कमलेश भारतीय की चार कविताएं

एक

दिन जब थक जाता है
तब रात उसे थाम लेती है
दिन और रात की
सुख और दुख की
जुगलबंदी का
नाम ही जिंदगी है, मित्रो ।

दो
वसंत तुम आए हो
तुम्हारा स्वागत् है
पर मैं तुम्हारे फूलों का क्या करूं?
किसी शहर में आगजनी
किसी में लगा कर्फ्यू
तो किसी शहर में दंगा है ।
वसंत
जरा मेरी गलियों की रौनक तो लौटा दो
जरा मेरी नन्ही बेटी के चेहरे पर
मुस्कान तो खिला दो
फिर मैं भी तो जानूं कि
वसंत आया है,,,,,,

तीन

खिला गुलाब
बोला मुझसे
बबुआ क्यों हो उदास ?
जिंदगी का हर दिन है नया
हर पल है खास ।

चार

मित्र, जब कभी तुम
पहाड़ी सफर पर गये होगे
रास्ते में कोई हसीन दृश्य देखा होगा
तब तुमने सोचा होगा कि
लौटती बार फुर्सत में आऊंगा
कुछ चैन के पल बिताऊंगा ।
शायद ऐसा अवसर पा भी गए होगे ।
पर मित्र, जिंदगी पहाड़ी सफर नहीं है
इसमें आगे ही आगे जाना होता है
लौटने का न कोई अवसर मिलता है
न फुर्सत ।
बस , लौटना नहीं होता
आगे ही आगे जाना होता है ।

 

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1 Response

  1. kamlesh bhartiya says:

    literature point ka lekhakon ko protsahit aur dur tak jorne ka yeh kaam, prayas sarahniy hai. ise banaye rakhiye. bahut se rachnakaron ko parne ka avsar mil jata hai. dhanywad.

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