जयप्रकाश मानस की 10 कविताएं

मित्र

होता है हरदम

लोटे में पानी – चूल्हे में आग

होता है हरदम

जलन में झमाझम – उदासी में राग

 

दुर्दिन की थाली में बाड़ी से बटोरी हुई उपेक्षित भाजी-साग

रतौंदी के शिविर में मिले सरकारी चश्मे से

दिख-दिख जाता हरियर बाग

 

नहीं होता मित्र राजधानी में

नहीं होता मित्र चिकनी-चुपड़ी बानी में

 

वह तो लोक में आलोक है

वेद है, मंत्र है, श्लोक है

आँख है कान है नाक है

जीभ है खोपड़ी को फाड़ कर निकल आता वाक् है

 

होता यदि मित्र एक अदद –

न कहीं कविता होती

होता यदि मित्र एक अदद –

न यूँ ही अपवित्र सविता होती

 

मित्र गिलहरी है, घास है

मित्र तितली है, अमलतास है

मित्र है तो दुनिया है

जैसे गणित की परीक्षा में

मुफ़्त में कंपास है, परकार है, गुनिया है ।

 

जब-जब बदलते हैं पाँव

टोपी बदलने से

धूप नहीं बदलती

छाँव नहीं बदलती

चश्मे बदलने से

 

छाता बदलो

आसमान फिर भी कहाँ बदलता

जूते बदलने से

तनिक भी नही बदलता रास्ता

 

बदलती है धरती तब-तब

बदलते हैं पाँव जब-जब ।

 

दरवाज़े

नहीं खुलते ख़ुद-ब-खुद

होते नहीं बंद अपने से

 

नहीं होता इनका कोई घर

घर के लिए सबसे ज़रूरी हों चाहे जितने

बिलगायें बाहर को चाहे कितने

यहीं से निकलते हैं सब-के-सब

थक-हार के

यहीं आकर निथरते हैं बहुत सारे

मन मार के

 

गढ़ी गयीं साँकलें इनके लिए

गढ़े गये बड़े-बड़े, बड़े से बड़े ताले

बची है कितनी दुनिया

दरवाज़ों के हवाले !

 

जगह-जगह

जगह-जगह बहती है नदी

जगह-जगह घाट, जगह-जगह नाव

जगह-जगह कुम्हार, जगह चाक, घड़े

माटी के क़रीब बेटे बड़े

 

जगह-जगह बनपाखी – जगह-जगह पहाड़

जगह-जगह पेड़, जगह-जगह छाँव

जगह-जगह होने चाहिए लोग

जो चलें बिन डरे

अकेला एक कवि करे तो क्या करे

 

जगह-जगह लड़े

जगह-जगह मरे ?

 

जो पिता होते हैं

चाहे हाड़ तोड़कर – चाहे हाथ जोड़कर

सबसे अंतिम में पाँव पकड़कर

इन सबसे पहले गुल्लक फोड़कर

ले ही आते अनाज पीठ लादकर

सबसे मनहूस अँधेरी गलियों में

दिन ढ़लने से पहले

जो पिता होते हैं

 

जो पिता होते हैं

कभी नहीं थकते

पालनहार देवता, उनके पिता ईश्वर

थक हार भले मुँह छुपा लें

कभी नहीं छुपते

चलते रहते हैं हरदम – गलते रहते है हरपल

भूले से भी कभी नहीं गुमते ।

 

न दिखना बचा हुआ था

जल बचा था

दिखना बचा हुआ था

कहीं-न-कहीं, कम-से-कम कोई तालाब

 

तालाब बचा था

दिखना बचा हुआ था

कभी-न-कभी, कम-से-कम कोई घाट

 

घाट बचा था

दिखना बचा हुआ था

कुछ-न-कुछ, कम-से-कम कोई चित्र

 

चित्र बचा था

दिखना बचना हुआ था

कैसे-न-कैसे, कम-से-कम कोई मित्र

 

एक दिन जब मित्र न बचा था

न दिखना बचा हुआ था

चित्र

घाट

तालाब

जल

 

