केशव शरण की 2 कविताएं

केशव शरण
प्रकाशित कृतियां-
तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)
जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)
दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)
कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)
एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)
दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)
क़दम-क़दम ( चुनी हुई कविताएं ) 
न संगीत न फूल ( कविता संग्रह)
गगन नीला धरा धानी नहीं है ( ग़ज़ल संग्रह )
कहां अच्छे हमारे दिन ( ग़ज़ल संग्रह )
संपर्क-एस2/564 सिकरौल
वाराणसी  221002
मो.   9415295137
  1. लाकडाउन में घर की यात्रा

कट गये आठ सौ किलोमीटर

अब बचा ही कितना है !

बस सात सौ किलोमीटर

घर आ ही गया है

बस पांच सौ किलोमीटर

घर आ ही गया है

बस तीन सौ किलोमीटर

घर आ ही गया है

बस दो सौ किलोमीटर

घर आ ही गया है

बस सौ किलोमीटर

घर पहुंचे ही समझो

बस पचास किलोमीटर

अब नहीं चला जायेगा

एक क़दम

गाड़ी बुलाओ

एम्बुलेंस ?

नहीं

शववाहिनी !

 

2.  लाकडाउन में प्रकृति

चिड़िया

बहुत उदास और बोर थी

मेरे पास

पहुंचते ही

चहकने लगी

बड़ी ज़ोर थी

 

उदास और बोर

मैं भी क्या कम था

मेरी भी चुटकियां बजने लगीं

 

आवश्यक चीज़ों की ख़रीद पर

छूट का लाभ उठाकर

मैं आया था बाहर

देखने

कि कहीं

पत्ता हिल रहा है

या नहीं,

कि कहीं

फूल खिल रहा है

या नहीं

 

मैंने देखा

पत्ता भी हिल रहा है

फूल भी खिल रहा है

हवा का झोंका बहा जा रहा है

एक सुंदर नाद के साथ

जैसा पानी की तेज़ लहर उत्पन्न करती है

 

बाहर

घर के अंदर की तरह नहीं था

सिवाय एक चिड़िया की उदासी 

और बोरियत के

 

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