हिजाब वाली लड़की

अली रिज़वान

शिक्षा- जामिया मिल्लिया इस्लामिया नई दिल्ली
लेखक "कहानी डिपो" यूट्यूब चैनल एडिटर और कहानी सलाहकार हैं।
मोबाइल-9899367276
 
 

इधर ईद करीब आ रही थी उधर आदिल और जुनैद के दिमाग़ में एक अलग ही खिचड़ी पक रही थी। आदिल ने एक बार जुनैद को किसी वेश्या के बारे में बताया था। जुनैद तब से ही ज़िद लगा कर बैठा था कि उससे मिलना है। जुनैद की आदिल से जब कभी भी बात होती वो उस वेश्या के बारे में ज़रूर पूछता।

दरअसल आदिल भी किसी वेश्या को नहीं जनता था वो तो उसने जुनैद को बड़ी-बड़ी बातें यूँ ही कर दी थी लेकिन उसे क्या पता था कि जुनैद उसके पीछे ही पड़ जायेगा। ईद से ठीक तीन दिन पहले जुनैद, आदिल से मिलने के लिए आया। आज फिर जुनैद ने उस वेश्या का ज़िक्र निकाल लिया "यार मुझे भी मिलवा न उससे"

आदिल ने वादा किया, ‘ठीक है, ईद वाली रात को मेरे घर कोई नहीं होगा हम उसे घर पर ही बुला लेंगे। जुनैद ने उसकी ओर देखा और पूछा. ‘पक्का.’

आदिल ने "हाँ" में सिर हिला दिया।

हर तरफ ईद की तैयारियां बड़ी धूम से चल रही थी। बाज़ार में एक अलग ही रौनक़ थी। खाने-पीने का सामान हो या फिर साज-सज्जा या कपड़े सभी से बाज़ार जैसे पटा पड़ा हो। शाम को सब अपनी-अपनी छत पर चाँद का इंतज़ार कर रहे थे। यूँ तो चाँद की ख़बर मिल ही जाती है लेकिन अपनी आँखों से चाँद देखने का मज़ा ही कुछ और होता है। जुनैद भी अपनी छत पर खड़ा हुआ आसमान की ओर देख रहा था। तभी एक शोर होने लगा। वो देखो वो देखो उधर कितना छोटा सा चाँद है,,,,,किसी ने जल्दी किसी ने देर से लगभग सभी चाँद देखने में सफल हो गए। जुनैद को आसमान वाला चाँद तो नज़र आ गया लेकिन उसका चाँद जो उसके घर से सात घर दूर आठवीं छत पर नज़र आना था, वो अभी तक नज़र नहीं आया था। हर तरफ सलाम और मुबारकबाद का सिलसिला चल रहा था। लेकिन जुनैद अभी भी इस उम्मीद में था कि वो अपना चाँद देख कर ही मुबारकबाद देगा।

दरअसल दो दिन पहले ही जुनैद ने अमरीन से कहा था कि अगर शाम को तुम छत पर नहीं आई तो मेरी ईद नहीं होगी क्योंकि मेरा चाँद तो तुम हो।  जुनैद ने फिर एक नज़र आसमान की तरफ देखा और फिर वो अपने आसपास के लोगों को देखने लगा। इतने में ही नीचे से अम्मी की आवाज़ आई 'छत पर ही खड़ा रहेगा या नीचे आकर कुछ खायेगा भी? मम्मी की आवाज़ को अनसुना करते हुए वो इधर-उधर ही देखता रहा। इस बार जब वो पीछे मुड़ा उसकी नज़र फिर से उस छत पर जाकर टिक गई उसने देखा,,,,,उसने देखा चार-पाँच लड़कियों के बीच अमरीन का खिलखिलाता हुआ चेहरा इस ओर ही देख रहा है। जुनैद ने हाथ के इशारे से सलाम अर्ज़ किया। और उधर से भी इसी तरह उसका जवाब मिला।

अम्मी ने फिर जुनैद को आवाज़ लगाई, "ईद की नमाज़ छत पर ही पढ़ कर आएगा क्या?” इस बार जुनैद हँसता हुआ नीचे चला आया

