सुषमा सिन्हा की पांच कविताएं

1.
उसने कहा
‘तुम इतना हँसती क्यों रहती हो’
उसने फिर कहा
‘तुम्हें हँसने के सिवा भी कुछ आता है’

थोड़ा सकुचाई वह
पल भर रुकी
फिर नजर भर नजर को देखा
‘नहीं आता’
कह कर
फिर से हँस पड़ी

क्षण भर वह ठिठका
और जोर से हँस पड़ा।।

2.
उसने कहा-
‘हद है यार
हर दो चार दिन में
इस तरह खामोश और उदास हो जाती हो’
उसने फिर कहा-
‘आखिर तुम्हारी समस्या क्या है’

गुस्से से देखी वह
फिर चिढ़ कर बोली
‘आधी पागल हूँ मैं’

थोड़ा सहमा वह
पल भर ठिठका
और फिर
जोर से बोला
‘और मैं……पूरा पागल’।।

3.
उसने कहा-
‘अच्छा, एक बात बताओ
कितना प्यार करते हो मुझसे’
और उसकी ओर
एकटक देखने लगी

बड़े गौर से देखा उसने भी
थोड़ा मुस्कुराया
फिर अपनी उँगलियों के पोरों से
चुटकी भर का इशारा करते हुए कहा-
‘इत्तु-सा’
और ठठाकर हँस दिया

बड़े सुकून से मुस्कुराई वह
और प्यार से बोली- ‘बहुत है!’।।

4.
उसने कहा-
‘मेरे पास कुछ नहीं है
जो तुम्हें दे सकूँ’
वह बोली- ‘मुझे कुछ नहीं चाहिए’
और उसकी ओर देखने लगी

पल भर उसने भी देखा उसे
फिर सिर झुका लिया
और कहा- ‘मुझे इतना मत ढूँढ़ा करो यार’
वह बोली- ‘मैं तुम्हें नहीं खुद को ढूँढ़ रही हूँ’

निःशब्द वह
उसकी ओर देखता रहा
फिर संजीदगी से कहा-
‘प्लीज !! इतना प्यार नहीं किया करो’
वह पूछी- ‘क्यों? अच्छा नहीं लगता?’
उसने कहा- ‘बहुत अच्छा लगता है
पर डरता हूँ….
कहीं पागल न हो जाऊँ’

धीरे से मुस्कुराई वह और बोली-
‘प्यार पागलपन ही तो है’।।

5.
उसने कहा-
‘अँधेरे से क्यों डरती हो
अँधेरे का कोई वजूद नहीं होता’
उसने फिर कहा –
‘आँखें बंद कर लो तो अँधेरा
आँखें खुली हों तो उजाला’

वह बोली-
‘नहीं मानती मैं, ऐसा कहाँ होता है
आँखें खुली हों
तब भी तो अँधेरा होता है
और बंद आँखों में भी तो
जगमगाती है रौशनी’

उसने उसकी ओर
बड़े प्यार से देखा
और मुस्कुरा कर कहा-
‘ऐसा हमेशा नहीं होता
ऐसा सिर्फ प्यार में होता है’।।

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