केशव शरण की 21 ग़ज़लों की श्रृंखला

केशव शरण

प्रकाशित कृतियां-
तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)
जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)
दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)
कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)
एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)
दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)
सम्पर्कः एस 2/564 सिकरौल
मो.   9415295137
1.
क्यों नसीबों की बात करते हैं
जब ग़रीबों की बात करते हैं
 
फिर कहेंगे हमें उठाने को
वो सलीबों की बात करते हैं
 
किनके अल्फ़ाज़ सबसे झूठे हैं
क्या अदीबों की बात करते हैं
 
जाइये मत अभी रक़ीबों पर
हम हबीबों की बात करते हैं
 
कौन है हमसे बढ़के, आप अगर
बदनसीबों की बात करते हैं
________________________
2.
देवदारों की बात करते हैं
किन बहारों की बात करते हैं
 
वो दिखाई कहीं नहीं देते
जिन नज़ारों की बात करते हैं
 
छूट जाती ज़मीन दूर कहीं
चांद-तारों की बात करते हैं
 
ये नहीं करते हैं सहारा दें
बे-सहारों की बात करते हैं
 
आपको अपनी ही पड़ी है यहां
हम हज़ारों की बात करते हैं
 
ये महीना है मानसूनों का
सो, फुहारों की बात करते हैं
 
कौन है हमसे बढ़के, आप अगर
बे-क़रारों की बात करते हैं
_____________________________
 
3.
अपनी चाहों की बात करते हैं
बंद राहों की बात करते हैं
 
प्यार ख़ुशियों का गर ख़ज़ाना है
क्यों कराहों की बात करते हैैं​
 
मग्न हैं ख़ुशगवार यादों में
हम न आहों की बात करते हैं
 
प्यार को रख दिया गुनाहों में
जग की डाहों की बात करते हैं
 
आज बैठी है खाप पंचायत
सब कड़ाहों की बात करते हैं
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4.
तम के तालों की बात करते हैं
बंद उजालों की बात करते हैं
 
चुप जमाख़ोरियों के बारे में
पर अकालों की बात करते हैं
 
कोई प्यासा कोई भरे हिचकी
हमपियालों की बात करते हैं
 
वो निभायें जवाबदेही तो
हम सवालों की बात करते हैं
 
अपनी तन्हाइयों से अक्सर हम
बज़्म वालों की बात करते हैं
 
अब न मंज़िल न राह के चर्चे
अब न छालों की बात करते हैं
 
दिल के बारे में राय कैसी है
गोरे गालों की बात करते हैं
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5.
क्या विमानों की बात करते हैं
बंद उड़ानों की बात करते हैं
 
चल रहा राज-काज है कि नहीं
किन विधानों की बात करते हैं
 
तीर उनके कहीं तो बैठेंगे
क्या निशानों की बात करते हैं
 
उनके कितने विलायती आका
हुक्मरानों की बात करते हैं
 
कौन उठाता है पायमालों को
सब महानों की बात करते हैं
 
अब लुढ़कने में उनको देर नहीं
आसमानों की बात करते हैं
 
थी चिड़ी डाल-डाल सोने की
किन ज़मानों की बात करते हैं
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6.
चंद बाबों की बात करते हैं
जब किताबों की बात करते हैं
 
वो नशीली नज़र की छाप पड़ी
कम शराबों की बात करते हैं
 
रात – भर जागते हैं तारागण
जिनसे ख़्वाबों की बात करते हैं
 
इश्क़ में चार दिन हुए उनको
पर ख़िताबों की बात करते हैं
 
हर समय सैरगाह के मंज़र
और ढाबों की बात करते हैं
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7.
कम दिशाओं की बात करते हैं
सब हवाओं की बात करते हैं
 
