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डी एम मिश्र की 5 ग़ज़लें

1. दूर से बातें करो अब वो विधायक है कम मुलाकातें करो अब वो विधायक है। खुद अँधेरे में रहो उसके लिए लेकिन चॉदनी रातें करो अब वो विधायक है। नोट की माला पिन्हाओ, थैलियाँ लाओ धन की बरसातें करो अब वो विधायक है। जन्मदिन उसका मनाओ खुद रहो भूखे...

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मिहिर कुमार की 7 कविताएं

एक मत पूछो कि कौन हो तुम मेरे मन का मौन हो तुम मेरी ताकत मेरा ख्वाब हो तुम खुशबू से भीना अहसास हो तुम दूर हो के भी सबसे पास हो तुम घुप्प अंधेरे में चांद बन के मेरे मन के आसमान में चमकती हो तुम रात भर ओस...