एंटन चेखव की कहानी ‘एक कलाकृति’

सुशान्त सुप्रिय
नाम : सुशांत सुप्रिय
जन्म : 28 मार्च , 1968
शिक्षा : एम.ए.(अंग्रेज़ी ), एम . ए.  ( भाषा विज्ञान ) : अमृतसर ( पंजाब ) ,  दिल्ली में 
प्रकाशित कृतियाँ :
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हत्यारे ( 2010 ) , हे राम ( 2013 ) , दलदल ( 2015 ) , ग़ौरतलब कहानियाँ
( 2017 ) , पिता के नाम ( 2017 , मैं कैसे हँसूँ ( 2019 ) : छह कथासंग्रह 
इस रूट की सभी लाइनें व्यस्त हैं ( 2015 ) , अयोध्या से गुजरात तक
( 2017 ) , कुछ समुदाय हुआ करते हैं   
( 2019 ) : तीन काव्यसंग्रह 
विश्व की चर्चित कहानियाँ ( 2017 ) , विश्व की श्रेष्ठ कहानियाँ ( 2017 ) , विश्व की कालजयी कहानियाँ ( 2017) : तीन अनूदित कथासंग्रह 
सम्मान :
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भाषा विभाग ( पंजाब ) तथा  प्रकाशन विभाग ( भारत सरकार ) द्वारा रचनाएँ  पुरस्कृत  कमलेश्वरस्मृति ( कथाबिंबकहानी प्रतियोगिता ( मुंबईमें लगातार दो वर्ष प्रथम पुरस्कार  स्टोरीमिरर.कॉम कथा-प्रतियोगिता , 2016  में कहानी पुरस्कृत साहित्य में अवदान के लिए साहित्यसभा , कैथल ( हरियाणाद्वारा 2017 में सम्मानित 
अन्य प्राप्तियाँ :
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कहानी ‘ दुमदार जी की दुम पर प्रतिष्ठित हिंदी  मराठी फ़िल्म निर्देशक विनय धूमले जी हिंदी फ़िल्म बना रहे हैं ।
# सितम्बर-अंत , 2018 में इंदौर में हुए एकल नाट्य प्रतियोगिता में सूत्रधार संस्था द्वारा मोहन जोशी नाम से मंचित की गई मेरी कहानी ‘ हे राम ‘ को प्रथम पुरस्कार मिला । नाट्य-प्रेमियों की माँग पर इसका कई बार मंचन किया गया ।
# पौंडिचेरी विश्वविद्यालय के Department of Performing Arts ने मेरी कहानी ‘ एक दिन अचानक ‘ के नाट्य-रूपांतर का 4 अगस्त व 7 अगस्त , 2018 को मंचन किया ।
# पीपल्स थिएटर ग्रुप के श्री निलय रॉय जी ने हिंदी अकादमी , दिल्ली के सौजन्य से मेरी कहानी “ खोया हुआ आदमी “ का मंचन 7 फ़रवरी , 2019 को दिल्ली के प्यारे लाल भवन में किया ।
कई कहानियाँ  कविताएँ अंग्रेज़ी , उर्दू , नेपाली , पंजाबीसिंधी , उड़ियामराठीअसमिया , कन्नड़ , तेलुगु  मलयालम आदि भाषाओं में अनूदित  प्रकाशित  कहानी ” हे राम ! ” केरल केकलडी वि.वि. ( कोच्चि ) के एम.. ( गाँधी अध्ययन ) पाठ्यक्रम में शामिल  कहानी ” खोया हुआ आदमी ”  महाराष्ट्र स्कूल शिक्षा बोर्ड की  कक्षा दस के पाठ्यक्रम में शामिल  कहानी ” एक हिला हुआ आदमी ” महाराष्ट्र स्कूल  शिक्षा बोर्ड की ही कक्षा नौ के पाठ्यक्रम में शामिल  कहानी ” पिता के नाम ”  मध्यप्रदेश  हरियाणा के स्कूलों के कक्षा सात के पाठ्यक्रम में शामिल  कविताएँ पुणेविविके बी.( द्वितीय वर्ष ) के पाठ्यक्रम में शामिल  कहानियों पर आगरा विवि. , कुरुक्षेत्र विवि. , पटियाला विवि. ,  गुरु नानक देव विवि. , अमृतसर आदि के हिंदी विभागों मेंशोधार्थियों द्वारा शोधकार्य 
आकाशवाणी , दिल्ली से कई बार कविता  कहानीपाठ प्रसारित 
लोक सभा टी.वीके ”  साहित्य संसार ” कार्यक्रम में जीवन  लेखन सम्बन्धी इंटरव्यू प्रसारित 
अंग्रेज़ी  पंजाबी में भी लेखन  प्रकाशन  अंग्रेज़ी में काव्यसंग्रह ‘ इन गाँधीज़ कंट्री ‘  प्रकाशित  अंग्रेज़ी कथासंग्रह ‘  फ़िफ़्थ डायरेक्शन ‘  प्रकाशनाधीन 
लेखन के अतिरिक्त स्केचिंग , गायन , शतरंज  टेबलटेनिस का शौक़ 
संप्रति : लोक सभा सचिवालय , नई दिल्ली में अधिकारी 
मेल : sushant1968@ gmail.com
मोबाइल : 8512070086
पता: A-5001,
गौड़ ग्रीन सिटी ,
वैभव खंड ,
इंदिरापुरम ,
ग़ाज़ियाबाद – 201014
प्र. )