गिरना नहीं था

केवल पेड़ नहीं गिरा

छाँव भी गिरी

केवल छाँव नहीं गिरी

नीड़ भी गिरा

केवल नीड़ नहीं गिरा

पाखी भी गिरी

केवल पाखी नही गिरी

गर्भ भी गिरा

केवल गर्भ नहीं गिरा

सारा संदर्भ भी गिरा

केवल संदर्भ नहीं गिरा

गिर गया हर भावार्थ जो कभी गिरना नहीं था

गिर गया हर परमार्थ जो कभी गिरना नहीं था

 

रखा इतना ही

चावल के दो दाने संग

चुटकी भर नमक रखा

फटे जूते, दूरिहा मंजिल, पाँवों की धमक रखा

तन सूखा, धन भी सूखा

मन अविकल धमक रखा

काँटे मीत, प्रीत और रीत

मुरझाने के पहले गमक रखा

रख सकता था महल अटारी, नहीं रखा

रख सकता था कृपाण कटारी, नहीं रखा

रख सकता था सोन थारी, कहाँ रखा

रख सकता था सोलह तरकारी, कहाँ रखा

 

रखा इतना ही -कि रहा रहने जैसा

कहा उतना ही – कि कहा कहने जैसा

ढहा जितना

थहा उतना ढ़हते-ढ़हते

थहते-थहते

बहुत ही कम रहा

बहुत कम रहा मतलब बहुत नम रहा ।

 

याद न आये जिसे

पानी देखते ही नदी

नदी देखते ही नाव

नाव देखते ही नाविक

नाविक देखते ही पतवार

पतवार देखते ही पेड़

पेड़ देखते ही गाँव

गाँव देखते ही बढ़ई

बढई देखते ही बसुला

बसुला देखते ही लुहार

लुहार देखते ही धार

धार देखते ही पानी

सबको जोड़ती कोई एक कहानी

याद न आये बरबस जिसे

क्या-क्या याद दिलायें उसे ?

 

दुख चाहे हो कितना भी नया

पुराने हो जाते हैं एक दिन कागज, कलम, दवात, स्याही

पुराना हो जाता है कवि एक दिन सारी पुस्तकें

सारे पाठक हो जाते हैं एक न एक दिन पुराने

हो जाते हैं एक दिन

मुद्रक, प्रकाशक, वितरक, आलोचक सबके सब पुराने

आख़िर एक दिन समय भी हो जाता पुराना

दुख चाहे हो कितना भी नया

कविता कभी होती नहीं पुरानी

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जयप्रकाशमानस

जन्म2 अक्टूबर, 1965, रायगढ़, छत्तीसगढ़

मातृभाषा ओडिया

शिक्षाएम.ए (भाषा विज्ञान) एमएससी (आईटी), विद्यावाचस्पति (मानद)

प्रकाशित कृतियाँदेश की तमाम पत्र-पत्रििकाओं में 300 से अधिक कविताएँ, ललित निबंध, लघुकथाएं, आलेख, समीक्षा आदि प्रकाशित

*विदेशी पत्रिकाओं में –प्रयास (कनाड़ा), अभिव्यक्ति (युएई), पुरवाई (लंदन), गर्भनाल(भोपाल)

* कविता संग्रहःतभी होती है सुबह, होना ही चाहिए आँगनतथा अबोले के विरूद्ध
* ललित निबंधःदोपहर में गाँव (पुरस्कृत)

*आलोचना :साहित्य की सदाशयता

* साक्षात्कार :बातचीत डॉट कॉम
* बाल साहित्यः बाल-गीत-चलो चलें अब झील पर, सब बोले दिन निकला, एक बनेगें नेक बनेंगे
मिलकर दीप जलायें, जयप्रकाश मानस की बाल कविताएँ
* नवसाक्षरोपयोगीःयह बहुत पुरानी बात है, छत्तीसगढ के सखा
* लोक साहित्यःलोक-वीथी, छत्तीसगढ़ की लोक कथायें (10 भाग), हमारे लोकगीत

