Category: कविता

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सिमन्तिनी रमेश वेलुस्कर की कविताएं

1. कठिनतम परिस्थितियों में जब मुट्ठी भर संवेदनशील लोग शर्म से गड़े जा रहे हैं पांच हज़ार बरसों में लगभग चौदह हज़ार युद्धों का इतिहास चीख़ चीख़ कर कह रहा है कोई राजा आज तक शर्म से नहीं मरा 2. चैत और फागुन के बीच के मौसम में जब चलती...

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डॉ शंभुनाथ की कविताएं

भूख पर 2 कविताएं भूख में सपने बहुत आते हैं भूख का नामोनिशान नहीं होताविज्ञापनों के संसार मेंमॉल में भी वह चर्चा के बाहर हैकंपनियों के व्यापार कोश में नहीं है यह शब्दबाहर है कैफे से संसद सेशिखर वार्ताओं से भी पूरी तरह बाहरभूख फैल रही है शहर-शहरभूख में फैल...

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केशव शरण की कविताएं

उत्तरोत्तर विकास सैकड़ों को डुबोया गया हज़ारों के विकास के लिए एक दिन हज़ारों भी डूब गये लाखों के विकास के लिए अब करोड़ों के विकास के लिए सोचा जा रहा है 2. कल कौन-से देवता का दिन? भरी कटोरियां और कलश लेकर मंदिर जाते हुए उसे देख रहे थे...

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डॉ कुन्दन सिंह की 5 कविताएं

शिकारी शहर शहर शिकारी हो गया हैमारता है झपट्टाऔर लील जाता हैगांव-गिरांव के लड़केकि गांव के गांववीरान पड़ते जा रहेबचे हैं बसबूढ़े निस्साहाय असमर्थखेत खलिहान से दुआर दलान तकपसरी पड़ी है चुप्पी ! शिकारी शहर ने कर लिया है रुखअब खुद ही गांव की ओरनये शिकार की तलाश मेंभूख बड़ी...

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अनामिका अनु की 10 कविताएं

1. तथाकथित प्रेम अलाप्पुझा रेलवे स्टेशन पर, ईएसआई अस्पताल के पीछे जो मंदिर है वहाँ मिलते हैं, फिर रेल पर चढ़कर दरवाजे पर खड़े होकर, हाथों में हाथ डालकर बस एक बार जोर से हँसेंगे, बस इतने से ही बहती हरियाली में बने ईंट और फूस के घरों से झाँकती...

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डॉ सुनील कुमार की 2 कविताएं

आग की खोज उन बस्तियों के लिए आग की खोज एक जुगुनू के द्वारा हुई इतना घुप्प अंधेरा था सदियों से एक जुगनू भी उन्हें विशालकाय सूरज सा लगने लगा उसे देख कर सदियों की अंधेरी बस्तियों को आग का एहसास हुआ उन्हें भी गर्माहट सी होने लगी विचारों की...

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राजेश ‘ललित’ की 8 क्षणिकाएं

बुढ़ापा  विभिन्न पत्र-पत्रिकओं ‘साहित्य कुंज’अविराम साहित्यिकी’ ‘प्रयास’  एवं ब्लाग्स साहित्यपीडिया,साहित्यनामा,अमर  उजाला हरियाणा प्रदीप,शाश्वत सृजन,आदि में  प्रकाशित रचनायें। इमेल:-sharmarajesh5627@yahoo.com Mobile:-9560604484

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राजेंद्र राजन की 5 कविताएं

राजेंद्र राजन हिन्दी के उन कवियों में शामिल हैं, जो प्रचार के शोरगुल से दूर रहकर चुपचाप बेहतर लिख रहे हैं। गूंगे वक्त को आवाज़ दे रहे हैं। उनकी कविताएं सच से मुंह नहीं मोड़ती बल्कि उससे टकराती है और समाज को सचेतन करती है। यहां प्रस्तुत उनकी कविताओं में...

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राहुल कुमार बोयल की 4 कविताएं

राहुल कुमार बोयल जन्म दिनांक- 23.06.1985 जन्म स्थान- जयपहाड़ी, जिला-झुन्झुनूं( राजस्थान) सम्प्रति- राजस्व विभाग में कार्मिक पुस्तकें- समय की नदी पर पुल नहीं होता (कविता संग्रह) नष्ट नहीं होगा प्रेम ( कविता संग्रह)मैं चाबियों से नहीं खुलता( काव्य-संग्रह)विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं यथा वागर्थ, सृजन सरोकार, किस्सा कोताह, कथा, दोआबा, हिन्दी जनचेतना, हस्ताक्षर...

