कभी आओगे ख़्वाबों में

गीत

मुहम्मद अब्यज ख़ान

कभी आओगे ख्वाबों में
कभी नींदें चुराओगे
मुझे छुप छुप निहारोगे
कभी बातें बनाओगे
मेरे घर की गलियों में
तुम चक्कर लगाओगे

मेरी ख़ातिर तुम कितने
बहाने बनाओगे

कभी पूछोगे मुझको तुम
कभी नज़रें बचाओगे
पतंगों के बहाने से
कभी कपड़े सुखाने के
मुझे तुम देखने छत पे
कितनी बार आओगे

मेरी खातिर तुम कितने
बहाने बनाओगे

इज़हारे इश्क़ होगा जब
नया एहसास होगा तब
नज़र का मेल भी होगा
दिलों का खेल भी होगा
ज़रा सी ज़ुल्फ़ झटकूँगी
तुम पागल हो जाआगे

मेरी ख़ातिर तुम कितने
बहाने बनाओगे

किताबों के वरकों पर
इबारत बन के आओगे
ख़ुशबू जैसे महकोगे
चमन में फैल जाओगे
साँसों में बसोगे तुम
धड़कन बन जाओगे

मेरी ख़ातिर तुम कितने
बहाने बनाओगे

मुहब्बत की फिर नयी
कहानी तब शरू होगी
गजरे की तरह तुमको
बालों में सजाऊँगी
मैं तेरी हो जाऊंगी
तुम मेरे हो जाओगे

मेरी ख़ातिर तुम कितने
बहाने बनाओगे

बातें प्यार की होंगी
कसमे वादे भी होंगे
मुहब्बत की मंज़िल का
बहुत मुश्किल सफ़र होगा
मुझे सच सच बताना तुम
मुझे छोड़ तो न जाओगे

मेरी ख़ातिर तुम कितने
बहाने बनाओगे

नीचे के  लिंक पर क्लिक कर आप इस गीत को अब्यज की आवाज़ में सुन भी सकते हैं

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