बहुत कम होता है उन्हें जब मैं पढ़ पाता हूँ हाँ जो रंग खुशियों के संग हैं जो रंग ताज़ा हैं जो अभी फीके नहीं पड़े हैं अक़्सर मैं उन्हें ताड़ लेता हूँ .. ऐसा कब होगा...

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ज्योति साह की तीन कविताएं

ज्योति साह हिन्दी प्राध्यापिका रानीगंज, अररिया बिहार शहर के बीचों-बीचपहलेशहर में मैं थी,अब शहर मुझमें है, उनकी तमाम परेशानियों को समेटेसींझती/पकतीऔर उबलती हूँ, अभी उम्मीद के हर दरख्त बंद है शायद….., चलो फिरनिकलो घरों सेढूंढ लायें एक कतरा उम्मीद दरख्तों से अंगोछे में भर,डाल देंशहर के बीचों-बीचहर कोई नहाये/डूबे और इतराये, फिरखिलखिलाये बचपनमुस्कुराये बुढ़ापाऔर होश में हो ज़वानी।। कठपुतली बना के कठपुतली नचाते रहोरखो...

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शिवराम के की तीन कविताएं

शिवराम के ग्राम-कुसौली, पो-  नथईपुर, जिला –  भदोही, उत्तर प्रदेश, 221304 शिक्षा- एम.ए- अंग्रेजी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, (BHU) मोबाइल – +918826222604 ब्लॉग-   shivramkblog. wordpress.com प्रकाशित पुस्तक- Lamp Post And Other Poetry collection (अंग्रेजी में) विश्वविद्यालयी काव्य-प्रतियोगिता में पुरस्कृत व प्रकाशित । कुछ यादें कुछ यादें महफूज रहती हैं सांसों के साथ...

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नीरज द्विवेदी की तीन कविताएं

नीरज द्विवेदी  (१)  स्त्री विमर्श पर मेरे सारे तर्क,सारा ज्ञान,सारा पौरुष,चुक जाता हैशब्द टूटने लगते हैं..मै, निरूत्तरित.. आवाकतुम्हे देखने लगता हूँ…..जब तुम बड़ी सहजता से पूछ लेती हो,कि…”मै औरत हूँं,पर…. मै हूँ कौन ?? (२) इतिहास में तुम्हारे साथ सबसे बड़ा छल तब हुआ, जब समाज ने तुम्हे ‘देवी’ कहा… मैं, तुममें ढूढ़ता रहा..माँ, बहन प्रेयसी, पत्नी, सखा,और खुरचता...

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डॉ. सांत्वना श्रीकांत की 6 कविताएं

डॉ. सांत्वना श्रीकांत स्त्रीशिखर पर मिलूंगी मैं तुम्हें,विमुख तुम्हारे मोह से,प्रतिध्वनियों से तिरस्कृत नहीं,तुमको अविलंब समग्र समर्पण के लिए।मुक्त, बंधन इन शब्दों से परे, बुद्ध की मोक्ष प्राप्ति औरयशोधरा की विरह वेदना के शीर्ष पर स्थापित होगा शिखर।पहले चरण में-समर्पित करती हूं अपनी देह,जिसे तुम नहीं समझतेपुरुष होने के अहंकार में। दूसरे चरण में-समर्पित...

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डॉ विनीता राहुरिकर की दो कविताएं

  डॉ विनीता राहुरिकर M.Sc. botany, spec. Air microflora, plant pathology.M.A. drawing painting, हिंदीD.C.H.,  1. अब तक विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में 150 से अधिक रचनाओं का प्रकाशन। जिसमे से 62 कहानियां। 2. पराई ज़मीन पर उगे पेड़- कहानी संग्रह,ऊँचे दरख्तों की छाँव में- कविता संग्रहघर-आँगन, पुस्तक मित्र  बाल कथा संग्रहTwo loves of...