( रूसी कहानी )

अनुवाद : सुशांत सुप्रिय

साशा स्मिरनोव अपनी माँ का इकलौता बेटा था । उसने वित्तीय ख़बरों से भरे 223 नम्बर के अखबार में लिपटी कोई चीज़ अपने बग़ल में दबा रखी थी । जब वह डॉ. कोशेलकोव के चिकित्सालय में पहुँचा , तब वह बेहद भावुक लग रहा था ।

” आओ , प्यारे ! ” डॉक्टर उसे देखते ही बोला । ” बताओ , अब तुम कैसा महसूस कर रहे हो ? तुम मेरे लिए क्या अच्छी  ख़बर लाए हो ? “

साशा ने पलकें झपकाईं , अपने हाथ को अपने सीने पर रखा और उत्तेजित स्वर में बोला , ” श्री इवान निकौलेविच , माँ ने आपको ‘ नमस्कार ‘ और ‘ धन्यवाद ‘ कहा है … मैं अपनी माँ का इकलौता बेटा हूँ और आपने मेरी जान बचाई है … एक ख़तरनाक बीमारी के चंगुल से आप मुझे सकुशल बचा लाए हैं और … हम नहीं जानते कि आपका शुक्रिया कैसे अदा करें । “

” क्या बेकार की बात है , लड़के ! ” डॉक्टर बेहद ख़ुश होते हुए बोला । ” मैंने तो केवल वही किया जो मेरी जगह कोई भी और डॉक्टर करता । “

” मैं अपनी माँ का इकलौता बेटा हूँ … हम ग़रीब लोग हैं और आपके इलाज की क़ीमत अदा नहीं कर सकते हैं । मैं शर्मसार हूँ , डॉक्टर साहब , हालाँकि माँ और मैं … अपनी माँ का इकलौता बेटा – हम आपसे अर्ज़ करते हैं कि आभारस्वरूप आप यह कलाकृति ग्रहण करें … यह बेहद क़ीमती है … एक प्राचीन कांस्य-कलाकृति … एक दुर्लभ चीज़ । “

” तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए ! ” डॉक्टर ने भौंहें चढ़ाते हुए कहा । ” तुम मुझे यह क्यों दे रहे हो ? “

” नहीं , कृपया इसे अस्वीकार नहीं करें , ” साशा अख़बार में लिपटी उस कलाकृति को बाहर निकालते हुए बोलता रहा , ” यदि आप इसे लेने से मना करेंगे तो मेरी माँ और मुझे आहत कर देंगे … यह बहुत बढ़िया चीज़ है

… एक प्राचीन कांस्य कलाकृति … मेरे स्वर्गीय पिता इसे हमारे लिए छोड़ गए थे और हमने इसे एक  बेशक़ीमती  स्मृति-चिह्न के रूप में अपने पास रखा हुआ है । मेरे पिता प्राचीन कलाकृतियों को ख़रीद कर उन्हें क़द्रदानों को बेचा करते थे … अब माँ और मैं यह छोटा-सा कारोबार सँभालते हैं । “

साशा ने लिपटा हुआ अख़बार हटा कर कलाकृति को गम्भीरतापूर्वक मेज़ पर रख दिया । वह कलात्मक कारीगरी से युक्त पुराने कांस्य का एक मोमबत्तियाँ रखने वाला स्टैंड था । उस दीपाधार परहव्वा की वेश-भूषा में दो युवतियों की मूर्तियाँ बनी थीं । उनकी भाव-भंगिमा ऐसी थी जिसे बयान करने का न तो मुझमें साहस है , न ही मेरा वैसा स्वभाव है । दोनों युवतियाँ  बड़ी अदा और नखरे से मुस्करा  रही  थीं ,  और उन्हें देखकर ऐसा लगता था कि यदि उन्हें  मोमबत्तियाँ रखने वाली उस कलाकृति का आधार बनने के काम से मुक्त कर दिया जाता , तो वे वहाँ से  उतर कर ऐसे लाम्पट्य में मग्न हो जातीं , जिसकी कल्पना करना भी पाठक के लिए अशोभनीय होगा ।

