केशव शरण की 21 ग़ज़लों की श्रृंखला

केशव शरण

प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)सम्पर्कः एस 2/564 सिकरौलवाराणसी  221002मो.   94152951371.क्यों नसीबों की बात करते हैंजब ग़रीबों की बात करते हैं फिर कहेंगे हमें उठाने कोवो सलीबों की बात करते हैं किनके अल्फ़ाज़ सबसे झूठे हैंक्या अदीबों की बात करते हैं जाइये मत अभी रक़ीबों परहम हबीबों की बात करते हैं कौन है हमसे बढ़के, आप अगरबदनसीबों की बात करते हैं________________________2.देवदारों की बात करते हैंकिन बहारों की बात करते हैं वो दिखाई कहीं नहीं देतेजिन नज़ारों की बात करते हैं छूट जाती ज़मीन दूर कहींचांद-तारों की बात करते हैं ये नहीं करते हैं सहारा देंबे-सहारों की बात करते हैं आपको अपनी ही पड़ी है यहांहम हज़ारों की बात करते हैं ये महीना है मानसूनों कासो, फुहारों की बात करते हैं कौन है हमसे बढ़के, आप अगरबे-क़रारों की बात करते हैं_____________________________ 3. अपनी चाहों की बात करते हैंबंद राहों की बात करते हैं प्यार ख़ुशियों का गर ख़ज़ाना हैक्यों कराहों की बात करते हैैं​ मग्न हैं ख़ुशगवार यादों मेंहम न आहों की बात करते हैं प्यार को रख दिया गुनाहों मेंजग की डाहों की बात करते हैं आज बैठी है खाप पंचायतसब कड़ाहों की बात करते हैं___________________________  4. तम के तालों की बात करते हैंबंद उजालों की बात करते हैं चुप जमाख़ोरियों के बारे मेंपर अकालों की बात करते हैं कोई प्यासा कोई भरे हिचकीहमपियालों की बात करते हैं वो निभायें जवाबदेही तोहम सवालों की बात करते हैं अपनी तन्हाइयों से अक्सर हमबज़्म वालों की बात करते हैं अब न मंज़िल न राह के चर्चेअब न छालों की बात करते हैं दिल के बारे में राय कैसी हैगोरे गालों की बात करते हैं____________________________ 5. क्या विमानों की बात करते हैंबंद उड़ानों की बात करते हैं चल रहा राज-काज है कि नहींकिन विधानों की बात करते हैं तीर उनके कहीं तो बैठेंगेक्या निशानों की बात करते हैं उनके कितने विलायती आकाहुक्मरानों की बात करते हैं कौन उठाता है पायमालों कोसब महानों की बात करते हैं अब लुढ़कने में उनको देर नहींआसमानों की बात करते हैं थी चिड़ी डाल-डाल सोने कीकिन ज़मानों की बात करते हैं__________________________ 6.चंद बाबों की बात करते हैंजब किताबों की बात करते हैं वो नशीली नज़र की छाप पड़ीकम शराबों की बात करते हैं रात – भर जागते हैं तारागणजिनसे ख़्वाबों की बात करते हैं इश्क़ में चार दिन हुए उनकोपर ख़िताबों की बात करते हैं हर समय सैरगाह के मंज़रऔर ढाबों की बात करते हैं____________________________7.कम दिशाओं की बात करते हैंसब हवाओं की बात करते हैं हमको भी तो ज़रा सुनाई देंजिन सदाओं की बात करते हैं हो चुके हैं फ़िदा दिलो-जां सेमस्त अदाओं की बात करते हैं इश्क़ के ख़्वाब देखते हैं क्योंजब सज़ाओं की बात करते हैं भूल जाती है क्यों ज़फ़ा अपनीजब वफ़ाओं की बात करते हैं फेंक आयें कहां बदन को हमआत्माओं की बात करते हैं_________________________8.जब लगावों की बात करते हैंलोग घावों की बात करते हैं हर तमन्ना तो पाल रक्खी हैअब तनावों की बात करते हैं सब पुराने अधोपतन के लिएनव प्रभावों की बात करते हैं खाते-पीते मिलेंगे दीन नहींजो अभावों की बात करते हैं कौन सच्चाइयां उभारेगासब दबावों की बात करते हैं__________________________9.बम-पटाख़ों की बात करते हैंफिर सलाख़ों की बात करते हैं लोग मैदान छोड़ भागे हैंऐसे लाखों की बात करते हैं जो लगाते हैं जंग के नारेउनकी कांखों की बात करते हैं कितना चूना लगा चुके हैं वोऔर साखों की बात करते हैं उड़ने को आसमान है कोईहम भी पांखों की बात करते हैं________________________10.क्या तगादों की बात करते हैंहम जो वादों की बात करते हैं बात करते हैं हम मुहब्बत कीवो फ़सादों की बात करते हैं ऐसे भी लोग हैं जो हम दो मेंबस विवादों की बात करते हैं पारदर्शी, अपारदर्शी भीसब लबादों की बात करते हैं शह्र में भी किसान जब मिलतेबीज-खादों की बात करते हैं______________________11.घोर प्यासों की बात करते हैंछुंछ गिलासों की बात करते हैं सामने है उजाड़-सा मधुबनलुप्त रासों की बात करते हैं मेरे दिल की भी चोट देखें तोदेवदासों की बात करते हैं लाज चिथड़ों ने कम रखी है क्याकिन लिबासों की बात करते हैं काम आयी है भूखे राजा केदूब-घासों की बात करते हैं जीत या हार तय है पहले सेया कयासों की बात करते हैं अपने अस्थान पर सफलता हैहम प्रयासों की बात करते हैं__________________________12.