हमको भी तो ज़रा सुनाई दें
जिन सदाओं की बात करते हैं
 
हो चुके हैं फ़िदा दिलो-जां से
मस्त अदाओं की बात करते हैं
 
इश्क़ के ख़्वाब देखते हैं क्यों
जब सज़ाओं की बात करते हैं
 
भूल जाती है क्यों ज़फ़ा अपनी
जब वफ़ाओं की बात करते हैं
 
फेंक आयें कहां बदन को हम
आत्माओं की बात करते हैं
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8.
जब लगावों की बात करते हैं
लोग घावों की बात करते हैं
 
हर तमन्ना तो पाल रक्खी है
अब तनावों की बात करते हैं
 
सब पुराने अधोपतन के लिए
नव प्रभावों की बात करते हैं
 
खाते-पीते मिलेंगे दीन नहीं
जो अभावों की बात करते हैं
 
कौन सच्चाइयां उभारेगा
सब दबावों की बात करते हैं
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9.
बम-पटाख़ों की बात करते हैं
फिर सलाख़ों की बात करते हैं
 
लोग मैदान छोड़ भागे हैं
ऐसे लाखों की बात करते हैं
 
जो लगाते हैं जंग के नारे
उनकी कांखों की बात करते हैं
 
कितना चूना लगा चुके हैं वो
और साखों की बात करते हैं
 
उड़ने को आसमान है कोई
हम भी पांखों की बात करते हैं
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10.
क्या तगादों की बात करते हैं
हम जो वादों की बात करते हैं
 
बात करते हैं हम मुहब्बत की
वो फ़सादों की बात करते हैं
 
ऐसे भी लोग हैं जो हम दो में
बस विवादों की बात करते हैं
 
पारदर्शी, अपारदर्शी भी
सब लबादों की बात करते हैं
 
शह्र में भी किसान जब मिलते
बीज-खादों की बात करते हैं
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11.
घोर प्यासों की बात करते हैं
छुंछ गिलासों की बात करते हैं
 
सामने है उजाड़-सा मधुबन
लुप्त रासों की बात करते हैं
 
मेरे दिल की भी चोट देखें तो
देवदासों की बात करते हैं
 
लाज चिथड़ों ने कम रखी है क्या
किन लिबासों की बात करते हैं
 
काम आयी है भूखे राजा के
दूब-घासों की बात करते हैं
 
जीत या हार तय है पहले से
या कयासों की बात करते हैं
 
अपने अस्थान पर सफलता है
हम प्रयासों की बात करते हैं
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12.
गो, दिमाग़ों की बात करते हैं
तो भी रागों की बात करते हैं
 
इनके विष को दवा बनाना है
ग़म के नागों की बात करते हैं
 
जल रहे हैं धुंआ-धुआं अब भी
जिन चिराग़ों की बात करते हैं
 
ये मुझे आप ही से बांधेंगे
मन के धागों की बात करते हैं
 
हूट करते जो हंस-जोड़े को
काले कागों की बात करते हैं
 
प्यार जिनको नहीं मिला जग में
उन अभागों की बात करते हैं
 
अंत में वो सिफ़र ही पायेंगे
जोड़-भागों की बात करते हैं
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13.
शह न मातों की बात करते हैं
फूल-पातों की बात करते हैं
 
सिर्फ़ दिलदार देखते हैं हम
दिल की बातों की बात करते हैं​
 
कैसे धोखे हमें खिलायेंगे
भोज – भातों की बात करते हैं
 
ख़्वाब की ऐसी भी ख़ुमारी क्या
दिन में रातों की बात करते हैं
 
अपने फूलों के साथ ग़ायब जो
उन अहातों की बात करते हैं
 
नाथ होंगे ज़रूर नाथों के
हम अनाथों की बात करते हैं
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14.
जिन जहीनों की बात करते हैं
वो हसीनों की बात करते हैं
 
ख़ुश्बुओं से भरी ये महफ़िल है
क्यों पसीनों की बात करते हैं
 
बे-क़रारी-भरे हैं दिन अपने
वो महीनों की बात करते हैं
 
इस किनारे ही रह न जायें वो
जो सफ़ीनों की बात करते हैं
 
पास अंगूठी है एक पीतल की
पर नगीनों की बात करते हैं
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15.
विष के मापों की बात करते हैं
दिल के सांपो की बात करते हैं
 