तोहफ़े को देखते हुए डॉक्टर ने धीरे से अपना सिर खुजलाया और अपना गला साफ़ किया ।

” हाँ , यह वाक़ई बढ़िया चीज़ है , ” वह बुदबुदाया , ” लेकिन मैं इसे कैसे बयान करूँ ? … यह … ह्म्म … पारिवारिक माहौल के लिए नहीं बना है । इन मूर्तियों से कामुक नग्नता झलक रही है ,  बल्किउससे भी कुछ ज़्यादा … । “

” क्या मतलब ? “

” मिथकीय प्रलोभक सर्प स्वयं इससे बुरी कोई चीज़ नहीं गढ़ सकता था … यदि मैं मायाजाल से भरी ऐसी कोई चीज़ अपनी मेज़ पर रखूँगा तो यह पूरे घर का माहौल ख़राब कर देगी । “

” कला को देखने का यह आपका बड़ा अजीब नज़रिया है , डॉक्टर साहब ! ” साशा नाराज़ होता हुआ बोला , ” यह तो एक कलाकृति मात्र है । आप इसे ध्यान से देखिए । इस चीज़ में इतना सौंदर्य और लालित्य है कि यह आपकी आत्मा को श्रद्धा से भर देती है और इसे देखकर आपको अपना गला रुँधता-सा महसूस होता है । जब कोई इतनी सुंदर कलाकृति देखता है तो वह सभी सांसारिक चीज़ों कोभूल जाता है … देखिए तो सही , इसमें कितनी गति है , इसका अपना ही वातावरण है , इसकी अपनी ही मुद्रा है ! “

” प्यारे लड़के , यह सब मैं अच्छी तरह समझता हूँ , ” डॉक्टर ने उसे बीच में ही टोकते हुए कहा , ” लेकिन तुम जानते हो कि मैं एक पारिवारिक आदमी हूँ । मेरे बच्चे यहाँ आते रहते हैं । महिलाएँ यहाँ आती रहती हैं ।”

” ज़ाहिर है , यदि आप इस कलाकृति को भीड़ के नज़रिए से देखेंगे , ” साशा ने कहा , ” तो यह  आपको  किसी विशेष रंग में रंगी नज़र आएगी … किंतु डॉक्टर साहब , आप भीड़ से ऊपर उठिए । इसे लेने से इंकार करके आप ख़ास तौर से मेरी माँ और मुझे आहत करेंगे । मैं अपनी माँ का इकलौता बेटा हूँ । आपने मेरा जीवन बचाया है … हम आपको अपनी सबसे अमूल्य वस्तु भेंट में दे रहे हैं … और मुझे केवल इसी बात का खेद है कि मेरे पास आपको देने के लिए इसका जोड़ा नहीं है । “

” धन्यवाद , प्यारे । मैं बेहद आभारी हूँ … अपनी माँ को मेरा प्रणाम निवेदित करना । लेकिन जैसा मैंने  पहले कहा , मेरे बच्चे यहाँ आते रहते हैं । महिलाएँ यहाँ आती हैं । ख़ैर ! तुम इसे यहीं रख दो ।मैं समझ सकता हूँ कि तुमसे बहस करने का कोई फ़ायदा नहीं । “

” श्रीमन् , बहस करने की कोई वजह ही नहीं , ” साशा ने राहत महसूस करते हुए कहा । ” मैं इसे गुलदारों के पास रख रहा हूँ । काश आपको देने के लिए मेरे पास इसका जोड़ा होता । ख़ैर । चलता हूँ , डॉक्टर साहब । “

साशा के जाने के बाद डॉक्टर अपना सिर खुजलाते और सोचते हुए बहुत देर तक उस कलाकृति को देखता रहा ।

‘ यह वाक़ई एक शानदार चीज़ है , ‘ उसने सोचा , ‘ और इसे फेंक देना अफ़सोसनाक होगा … लेकिन मेरे लिए इसे अपने पास रखना असम्भव है … ह्म्म !  यह तो एक समस्या है ।

 

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