विशाल मौर्य विशु की दो कविताएं

सिर्फ़ तुम्हारा नाम भर लिख पाता हूँ

बहुत ख़ुश रहता हूँ मैं इन दिनों
ये सोचकर कि तुम दिल के करीब आ गयी हो
हाँ बहुत क़रीब इतने क़रीब कि
ये पता लगाना बहुत मुश्किल हो गया हैं कि
मुझमें कहा मैं हूँ ,और कहा तुम हो
अब कभी डायरी पर कुछ लिखने की कोशिश करता हूँ
तो सिर्फ़ तुम्हारा नाम भर लिख पता हूँ
मेरी आँखों में जो सपने हैं
वो सब तुम्हारे हैं क्योंकि
तुम्हारा हर सपना मेरा सपना हो गया है
सिगरेट के धुएं से छल्ले बनाना भूल गया हूँ
जिसके लिए जाना जाता था मैं कालेज के दिनों में
सुनो मैं तुम्हारी उलझी हुई जुल्फों को
सुलझाना चाहता हूँ ताउम्र
तुम्हारे हाथों की मेहंदी में रह जाना चाहता हूँ एक नाम बनकर
बहुत ख़ुश हूँ जबसे तुमने कहा है
हम दोनों एक दुसरे के बिना वैसे ही अधूरे हैं
जैसे कविताएं अहसासों के बगैर
जैसे जिस्म सांसों के बगैर
सुनो यही तो प्यार होता है ना
जब कोई जीने लगता हैं
किसी और के जिस्म में
रूह बनकर

आओ बन जाते हैं इक दूसरे की नींद

आओ लिख देते हैं
इक दूसरे की साँसों पर इश्क़
और मिटा देते हैं उन सभी बेकार, वाहियात रास्तों को
जो हमें नहीं मिलाती हैं एक दूसरे से
आओ घुल जाते हैं एक दूसरे में
और तुम मैं मिलकर हम बन जाते हैं
फिर डूब जाते हैं सपनों के उस सागर में
जिसके भीतर है इक दुनिया
इस दुनिया से बिल्कुल अलग
आओ बन जाते हैं
इक दूसरे की नींद
और फिर सो जाते हैं इश्क़ की चादर ओढ़ कर
डरने की कोई जरूरत नहीं हैं
इन अंधेरी रातों से
हमने अब इश्क़ कर लिया हैं
हमें हमसे कोई नहीं छिन सकता
मौत भी नहीं
क्योंकि सिर्फ़ मैं और तुम ही मर सकता हैं
हम नहीं

2 comments

  1. Yesterday, while I was at work, my cousin stole my iPad
    and tested to see if it can survive a 30 foot drop, just so she can be a youtube sensation. My iPad is now broken and she has
    83 views. I know this is entirely off topic but I had to share it with someone!

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