बढ़ती अमानुिषकता पर केंद्रित ‘कथन’ का नया अंक

‘कथन’ का अंक 83-84 ‘बढ़ती अमानुषिकता से जूझती दुनिया’ विषय पर केंद्रित है। वर्तमान दौर में हिंसा, अमानुषीकरण, युद्धोन्माद जैसे जिन सवालों से हमारे देश में ही नहीं, दुनिया भर में लोग जूझ रहे हैं, उन सवालों पर महत्त्वपूर्ण सामग्री इस अंक में है।

अंक में दिवंगत कवि मलखान सिंह को याद करते हुए उनकी कविताएं हैं। इसके अलावा लीलाधर मंडलोई, श्रुति कुशवाह, विहाग वैभव, विमल चन्द्र पांडेय, मुस्तफा खान और आत्मा रंजन और अनुज लुगुन की कविताएं हैं। द्वारकेश नेमा, सविता सिंह, प्रियदर्शन और सीमा आजाद की कहानियां हैं। नए लेखक की पहली कहानी में अस्मुरारी नन्दन मिश्र की कहानी है।

इस बार ‘आज के सवाल’ स्तंभ में प्रसिद्ध इतिहासविद् लाल बहादुर वर्मा के साथ लंबी बातचीत है। अंक की अन्य सामग्री केंद्रीय विषय को विविध दृष्टिकोणों और संदर्भ में प्रस्तुत करती है।

अंक दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में शब्द संधान के स्टाल पर उपलब्ध होगा। हॉल नंबर 12ए, स्टाल नंबर 75। एक प्रति का मूल्य 100 रुपए।

अंक निम्न पते से भी मंगाया जा सकता है

संज्ञा उपाध्याय, संपादक

107, साक्षरा अपार्टमेंट्स,

ए-3, पश्चिम विहार

नई दिल्ली -110063

मोबाइल–09818184806

 

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