Category: ग़ज़ल

दिलीप कुमार की 6 ग़ज़लें 0

दिलीप कुमार की 6 ग़ज़लें

दिलीप कुमार जन्म तिथि : 28 अक्टूबर 1974।मूल निवास : बलिया,  रूपौली, पूर्णिया, बिहार संप्रति- शाखा प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक               वास्को दा गामा मुख्य शाखा, गोवा।संपर्क : 8806660113 एक   मुझे खुद की नहीं है  फिकर अब तो ।कोई करता नहीं मेरा जिकर अब तो।।सिर्फ रस्ता ही है...

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मनी यादव की 4 ग़ज़लें

मनी यादव  एक शाम    कोयल   और   हवा   के    साथ   गाई  मैंने ज़िन्दगी   के   साज़   पर   जो  धुन   बनाई     मैंने कैसे     लफ़्ज़े-बेवफ़ा    लायें    ग़ज़ल   में  अपनी बेवफ़ाई      की       शमा      ख़ुद    जलाई     मैंने छोड़कर  घर  कुछ  कमाने  के  लिये  निकला तब ज़ीस्त     बच्चे     के     कटोरे    से   कमाई    मैंने आज    तेरी   ज़ुल्फ़    क़ाबू  ...

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नूर मुहम्मद ‘नूर’ के ग़ज़ल संग्रह ‘सफ़र कठिन है’ से 5 ग़ज़लें

नूर मुहम्मद ‘नूर’ जन्म :  17 अगस्त 1952, महसोन, कारखाना मछुआवां, कुशीनगर (उ.प्र) प्रकाशित कृतियां :  ताकि खिलखिलाती रहे पृथ्वी (कविता संग्रह), आवाज़ का चेहरा (कहानी संग्रह), दूर तक सहराओं में (ग़ज़ल संग्रह), सफ़र कठिन है (ग़ज़ल संग्रह) पत्र-पत्रिकाओं में नाटक छोड़कर सभी विधाओं में लेखन। अगस्त 2012 में दक्षिण...

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आरती आलोक वर्मा की एक ग़ज़ल

आरती आलोक वर्मा आंखों का दरिया छुपाने के लिये मुस्कुराते  हैं      जमाने  के लिये ।। बात दिल की अब समझता है कौन जायें किसको गम दिखाने के लिये ।। हां हमे मजबूत होना ही पड़ा राह से पत्थर  हटाने के लिये  ।। सर झुकाना मंजूर कर “आरती ” फ़ासले दिल...

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सुभाष पाठक ‘जिया’ की 5 ग़ज़लें

सुभाष पाठक ‘जिया’ जन्मतिथि- 15 सितम्बर 1990 शिक्षा-  बी एस सी,बी एड, प्रकाशन :  कविताकोश, रेख़्ता, पर प्रकाशन, कादम्बिनी, ग़ज़ल के बहाने, दो दर्जन से अधिक ,देश की तमाम साहितियिक पत्रिकाओं ग़ज़ल विशेषांकों में ग़ज़लें प्रकाशित, आकाशवाणी शिवपुरी से समय समय पर काव्य पाठ, अखिल भारतीय मुशायरों कवि सम्मेलनों में...

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डी एम मिश्र की 5 ग़ज़लें

1. दूर से बातें करो अब वो विधायक है कम मुलाकातें करो अब वो विधायक है। खुद अँधेरे में रहो उसके लिए लेकिन चॉदनी रातें करो अब वो विधायक है। नोट की माला पिन्हाओ, थैलियाँ लाओ धन की बरसातें करो अब वो विधायक है। जन्मदिन उसका मनाओ खुद रहो भूखे...

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केशव शरण की 21 ग़ज़लों की श्रृंखला

केशव शरण प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)सम्पर्कः एस 2/564 सिकरौलवाराणसी  221002मो.   94152951371.क्यों नसीबों की बात करते हैंजब ग़रीबों की बात करते हैं फिर कहेंगे हमें उठाने...

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अकेले हैं तो क्या ग़म है!

संजय स्वतंत्र उस दिन अस्पताल के इमरजंसी वार्ड में वे व्हीलचेयर पर दिखे। तबीयत बहुत खराब थी उनकी। शायद उन्हें नौकर लेकर वहां आया था। मैंने उससे पूछा, ‘कोई साथ नहीं आया?’ उसका जवाब था, ‘घर में बेटे-बहू हैं, लेकिन किसी को फुर्सत नहीं।’ उसकी बात सुन कर मैं सन्न...

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मनी यादव की दो ग़ज़लें

  मनी यादव एक मौत को अपना आशना रक्खें ज़िन्दगी से भी वास्ता रक्खें चाँद आ तो गया मेरे घर में चाँदनी इसकी हम कहाँ रक्खें शाइरी सुनना कोई खेल नहीं शेर पर ही मुलाहिज़ा रक्खें प्यास दरिया बुझा नही सकता इसलिए पास में कुआँ रक्खें पेड़ तहज़ीब का पड़ा...

