हमसफ़र

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5 Responses

  1. एसके says:

    बढ़िया सर जी।

  2. satyendra Prasad Srivastava says:

    Thanx Jyoti ji

  3. Jyoti says:

    बहुत बढिया कहानी। यहीं जिंदगी की सच्चाई है कि बुढापे में इंसान एकदम अकेला हो जाता है। जिन बच्चों के लिए वो खुद की अनदेखी करता है वो ही बच्चे…!

  4. Satyendra Prasad Srivastava says:

    शुक्रिया अब्यज

  5. Abyaz says:

    बेहतरीन। सुंदरी का सस्पेंस आखिर तक बना रहा

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