पहले ईदगाह में नमाज़ हुई उसके बाद खाने पीने का दौर शुरू हुआ। अभी तक जुनैद को वो वादा याद नहीं था जो आदिल ने उससे किया था। आज मसरूफियत इस कदर थी कि कोई भी दूसरी चीज़ याद आना मुमकिन न था। दोपहर बाद जब आदिल उसके घर पर आया तब जुनैद को याद आया और आँखों ही आँखों में उसने पूछना चाहा। इधर आदिल दो दिन से इसी जुस्त में लगा था कि आखिर वो किस तरह एक वेश्या का इंतज़ाम करे,,क्योंकि उसने जुनैद के सामने बहुत बड़ी-बड़ी बातें की थीं। बड़ी भाग दौड़ करने के बाद आदिल को एक दलाल का नंबर मिल गया था। लेकिन अभी तक आदिल ने बात नहीं की थी। उसने सोचा जुनैद के सामने ही बात करेगा। अब लगभग तीन बज गए थे मेहमानों का आना जाना भी ख़त्म ही हो चुका था। आदिल और जुनैद छत पर चले गए ताकि इत्मीनान के साथ बात कर सकें क्योंकि नीचे अम्मी जुनैद को कोई न कोई काम बताती ही रहती। इसलिए दोनों ने ऊपर जाना ही अच्छा समझा,,,और वैसे भी बात इतनी रहस्यमय थी कि किसी को ख़बर लग जाये तो दोनों का ठिकाना ही न रहे।

इसलिए ऊपर छत पर जाना सुरक्षा के ऐतबार से भी अच्छा था।

जुनैद ने पूछा, "'हाँ तो, क्या रहा? बात हुई किसी से?  आदिल ने बताया की अभी बात नहीं हुई है लेकिन उसके पास नंबर है,,आदिल ने फोन हाथ में घुमाते हुए कहा।

"तो फिर बात कब करेगा, आज ही तो बुलाना है। अम्मी-अब्बू शाम को मामू के घर जा रहे हैं जुनैद ने कहा।

आदिल ने थोड़ा डरते-डरते नंबर डॉयल किया। चार घंटियों के बाद आखिर किसी ने फ़ोन उठाया

 

‘हेल्लो’ उधर से किसी मर्द की आवाज़ थी। आदिल 30 सेकंड तक कुछ भी बोल नहीं पाया,,,,उधर से हेल्लो,,, हेल्लो,, की आवाज़ लगातार आ रही थी। जुनैद ने जब गुस्से भरी नज़रों से आदिल को घूरा तब कहीं आदिल की आवाज़ निकली,,,,"""जी वो आपका नंबर "कल्लन लंगड़े" ने दिया था,,,,वो,,वो हमें एक लड़,,,लड़की चाहिए थी आज रात के लिए।,,,,,,ठीक है इतना डर क्यों रहे हो पहली बार है क्या,,उधर से आवाज़ आई।

मिल जायेगी न आदिल ने फिर से पूछा।

हाँ हाँ मिल जायेगी लड़की ही है कोई शिलाजीत नहीं जिसके लिए पहाड़ खोदने पड़ें,,उधर से हँसती हुई आवाज़ आई।

लेकिन एक रात के सात हजार रुपये देना होंगे और लड़की को लेकर जाना और छोड़ना तुम्हारी ज़िम्मेदारी है।

आदिल ने जुनैद को बताया जुनैद ने हाँ में सिर हिला दिया। उधर से फ़ोन पर व्यक्ति ने निश्चित समय और ठिकाना बता दिया और साथ में हिदायत भी दी कि पैसे एडवांस में लेकर आना हैं।

दोनों के चेहरे इस क़दर चमक रहे थे मानों उन्होंने यूपीएससी का इम्तेहान पास कर लिया हो। अब दोनों में इस बात की चर्चा होने लगी की आखिर उस वेश्या को लेकर कौन आएगा। आदिल ने साफ़ इंकार कर दिया जुनैद भी राज़ी नहीं था। बहुत नोक-झोक के बाद इस बात पर सहमति हुई की दोनों ही जायेंगे। शाम हो चुकी थी जुनैद के अम्मी अब्बू जा चुके थे साथ ही आदिल को सलाह दी गई थी कि वो जुनैद के साथ ही रहे हम लोग कल वापस आएंगे।,,,,,,,इधर अम्मी अब्बू के जाते ही आदिल ने दलाल को फ़ोन किया, दलाल ने उन्हें एक निश्चित स्थान बताया जहाँ वो उसके आने का इंतज़ार करें।

दोनों ही उस स्थान पर पहुँच गए। आदिल और जुनैद दोनों ही नर्वस हो रहे थे लेकिन इस बात को वो एक दूसरे से जितना सम्भव था छुपाने की कोशिश कर रहे थे। जितना हो सकता था वो दोनों इस समय बेमतलब की बातें कर रहे था

तभी जुनैद बोला,, मैं एक लड़की से प्यार करता हूँ।

आदिल ने बड़ी उत्सुकता से पूछा -- कौन है भाई? कब से चल रहा है। बताया नहीं कभी तूने आदिल ने एक साथ कई सवाल पूछ डाले।,