गो, दिमाग़ों की बात करते हैंतो भी रागों की बात करते हैं इनके विष को दवा बनाना हैग़म के नागों की बात करते हैं जल रहे हैं धुंआ-धुआं अब भीजिन चिराग़ों की बात करते हैं ये मुझे आप ही से बांधेंगेमन के धागों की बात करते हैं हूट करते जो हंस-जोड़े कोकाले कागों की बात करते हैं प्यार जिनको नहीं मिला जग मेंउन अभागों की बात करते हैं अंत में वो सिफ़र ही पायेंगेजोड़-भागों की बात करते हैं_________________________13.शह न मातों की बात करते हैंफूल-पातों की बात करते हैं सिर्फ़ दिलदार देखते हैं हमदिल की बातों की बात करते हैं​ कैसे धोखे हमें खिलायेंगेभोज – भातों की बात करते हैं ख़्वाब की ऐसी भी ख़ुमारी क्यादिन में रातों की बात करते हैं अपने फूलों के साथ ग़ायब जोउन अहातों की बात करते हैं नाथ होंगे ज़रूर नाथों केहम अनाथों की बात करते हैं________________________14.जिन जहीनों की बात करते हैंवो हसीनों की बात करते हैं ख़ुश्बुओं से भरी ये महफ़िल हैक्यों पसीनों की बात करते हैं बे-क़रारी-भरे हैं दिन अपनेवो महीनों की बात करते हैं इस किनारे ही रह न जायें वोजो सफ़ीनों की बात करते हैं पास अंगूठी है एक पीतल कीपर नगीनों की बात करते हैं_____________________________15.विष के मापों की बात करते हैंदिल के सांपो की बात करते हैं प्यार का भी शुमार है उनमेंवो जो पापों की बात करते हैं कांप उठती हैं आत्माएं दोलोग खापों की बात करते हैं अश्क़ उबलते हैं आह उठती हैधुंध-भापों की बात करते हैं कुछ तो समझें मिलन-विरह दर्ज़ीभिन्न नापों की बात करते हैं___________________________16.तर ज़िराफ़ों की बात करते हैंहम गिलाफ़ों की बात करते हैं दिल की सौदागरी है घाटे कीकिन मुनाफ़ों की बात करते हैं  हों हमें भी नसीब तो जानेंजिन लिफ़ाफ़ों की बात करते हैं सुख नहीं दुख में देख सकते हैंजिन इज़ाफ़ों की बात करते हैं दिल के गंदे हैं जो हिकारत सेदिल के साफ़ों की बात करते हैं__________________________17.मन के नाटों की बात करते हैंहम विराटों की बात करते हैं उनकी दुम क्यों नज़र नहीं आतीजिन ललाटों की बात करते हैं वो खुले हैं न जाने किसके लिएदृग-कपाटों की बात करते हैं ज़ह्र दुनिया का बह रहा कालादिव्य घाटों की बात करते हैं प्यार का कार-बार मंदा हैदिल के हाटों की बात करते हैं फूल-सी देह पर दिखायी देंनील सांटों की बात करते हैं हर तरफ़ है अंधेरगर्दी एकराज-पाटों की बात करते हैं____________________________________18.ज्यों लकीरों की बात करते हैंदिल के चीरों की बात करते हैं ये तड़प तो वचन ही दे सकतेआप तीरों की बात करते हैं हम बुरे थे सुनी-सुनाई परअब नज़ीरों की बात करते हैं जो बजे ही नहीं हैं मुद्दत सेमन-मजीरों की बात करते हैं आत्माएं मरा करें जिन परउन शरीरों की बात करते हैं इश्क़ में हो गये निकम्मे जोउन फ़क़ीरों की बात करते हैं जो समझते हैं प्यार को दौलतउन अमीरों की बात करते हैं खा गये मात जो पियादों सेउन वज़ीरों की बात करते हैं_________________________________________19.कल के छोरों की बात करते हैंउनके बोरों की बात करते हैं शह्र की ओर जा रहे हैं जोवृद्ध ढोरों की बात करते हैं छोड़ भी दास्तान फूलों कीसूखी सोरों की बात करते हैं ख़ूबसरत है कौन ये देखेंकाले-गोरों की बात करते हैं पंख सुंदर तो पांव को रोयेंहां जी, मोरों की बात करते हैं_______________________________20.जुग के ग़ाज़ों की बात करते हैंतख़्त-ताजों की बात करते हैं गर किसी गांव में बची हो तोलोक-लाजों की बात करते हैं दूध, बादाम, सेब, मेवे हैंक्यों अनाजों की बात करते हैं कितने तो तीसमार खां थे वोअपने आजों की बात करते हैं एक ये ही ख़मोश हैं अब तकमन के बाजों की बात करते हैं_____________________________________________21.हार-जीतों की बात करते हैंगाय-चीतों की बात करते हैं उनकी मजबूरियां हैं और बड़ीअपने मीतों की बात करते हैं गुनगुनाते रहे अकेले हीप्रेम-गीतों की बात करते हैं ध्यान कठिनाइयों पे किसके हैनिज सुभीतों की बात करते हैं ख़ुद बड़े और दूसरे छोटेउनके फीतों की बात करते हैं

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