नित्यानंद गायेन की छह कविताएं

प्रेम कविता

प्रेमशब्द

खुद में सम्पूर्ण प्रेम कविता है

प्रेम कविताएँ लिखी नहीं जाती

लिख जाती है |

प्रेम के अहसासों को शब्दों में व्यक्त

नहीं कर सकता हूँ

व्यक्त हो भी जाये कभी तो

उसे महसूस करें

ऐसा पाठक कहाँ ?

प्रेम अहसास है गहरे अनुभवों का

गूंगे का आम की मिठास

कौन जान सकता है

प्रेम उस स्पर्श का अनुभव है

जब भयानक पीड़ा में

किसी के छूने भर से मिलती है राहत

प्रेम की भाषा आँखों में होती है

आँखों की भाषा पढ़ता कौन है

प्रेम न तो देखने की वस्तु है

न लाभ और हानि का सौदा

प्रेम अहसास है

जो लिया और दिया जाता है

किसी के लिए जब

आँखों में भर आयें

खारे पानी का सैलाब

बताइए कैसे लिख सकता हूँ

उसे शब्दों में

किसी की विरह में

जब बेचैन हो उठे मन

उसकी अभिव्यक्ति केलिए शब्द

किस शब्दकोश में खोजें हम ?

अब लिखी / सुनी गयी तमाम प्रेम कहानियों में

कितना प्रेम मिला किसी को !

 

सपाट प्रेम कविताएँ

हाँ, मेरी प्रेम कविताएँ

बहुत सपाट होती है

आड़ी-तिरछी,

उबड़-खाबड़ तरीके से

नहीं लिख पाता

मैं प्रेम को |

मेरी प्रेम कविताएँ मोहताज नहीं

किसी

अलंकार और बनावटी शिल्प के |

 

लौट कर मुझे तुम तक आना है

और आज फिर गीली हुई

तुम्हारी पलकें

विदा लेते हुए तुमने गले से लगा लिया मुझे

मैंने स्थगित कर दी

आज की यात्रा फिर

आज पहली बार नहीं हुआ

कि मुझे रुकना पड़ा

छोड़नी पड़ी अपनी यात्रा

दरअसल तुम समझे नहीं

कि मेरी हर यात्रा का अंतिम पड़ाव

तुम ही हो

लौट कर मुझे

तुम तक आना है |

 

मेरी आँखों में

यूँ ही तुम्हें सोचते हुए

तुम्हारी आँखों की भाषा

पढ़ तो लेता हूँ

पर ,नहीं कर पाता मैं अनुवाद !

समझ न आये

तो, झाँक लेना तुम भी

मेरी आँखों में कभी …….

 

तुम्हें अलविदा कहते समय

तुम्हें अलविदा कहते समय

छोड़कर जाने को

बहुत कुछ होगा मेरे पास

 

मैं सिर्फ ले जाऊंगा

मेरे सबसे कठिन समय में

साथ खड़े होके

मेरे पक्ष में कहे हुए

तुम्हारे शब्दों को ….

अपने साथ

 

अच्छा लगता है मेरा उदास होना


याद है तुम्हें

मैंने कहा था तुमसे

अच्छा लगता है मुझे

मेरा उदास होना

दरअसल अपनी उदासी में ही मैं

खुद में होता हूँ पूरी तरह

जब भर आती हैं मेरी आँखें और धुंधली पड़ती हैं

वहमी रिश्ते -नातों की तस्वीरें

मैं केवल सोचता हूँ अपने बारे में

और कल रात जब मैं फोन पर झगड़ रहा था तुमसे

तुम्हारी ही किसी बात पर

क्योंकि मेरी ख़ामोशी पर तुम बार- बार पूछती

कि मैं क्यों हूँ उदास‘ ?

मैं परेशान होता हूँ तुम्हारे इस सवाल से

न पूछो कभी मुझसे मेरी उदासी का राज

बस जब मैं खामोश रहूँ लम्बे समय तक

तुम समझ लेना कि मैं खुद के साथ हूँ

मतलब मैं सोच रहा हूँ तुम्हें

दरअसल उस दौरान मैं विलीन होता हूँ प्रेम में

और सोचता हूँ एक प्रेम कविता पर

जिसे मैं लिख सकूं तुम्हारे लिए

और मुझे लगता है कि

अपनी उदासी में ही मैं लिख सकूंगा

प्रेम की सबसे मुकम्मल कविता

तुम्हारे लिए ||

You may also like...

2 Responses

  1. Asking questions are genuinely fastidious thing if you are not
    understanding anything entirely, however this post provides good understanding yet.

  2. Sling TV says:

    Hi there to every one, since I am genuinely eager of reading this weblog’s post to be updated regularly.
    It contains fastidious material.

Leave a Reply