"है एक लड़की अमरीन नाम है उसका, कल मिलवाता हूँ तुझे जुनैद ने कहा"।,,, अचानक जुनैद के फ़ोन की घण्टी बजी फ़ोन निकाल कर देखा तो अम्मी का फ़ोन था,,,आदिल की तरफ देखते हुए जुनैद ने "कहा इस वक़्त अम्मी फ़ोन क्यों कर रही हैं""" दोनों के दिल की धड़कन थोड़ी तेज़ हो गई डरते-डरते जुनैद ने फ़ोन रिसीव किया,,उधर से अम्मी ने आदेश दिया कि """"जुनैद बेटा मेरी डायबिटीज और बीपी की गोलियाँ घर पर ही रह गई,,बेटा ज़रा मुझे दवाइयाँ पहुँचा दे। जुनैद को थोड़ा गुस्सा तो आया लेकिन करता भी क्या ठीक है अम्मी लेकर आता हूँ जुनैद ने कहा।,,,,,जुनैद आदिल को पूरी बात बता कर वहाँ से चला गया साथ ही समझाया की घर का दरवाज़ा अंदर से सही से बंद कर लेना मैं आने के बाद फ़ोन कर लूंगा।,,,,,,क्योंकि अम्मी की दवा का मुआमला था इसलिए आदिल भी कुछ कह न सका और न चाहते हुए भी उसे वहाँ रुकना पड़ा। थोड़ी ही देर में एक मोटरसाइकिल आदिल को अपनी ओर आती हुई दिखाई दी,,,,,जब मोटरसाइकिल एक दम करीब आ गई आदिल ने देखा एक दुबले पतले से इंसान के पीछे मोटरसाइकिल पर हिजाब में एक लड़की बैठी है। उस व्यक्ति ने आदिल से थोड़ी पूछताछ की उसके बाद आदिल से पैसो के लिए कहा।,,,,,इस बीच लड़की ख़मोश बैठी दोनों की बाते सुन रही थी। पैसे गिनने के बाद दलाल ने लड़की को आदिल के साथ जाने को कहा।,,,,और साथ ही आदिल को याद दिलाया की सुबह सूरज निकने से पहले वो लड़की को इसी स्थान पर छोड़ जाये। आदिल ने हाँ में सिर हिला दिया,,,,,,लड़की आदिल की मोटरसाइकिल पर बैठ गई आदिल थोड़ा सा असहज महसूस कर रहा था। पूरा रास्ता दोनों ही ख़मोश रहे,,,घर पहुँच कर आदिल ने जल्दी से दरवाज़ा खोला और लड़की को अंदर कर दिया। मोटरसाइकिल खड़ी करने के बाद आदिल भी अंदर आ गया। लड़की अभी भी हिजाब पहने ही बैठी थी।,,,,,,,आदिल ने उससे कहा वो अंदर कमरे में जाकर चेंज कर ले।,,,,,आदिल का फ़ोन बजने लगा जेब से निकाल के देखा तो जुनैद का नंबर था। उधर से जुनैद ने गेट खोलने को कहा।,,,,,,,,आदिल और जुनैद दोनों ही अंदर आ चुके थे। जुनैद ने पूछा कैसी है,,,मैंने अभी देखा नहीं है वो हिजाब पहने हुई थी,,,,और मैंने कुछ बात भी नहीं की है आदिल ने कहा।,,,,,कहाँ है? जुनैद ने पूछा।,,,,,,आदिल ने कमरे की तरफ इशारा करते हुए बताया कि चेंज कर रही है। जुनैद ने आदिल से कहा कि पहले वो जाये लेकिन आदिल इस बात पर राज़ी नहीं हुआ,,,,जब बहुत कहने पर भी आदिल जाने के लिए राज़ी नहीं हुआ तब जुनैद ने ही जाना तय किया।,,,,,,जुनैद कमरे की ओर जा तो रहा था लेकिन उसे संकोच हो रहा था। जुनैद ने जैसे ही दरवाज़ा खोला लड़की सामने बैड पर निर्वस्त्र बैठी थी।,,,,,,लड़की को  देख कर जुनैद की आँखें फट गईं उसके दिल की धड़कन इतनी तेज़ हो गई मानो दिल बाहर निकल कर आने वाला है,,,,,वो बेहोशी की हालात में जाने लगा ,,,उसकी आँखों से आँसू बहने लगे वो चीख़ कर रोना चाहता था,,,लेकिन उसके मुँह से सिर्फ ,,,,,,,,,,,एक ही शब्द निकला, ‘अमरीन’

 

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