प्यार का भी शुमार है उनमें
वो जो पापों की बात करते हैं
 
कांप उठती हैं आत्माएं दो
लोग खापों की बात करते हैं
 
अश्क़ उबलते हैं आह उठती है
धुंध-भापों की बात करते हैं
 
कुछ तो समझें मिलन-विरह दर्ज़ी
भिन्न नापों की बात करते हैं
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16.
तर ज़िराफ़ों की बात करते हैं
हम गिलाफ़ों की बात करते हैं
 
दिल की सौदागरी है घाटे की
किन मुनाफ़ों की बात करते हैं 
 
हों हमें भी नसीब तो जानें
जिन लिफ़ाफ़ों की बात करते हैं
 
सुख नहीं दुख में देख सकते हैं
जिन इज़ाफ़ों की बात करते हैं
 
दिल के गंदे हैं जो हिकारत से
दिल के साफ़ों की बात करते हैं
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17.
मन के नाटों की बात करते हैं
हम विराटों की बात करते हैं
 
उनकी दुम क्यों नज़र नहीं आती
जिन ललाटों की बात करते हैं
 
वो खुले हैं न जाने किसके लिए
दृग-कपाटों की बात करते हैं
 
ज़ह्र दुनिया का बह रहा काला
दिव्य घाटों की बात करते हैं
 
प्यार का कार-बार मंदा है
दिल के हाटों की बात करते हैं
 
फूल-सी देह पर दिखायी दें
नील सांटों की बात करते हैं
 
हर तरफ़ है अंधेरगर्दी एक
राज-पाटों की बात करते हैं
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18.
ज्यों लकीरों की बात करते हैं
दिल के चीरों की बात करते हैं
 
ये तड़प तो वचन ही दे सकते
आप तीरों की बात करते हैं
 
हम बुरे थे सुनी-सुनाई पर
अब नज़ीरों की बात करते हैं
 
जो बजे ही नहीं हैं मुद्दत से
मन-मजीरों की बात करते हैं
 
आत्माएं मरा करें जिन पर
उन शरीरों की बात करते हैं
 
इश्क़ में हो गये निकम्मे जो
उन फ़क़ीरों की बात करते हैं
 
जो समझते हैं प्यार को दौलत
उन अमीरों की बात करते हैं
 
खा गये मात जो पियादों से
उन वज़ीरों की बात करते हैं
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19.
कल के छोरों की बात करते हैं
उनके बोरों की बात करते हैं
 
शह्र की ओर जा रहे हैं जो
वृद्ध ढोरों की बात करते हैं
 
छोड़ भी दास्तान फूलों की
सूखी सोरों की बात करते हैं
 
ख़ूबसरत है कौन ये देखें
काले-गोरों की बात करते हैं
 
पंख सुंदर तो पांव को रोयें
हां जी, मोरों की बात करते हैं
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20.
जुग के ग़ाज़ों की बात करते हैं
तख़्त-ताजों की बात करते हैं
 
गर किसी गांव में बची हो तो
लोक-लाजों की बात करते हैं
 
दूध, बादाम, सेब, मेवे हैं
क्यों अनाजों की बात करते हैं
 
कितने तो तीसमार खां थे वो
अपने आजों की बात करते हैं
 
एक ये ही ख़मोश हैं अब तक
मन के बाजों की बात करते हैं
_____________________________________________
21.
हार-जीतों की बात करते हैं
गाय-चीतों की बात करते हैं
 
उनकी मजबूरियां हैं और बड़ी
अपने मीतों की बात करते हैं
 
गुनगुनाते रहे अकेले ही
प्रेम-गीतों की बात करते हैं
 
ध्यान कठिनाइयों पे किसके है
निज सुभीतों की बात करते हैं
 
ख़ुद बड़े और दूसरे छोटे
उनके फीतों की बात करते हैं

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