केशव शरण की 5 कविताएं

  1. इस राष्ट्र में

इस राष्ट्र में

मंदिर भी होना चाहिए

इस राष्ट्र में 

मसजिद भी

इस राष्ट्र में

चर्च भी

इस राष्ट्र में

हिंदू भी होने चाहिए

इस राष्ट्र में

मुसलमान भी

इस राष्ट्र में

ईसाई भी

इस राष्ट्र में

क्या सब मानव ही रहते हैं ?

अजब उधेड़बुन चल रही थी

अच्छा हुआ कि नींद टूट गयी

  • 2. बदला कुछ नहीं

उसने

उनकी पीड़ा को

अभिव्यक्ति दी

धारदार

जिनको

उसके वर्ग ने

पीड़ा दी अपार

इसके लिए

पुरस्कृत वह हुआ ही

अपने वर्ग के द्वारा

पीड़ित पक्ष ने भी दुआ दी

बदला कुछ नहीं

पीड़ितों को अब भी सुख नहीं

  • 3. समय

समय सबसे बलवान है

समय ही सब करता है

सब करने वाला

सबसे बलवान

झेलता भी है

स्वयं को

सब करके

ग़ज़ब करके

ग़ज़ब उसका झेलना है

सब करके

अपने ही कर्मों से तंग आकर 

वह सोचने लगा है

जनता क्रांति कर दे।

  • 4. जब अंधेरा देखा

उगता सूरज देखा

और प्रेम-भरी आंखों का उजास देखा।

चमकता चांद देखा

और प्रेम-भरी आंखों का प्रकाश देखा।

टिमकता दीप देखा

और प्रेम-भरी आंखों का चकास देखा।

इसलिए उगता सूरज नहीं देखा अगर

चमकता चांद नहीं देखा अगर

टिमकता दीप नहीं देखा अगर

तो अंतर नहीं पड़ा मुझे

मैंने अंधेरा नहीं देखा।

इसलिए जब अंधेरा देखा

तो नितांत एकाकी और उदास देखा।

  • 5. पांच सौ मीटर की दूरी

पांच सौ मीटर की दूरी

पांच किलोमीटर की हो जाती है

या उससे अधिक

जब कोई पहाड़ आ जाता है

जब कोई नदी आ जाती है

जब कोई पहाड़ काट देता है

जब कोई नदी के दोनों पाट बांध देता है

पांच सौ मीटर की दूरी

पांच सौ मीटर ही रह जाती है

इसके लिए

देखना यह है कि

सामने सरकार आती है विशुद्ध वणिक

या किसी का सच्चा प्यार

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केशव शरण

प्रकाशित कृतियां-

तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह)

जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह)

दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह)

कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह)

एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह)

दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह)

क़दम-क़दम ( चुनी हुई कविताएं ) 

न संगीत न फूल ( कविता संग्रह)

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