ज्योति साह की तीन कविताएं

ज्योति साह हिन्दी प्राध्यापिका रानीगंज, अररिया बिहार शहर के बीचों-बीचपहलेशहर में मैं थी,अब शहर मुझमें है, उनकी तमाम परेशानियों को समेटेसींझती/पकतीऔर उबलती हूँ, अभी

शिवराम के की तीन कविताएं

शिवराम के ग्राम-कुसौली, पो-  नथईपुर, जिला –  भदोही, उत्तर प्रदेश, 221304 शिक्षा- एम.ए- अंग्रेजी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, (BHU) मोबाइल – +918826222604

नीरज द्विवेदी की तीन कविताएं

नीरज द्विवेदी  (१)  स्त्री विमर्श पर मेरे सारे तर्क,सारा ज्ञान,सारा पौरुष,चुक जाता हैशब्द टूटने लगते हैं..मै, निरूत्तरित.. आवाकतुम्हे देखने लगता हूँ…..जब तुम

डॉ. सांत्वना श्रीकांत की 6 कविताएं

डॉ. सांत्वना श्रीकांत स्त्रीशिखर पर मिलूंगी मैं तुम्हें,विमुख तुम्हारे मोह से,प्रतिध्वनियों से तिरस्कृत नहीं,तुमको अविलंब समग्र समर्पण के लिए।मुक्त, बंधन इन

डॉ सजल प्रसाद की कविता ‘इंकलाब’

  डॉ सजल प्रसाद शिक्षा- एम.ए.(हिन्दी), पी-एच.डी.लेखन – ‘अज्ञेय और उनके उपन्यास’ पुस्तक प्रकाशित। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में

पल्लवी मुखर्जी की चार कविताएं

  पल्लवी मुखर्जी जन्म- 26 नवंबर, 1967 रामानुजगंज,सरगुजा,छत्तीसगढ़शिक्षा- बी.एएकइस पूरे प्रकरण मेंवे दोनों साक्षी थेपर हर बार तुमजलील होती रहीऔर

परितोष कुमार ‘पीयूष’ की दो कविताएं

  परितोष कुमार ‘पीयूष’ इस समय के हत्यारे! हत्यारे अब बुद्धिजीवी होते हैंहत्यारे अब शिक्षित होते हैंहत्यारे अब रक्षक होते हैं हत्यारे

आचार्य बलवन्त का गीत ‘बेटी’

  आचार्य बलवन्त विभागाध्यक्ष हिंदी कमला कॉलेज ऑफ  मैनेजमेंट स्टडीस 450, ओ.टी.सी.रोड,  कॉटनपेट,  बेंगलूर-560053 (कर्नाटक) मो. 91-9844558064 , 7337810240 Email- balwant.acharya @gmail.com बेटी चेहरे की मुस्कान है

अनुपम निशान्त की चार कविताएं

  अनुपम निशान्त चुनार (मिर्जापुर) में जन्म। काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से पत्रकारिता में परास्नातक। देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों

संगीता गांधी की कविता ‘शाब्दिक जुलाब’

संगीता गांधी वो लिखते हैं बहुत लिखते हैं लेखन से क्रान्ति उद्घोष करते हैं कल स्वयं क्रांति ने पूछा हे लेखक शिरोमणि चलो जो लिखते