हम हर बार ,बार बार मिलेंगे बाबा रहीमदास

मानबहादुर सिंह लहक सम्मान 2019 के चौथे आयोजन के तहत दिनांक 24- 01- 2019 को दोपहर एक बजे रामघाट चित्रकूट (नवगाँव) स्थित रहीम की कुटिया में कविता पाठ एवं परिचर्चा गोष्ठी सम्पन्न हुई । गोष्ठी का संयोजन युवा कवि नारायण दास गुप्त ने किया एवं अध्यक्षता डा़ कर्णसिंह चौहान ने की । गोष्ठी के मुख्य वक्ता वरिष्ठ कथाकार / आलोचक नीलकान्त थे ।संचालन उमाशंकर सिंह परमार ने किया ।कविता पढ़ते हुए बाँदा के युवा गीतकार रामकरण साहू ने अपने गीतों व ओजस्वी गायन से रामघाट में घूम रहे यात्रियों को आकर्षित किया उनके गीत “लिख सको तो माँ की ममता लिखो” पर श्रोताओं ने ताली बजाई ।युवा कवि नारायण दास गुप्त ने अपनी कविता “चित्रकूट दर्शन” के द्वारा इस तीर्थ की दुर व्यवस्था और उपेक्षा पर कटाक्ष किया और बताया कि चित्रकूट मेँ अब आस्था की आत्मीयता नही बजार की खोखली चमक काबिज हो चुकी है ।

उमाशंकर सिंह परमार ने लौटना , एक प्रेम कविता , प्रेम के खि़लाफ़ तीन कविताओं का पाठ किया । इन कविताओं की मुख्य अन्तर्वस्तु सामयिक खतरों से मुठ़भेड करती रचनात्मकता का सवाल उठाया गया । प्रद्युम्न कुमार सिंह ने अपनी कविता पुस्तक मेला , और ढीठ़ लड़कियों का पाठ किया । इन कविताओं में बाज़ार और मनुष्य व पारस्परिक अधूरेपन को रेखांकित किया गया था ।वरिष्ठ पत्रकार अरुण खरे ने अपनी कविताओं के माध्यम से जीवन के विभिन्न पक्षों का चित्रण किया । लहक सम्पादक कवि निर्भय देवयांस ने सिगरेट और अच्छा बच्चा कविताओं के साथ अपनी गज़लों का भी पाठ किया ।कोलकाता से आए युवा कवि रामगोपाल परीक ने अपनी छोटी कविताओं व गज़लों का पाठ किया। इन छोटी छोटी कविताओं के माध्यम से उन्होंने क्षीण होते मानवीय मूल्यों पर बात की।

बाँदा के वरिष्ठ कवि जवाहरलाल जलज ने अपनी कविता “रहीम हम आएँगे” का पाठ किया और अपने वक्तव्य में उन्होंने रहीम, तुलसी व केदारनाथ अग्रवाल तीनों की चेतना को एक साथ परखा । मुख्य वक्ता नीलकान्त ने कहा कि आज का कविता पाठ हमारे समय की कविता का पाठ है । रहीम की कुटिया में आप सब लोगों ने आकर एक बड़े काम की शुरुआत की है। अध्यक्षता कर रहे कर्णसिंह चौहान ने कहा कि यह एक अभियान की शुरुआत है। आज हम बीस लोग यहाँ हैं । हम हर वर्ष यहाँ एकत्र हों और रहीम -तुलसी की साझी विरासत, जिसकी समझ और जरूरत आज के लिहाज से बेहद जरूरी है, हम उसकी रक्षा करें और उस विरासत को लोगों तक ले जाएँ । तुलसीदास और रहीम एक साथ आमने सामने रहते थे एक दूसरे के संवाद रखते थे। यह संवाद व मित्रता ही सच्ची हिन्दुस्तानियत है ।हमारी सामाजिक संरचना की मूलभूत पहचान है जिसे आज की प्रतिक्रियावादी ताकतें नष्ट कर रही हैं ।इस कविता पाठ में चन्दन तिवारी सहित नवगाँव के प्रबुद्ध ग्रामीण व कुछ पत्रकार उपस्थित थे ।

उमाशंकर सिंह परमार के फेसबुक वॉल से साभार

You may also like...

Leave a Reply