* विज्ञान:इंटरनेट, अपराध और कानून
* संपादन:विष्णु की पाती राम के नाम (विष्णु प्रभाकर के पत्र),हिंदी का सामर्थ्य, साहित्य की पाठशाला, छत्तीसगढीः दो करोड़ लोगों की भाषा, बगर गया वसंत (बाल कवि श्री वसंत पर एकाग्र), एक नई पूरी सुबह कवि विश्वरंजन पर एकाग्र), विंहग 20 वीं सदी की हिंदी कविता में पक्षी),महत्वः डॉ.बल्देव,महत्वः स्वराज प्रसाद त्रिवेदी, यहाँ से वहाँ तक (बिट्रेन के प्रवासी कवियों की कविताएँ), तपश्चर्या और साधना :  संत गुरु घासीदास,
* छत्तीसगढ़ीःकलादास के कलाकारी (छत्तीसगढ़ी भाषा में प्रथम व्यंग्य संग्रह)
पत्रिका संपादन एवं सहयोग
बाल पत्रिका ‘बालबोध’ (मासिक)के 13 अकों का संपादक
लघुपत्रिका ‘प्रथम पंक्ति’ (मासिक) के 2 अंको का संपादक
लघुपत्रिका ‘पहचान-यात्रा’ (त्रैमासिक) में संपादन सहयोग
लघु पत्रिका ‘छत्तीसगढ़-परिक्रमा’(त्रैमासिक) में संपादन सहयोग
अनुवाद पत्रिका ‘सद्-भावना दर्पण’ (त्रैमासिक) में संपादन सहयोग

साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका पांडुलिपि का संपादन (6 अंक)
एलबम
आडियो एलबम ‘तोला बंदौं’ (छत्तीसगढी)
आडियो एलबम ‘जय मां चन्द्रसैनी’ (उड़िया)
वीडियो एलबम ‘घर-घर मां हावय दुर्गा’(छत्तीसगढ़ी)
चयन मंडल में संयोजनः
1. सृजन-सम्मान,छत्तीसगढ़ के 1 लाख से अधिक राशि वाले 30 प्रतिष्ठित एवं अखिल भारतीय साहित्यिक पुरस्कारों के चयन मंडल का संयोजक

  1. प्रमोद वर्मा आलोचना सम्मान हेतु चयन मंडल का संयोजक

पुरस्कार एवं सम्मान-कई पुरस्कारों से सम्मानित

विशेष
कविताओं का बॉग्ला, ओडिया, पंजाबी, गुजराती, नेपाली में अनुवाद

आरबीएस कला एवं विज्ञान महा.तमिलनाडू /स्नातक पाठ्यक्रम में 2 कविताएँ समादृत

छत्तीसगढ़ के स्कूली शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम में कथा समादृत

 

प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, रायपुर, छ.ग. का कार्यकारी निदेशक

अन्य साहित्यिक उपलब्धियाँ

अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलनों का आयोजन

अंतरजाल पर

साहित्यिक वेब पत्रिका ‘सृजनगाथा डॉट कॉम’ का पिछले 9-10 वर्षों से संचालन/संपादन एवं इसके माध्यम से इंटरनेट पर हिंदी के हज़ारों पृष्ठों की प्रतिष्ठा । प्रवासी रचनाकारों को मुख्यधारा में लाने हेतु उनके रचनाओं का निरंतर प्रकाशन । इसके अलावा 20 से अधिक साहित्यिक कृतियों का निःशुल्क आनलाईनकरण कर हिंदी को व्यापक बनाने का अभियान।

सेवाअनुभव

  1. सीईओ, सहकारिता विभाग, मध्यप्रदेश शासन
  2. परियोजना अधिकारी, पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश शासन
  3. सचिव, छत्तीसगढ़ी भाषा परिषद, छ.ग.शासन
  4. सचिव, संस्कृत बोर्ड, छ.ग.शासन
  5. विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी – शिक्षा मंत्री, संस्कृति मंत्री, छ.ग.शासन
  6. विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी – पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़

संप्रति

छत्तीसगढ़ शासन में वरिष्ठ अधिकारी

 

 

संपर्क-

जयप्रकाश मानस,

एफ-3, छग माध्यमिक शिक्षा मंडल

आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा, रायपुर, छत्तीसगढ़, 492001

मो.- 9424182664

ईमेल- srijangatha@gmail.com

वेबसाईट –www.srijangatha.com

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1 Response

  1. farooq afridy says:

    बहुत अच्छी कविताएं जिनमे जीवन का अनुभव बोलता है। भाषा में प्रांजलता है , बधाई मानसजी

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