केशव शरण की 4 ग़ज़लें

केशव शरण
जन्म–23-08-1960 
प्रकाशित कृतियां-
तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)
जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)
दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)
कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)
एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)
दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)
क़दम-क़दम ( चुनी हुई कविताएं ) 
न संगीत न फूल ( कविता संग्रह)
गगन नीला धरा धानी नहीं है ( ग़ज़ल संग्रह )
संपर्क –एस2/564 सिकरौल
वाराणसी  221002
मो.   9415295137
 
 
 

एक

गर न भवन भव्य छेंकते जाते

बैठकर धूप सेंकते जाते 

दृश्य उस ओर के नदारद हैं

दृष्टि जिस ओर फेंकते जाते 

एक बीमार और भूखी मां

चार नवजात केंकते जाते 

हुक्म था सर झुका चले आओ

रेंगते और रेंकते जाते 

आ गयीं राजमार्ग पर भेंड़ें

हट रही हैं न, हेंकते जाते

 

दो

इरादा एक ऊंची कूद का है

पका फल डाल पर अमरूद का है

 अभी तो हाथ डाला, लोग कहते

तुम्हारा चाहना बेसूद का है

 मुनासिब कार्रवाई बाद में हो

तक़ाज़ा क्या अभी मौजूद का है

 करे भी क्या तरसने के अलावा

मुक़द्दर ही यही मरदूद का है

 निगाहों को न जाने क्या पड़ी है

सरासर काम तो बारूद का है

 ज़माना हो गया इस ओर आये

गली के पार घर महमूद का है

 

तीन

मन में अपने क्यों कोई डर लाऊं

जब क़दम दिल की डगर पर लाऊं

 देखने जाऊं नज़ारे रुत के

आंख अपनी अश्क़ से भर लाऊं

 फूल के गुच्छे से क्या होना है

इक सितारा तोड़के गर लाऊं

 सर न होगा आसमां इनसे गर

मैं कहां से दूसरे पर लाऊं

 कामयाबी तो दिलाता कोई

फ़ारमूला रोज़ दीगर लाऊं

 रोकता है कौन टकराने से

पत्थरों के पास जब सर लाऊं

 

चार

 भरे तन चांद का दीदार अच्छा

समुंदर में उठेगा ज्वार अच्छा

नहीं है प्यार तो फिर पोथियां हैं

हमेशा पोथियों से प्यार अच्छा

 तुम्हारा नाज़ अच्छा हुस्न वाले

मगर क्या इश्क़ से इन्कार अच्छा

 किसे लगती नहीं अच्छी प्रशंसा

किसे लगता नहीं उपहार अच्छा

 हमें तो सिर्फ़ अच्छे से ग़रज़ है

हमारा गुल तुम्हारा ख़ार अच्छा

 बुरा कोई नहीं अच्छे सभी हैं

मगर सबसे हमारा यार अच्छा

 मिले हैं आप तो ये भाव उठे

बनाना है हमें संसार अच्छा

 

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