राजेंद्र राजन की 3 कविताएं

राजेंद्र राजन

  1. बुखार पर्व

जो फेंक दिए गए थे

इतिहास के कूड़ेदान में

आज वे घूम रहे हैं दल के दल

बजा रहे हैं धर्म का बाजा

हर सड़क हर गली में

इतने जोर से कि बहरे हो जाएं कान

सुनाई न दे पड़ोस का चीखना

अपनी ही आवाज़।

उनकी खुशी का ठिकाना नहीं

कि सबकी हड्डियों में फैल गया है

उनका लाया हुआ बुखार

आंखें जलती रहती हैं घृणा की पीड़ा से

ठीक से दिखती नहीं कोई भी चीज़।

दवा खरीदने निकला आदमी

अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए चिंतित नहीं

परीक्षा के विषय में सोचते नहीं परीक्षार्थी

दर्जी को सिल रही कमीज का ख्याल नहीं

सब सोचते हैं और सोचते रहते हैं

चोरी से चिपकाए गए एक पोस्टर के विषय में

फिर कंपकंपाते उबलने लगते हैं

आस्था के सबसे ऊंचे तापमान पर

अपनी इस सफलता से अभिभूत हैं वे

कि जब वे कहते हैं संकट में है धर्म

तब कोई नहीं पूछता

रोटी और इंसाफ का सवाल

जो फेंक दिए गए थे इतिहास के कूड़ेदान में

आज वे गर्वोन्मत्त हैं विजेताओं की तरह

कि उन्होंने फतह कर लिया है इस देश को

यहां ईश्वर भी हिल नही सकता

उनकी बताई हुई जगह से

बिना उनसे पूछे।

  1. इतिहास में जगह

वे हर वक्त पिले रहते हैं

इतिहास में अपनी जगह बनाने में

सिर्फ उन्हें मालूम है  

कितनी जगह है इतिहास में

शायद इसीलिए वे एक दूसरे को

धकियाते रहते हैं हर वक्त

उनकी धक्कामुक्की

मुक्कामुक्की से बनता है

उनका इतिहास

इस प्रकार

इतिहास में अपनी जगह बना लेने के बाद

वे तय करते हैं

इतिहास में दूसरों की जगह

जो इतिहास में

उनकी बताई हुई जगह पर

रहने को राजी नहीं होते

उन्हें वो रह-रह कर

इतिहास से बाहर कर देने की       

धमकियां देते हैं।

उनकी धमकियों का असर होता है

तभी तो

इतिहास में उचित स्थान पाने को इच्छुक

बहुत से लोग

जहां कर दिया जाता है

वहीं बैठे रहते हैं

कभी उठकर खड़े नहीं होते।

  1. बहस में अपराजेय

वे कभी बहस नहीं करते

या फिर हर वक्त बहस करते हैं

वे हमेशा एक ही बात पर बहस करते हैं

या फिर बहुत सी बातों पर बहस करते हैं

एक ही समय

वे बहस को

कभी निष्कर्ष की तरफ नहीं ले जाते

वे निष्कर्ष लेकर आते हैं

और बहस करते हैं

जब वे बहस करते हैं

तब सुनते नहीं कुछ भी

कोई हरा नहीं सकता उन्हें बहस में।

———

कविता संग्रह : बामियान में बुद्ध

कवि : राजेंद्र राजन

प्रकाशक : साहित्य भंडार, इलाहाबाद

मूल्य : 250 रुपए

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1 Response

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    subject but generally people don’t speak about
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