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अनिरुद्ध सिन्हा की छह ग़ज़लें

  अनिरुद्ध सिन्हा नाम –अनिरुद्ध सिन्हा जन्म -2 मई 1957 शिक्षा –स्नातकोत्तर प्रकाशित कृतियाँ ——————– -(1)नया साल (2)दहेज (कविता-संग्रह ) (3)और वे चुप हो गए (कहानी-संग्रह)  (4)तिनके भी डराते हैं  (5)तपिश  (6)तमाशा (7)तड़प  (8)तो ग़लत क्या है (ग़ज़ल-संग्रह) (9)हिन्दी-ग़ज़ल सौंदर्य और यथार्थ (10)हिन्दी-ग़ज़ल का यथार्थवादी दर्शन(11)उद्भ्रांत की ग़ज़लों का सौंदर्यात्मक...

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मनी यादव की एक ग़ज़ल

  मनी यादव अश्क़ जब आँख में आ जाते हैं हम इक नई  ग़ज़ल सुनाते हैंं ताइरे दिल बंधा है यादों से पर परिंदे के फड़फड़ाते हैंं यूँ कलाई पकड़ तो ली तुमने शर्म से रोयें मुस्कराते हैंं बर्क़ की चीख़ सुनके बादल भी उसके हालात पर रो जाते हैंं...

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डॉ डी एम मिश्र की पांच ग़ज़लें

डॉ डी एम मिश्र उ0प्र0 के सुलतानपुर जनपद के एक छोटे से गाँव मरखापुर में एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में जन्म । शिक्षा -पीएच डी ,ज्‍योतिषरत्‍न। गाजियाबाद के एक पोस्ट ग्रेजुएट कालेज में कुछ समय तक अघ्यापन । पुनश्च बैंक में सेवा और वरिष्ठ -प्रबंधक के पद से कार्यमुक्त...

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मनी यादव की दो ग़ज़लें

एक तल्खियां खून की विरासत है छोड़ ना यार ये सियासत है मुफ़लिसी जा रही है महफ़िल में मुफ़लिसी को कफ़न की दावत है हुस्न तेरा मिटा के दम लूंगा सांस तुझसे मेरी बगावत है वाकया ये समझ नहीं आता रात को दिन से क्यों शिकायत है भागता क्यों है...

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मनी यादव की एक ग़ज़ल

टूटे मकाँ में रहता तो गुलदान बुरा है ग़ुरबत में मुहब्बत का भी अंजाम बुरा है भूखा था वो मासूम जिसे चोर कहा तुमने खुद का तेरा भी झांक गिरेबान बुरा है था आसरा मुझको भी बहुत अच्छे दिनों का अच्छा भी सियासत में तो पैगाम बुरा है कोशिश न...

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मनी यादव की चार ग़जलें

एक ख़ुशबू तेरी पयाम लायी है फिर फ़िज़ा में बहार आयी है बेवफ़ा मैं नहीं, न ही तुम हो फ़ितरते इश्क़ बेवफ़ाई है इत्र चुपके से कान में बोला खुशबू दिलदार से चुरायी है कोई मंज़र नहीं रहा ग़म का आज शायद वो मुस्करायी है पहना ज्यों ही लिबास यादों...

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अनिरुद्ध सिन्हा की चार ग़ज़लें

एक जाँ बदन से जुदा  है रहने दे ये जो मुझसे खफ़ा है रहने दे एक न एक रोज़ हादसा है यहाँ अब वहाँ क्या हुआ है रहने  दे छोड़ अब  हुस्न-इश्क़  की बातें ये  फसाना  सुना  है  रहने दे अपनी सूरत से मत डरा मुझको सामने  आईना   है  रहने ...

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नूर मुहम्मद ‘नूर’ की दो भोजपुरी ग़ज़लें

एक आदमिन के ढ़हान, चारू ओर उठि रहल बा मकान चारू ओर एगो बस जी रहल बा नेतवे भर मू  रहल  बा  किसान चारू ओर अब के पोछी हो लोर, ए, दादा रो रहल, समबिधान चारु ओर ई अन्हरिया, बड़ा पुरनिया  हो कब ले  होई  बिहान चारू ओर जे बा...

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अजमेर अंसारी ‘कशिश’ की एक ग़ज़ल

पस्ती में जिसने माना के तदबीर इश्क़ है पहुँचा बुलन्दियों पे तो तक़दीर इश्क़ है ! क्यों देखूँ इस जहान कीं रंगीनियाँ तमाम मेरी नज़र में यार की तस्वीर इश्क़ है हर लम्हा आता–जाता बताता है दोस्तो दुनिया है एक ख़्वाब तो ताबीर इश्क़ है मुझ सा कोई गनी नहीं...

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नूर मुहम्मद नूर की पांच ग़ज़लें

एक क्या पता क्यों खुशी सी होती है ज़िन्दगी ज़िन्दगी सी होती है ऐ अंधेरो! अभी जरा ठहरो मुझमें कुछ रौशनी सी होती है किससे पुछूं, कोई बतलाए क्यों? दोस्ती दुश्मनी सी होती है दिल भी घबरा रहा है हैरत से उसमें कुछ आशिक़ी सी होती है कौन बतालाए शायरी...

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शशांक मिश्रा की एक ग़ज़ल

वो क्या लोग थे साक़ी, क्या अजब मंज़र था। वही मुस्कुरा के मिले जिनके हाथों में खंजर था। राज कितने मुस्कुराते लबों ने छुपा लिए। किसे कब पता था कि आँखों में समंदर था। साक़ी दिखाते भी तो कैसे दिखाते तुझको। घाव जो भी था सीने के अंदर था। नशा-ए-शोहरत...