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देवेश पथ सरिया की 3 कविताएं

देवेश पथ सरिया साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशन: वागर्थ, पाखी,  कथादेश, कथाक्रम, कादंबिनी, आजकल,  परिकथा, प्रगतिशील वसुधा, दोआबा, जनपथ, समावर्तन, आधारशिला, अक्षर पर्व, बया, बनास जन,  मंतव्य, कृति ओर,  शुक्रवार साहित्यिक वार्षिकी, ककसाड़, उम्मीद, परिंदे, कला समय, रेतपथ, पुष्पगंधा आदि पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित समाचार पत्रों में प्रकाशन: राजस्थान पत्रिका, दैनिक...

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कैलाश मनहर के दोहे

कैलाश मनहर आधी रोटी नभ में चमके, आधी मेरे पास | आधी रात राजधानी में, भूत कर रहे रास ||१|| आधी साँस अधूरे सपने,अधसुलगी-सी आग | आधी नींद अँधेरा गहरा, आधी मेरी जाग ||२|| आधी हिम्मत आधी दहशत,बातें आधमआध | आधे मन में आधी खुशियाँ, आधे हैं अपराध ||३|| आधी...

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केशव शरण की 2 कविताएं

केशव शरण प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)क़दम-क़दम ( चुनी हुई कविताएं ) न संगीत न फूल ( कविता संग्रह)गगन नीला धरा धानी नहीं है ( ग़ज़ल...

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श्रुति कुशवाहा की 5 कविताएं

श्रुति कुशवाहा जन्म :       13/02/1978  भोपाल, मध्यप्रदेश शिक्षा :       पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विवि. भोपाल) प्रकाशन:           कविता संग्रह “कशमकश” वर्ष 2016, साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग, भोपाल के सहयोग से प्रकाशित वागर्थ, कथादेश, कादंबिनी, उद्भावना, परिकथा, समरलोक एवं जनसत्ता, दैनिक भास्कर, पत्रिका, नई...

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धर्मपाल महेेंद्र जैन की 4 कविताएं

धर्मपाल महेंद्र जैन ईमेल : dharmtoronto@gmail.com      फ़ोन : + 416 225 2415 सम्पर्क : 1512-17 Anndale Drive, Toronto M2N2W7, Canada संविधान ना बाँचा, ना देखा, सिर्फ सुना है संविधान के बारे में पटवारी साब जानते हैं खसरा-खतौनी दरोगा साब जानते हैं गाली-गलौच कंपाउंडर साब जानते हैं दस रुपये वाली दवा मास्साब को मालूम है...

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संजीव ठाकुर की बाल कविताएं

संजीव ठाकुर ताल      पंखा चलता हन-हन–हन हवा निकलती सन-सन–सन । टिक-टिक टिक–टिक चले घड़ी ठक-ठक –ठक–ठक करे छड़ी । बूंदें गिरतीं टिप–टिप–टिप आँधी आती हिप–हिप–हिप । फू–फू–फू फुफकारे नाग धू–धू-धू जल जाए आग । कोयल बोले कुहू-कुहू पपीहा बोले पिऊ-पिऊ । धिनक-धिनक–धिन बाजे ताल लहर–लहर लहराए बाल ।...

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संजय शांडिल्य की प्रेम कविताएँ

संजय शांडिल्य जन्म : 15 अगस्त, 1970 |स्थान : जढ़ुआ बाजार, हाजीपुर |                     शिक्षा : स्नातकोत्तर (प्राणीशास्त्र) | वृत्ति : अध्यापन | रंगकर्म से गहरा जुड़ाव | बचपन और किशोरावस्था में कई नाटकों में अभिनय | प्रकाशन : कविताएँ हिंदी की...

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कैलाश सत्यार्थी की कविता ‘तब हम होली खेलेंगे’

कैलाश सत्यार्थी कवि नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित मशहूर बाल अधिकार कार्यकर्ता हैं हर साल होली पर उगते थे इंद्रधनुष दिल खोल कर लुटाते थे रंग मैं उन्हीं रंगों से सराबोर होकर तरबतर कर डालता था तुम्हें भी तब हम एक हो जाते थे अपनी बाहरी और भीतरी पहचानें भूल...

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निर्मल गुप्त की कविता ‘सदाकत का शिनाख्ती कार्ड’

निर्मल गुप्त सदाकत देखते ही देखते चौरसी* से कुरेद लेता सख्त से सख्त काठ पर खूबसूरत बेल बूटे , नाचता हुआ मोर छायादार पेड़ ,फुदकती गिलहरी , उड़ती तितली खिला हुआ फूल , खपरेल वाला सुंदर मकान मटकी लिए जाती पतली कमर वाली षोडशी. उसे मिला हुआ था सरकार बहादुर से माकूल...

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विवेक आसरी की 6 कविताएं

विवेक आसरी विवेक आसरी कर्म से पत्रकार. मन से यायावर. और वचन से लेखक. वह 15 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं. भारत, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के मीडिया संस्थानों में ऑनलाइन, रेडियो और टीवी पत्रकारिता कर चुके हैं. फिलहाल ऑस्ट्रेलिया के एसबीएस रेडियो की हिंदी सेवा के लिए बतौर प्रोड्यूसर काम कर...