नवनीत पांडेय की तीन कविताएं

प्रेम करनेवाले लड़के- लड़कियों
प्रेम करनेवाले
लड़के- लड़कियों!
सावधान!
अब तुम्हें
प्रेम करने से पहले
हजार बार
सोचना
समझना होगा
अभी तक
तुम्हारा संघर्ष
घर, परिवार,
जात-समाज से था
पर अब
इनके साथ
सरकारें भी हैं
तैयार हो जाओ!
देने के लिए
प्रेम परीक्षाएं
तय हो रहे हैं
पाठ्यक्रम प्रेम के
आ रही हैं बाज़ार में
तुम्हारे लिए
प्रेम कब, कैसे
और किससे किया जाए
दिशा- निर्देश देने वाली
परीक्षापयोगी
पाठ्य पुस्तकें
प्रेम करने से पहले
अब देनी होगी
परीक्षाएं प्रेम की
जिसमें होंगे कई- कई
प्रश्न- पत्र
हल करने होंगे
अनिवार्य रूप से
बिना किसी छूट
सारे के सारे प्रश्न
बहुत कड़े, कट्टर
और निरंकुश हैं
हमारे यहां के
परीक्षा नियंत्रक
प्रेम-परीक्षक
हर सत्ता से ऊपर
हर नियंत्रण से परे
जिनके यहां
फेल होने की सज़ा
सिर्फ मौत है
इसलिए
लेनी होगी
कोचिंग इनकी
देनी ही होंगी
परीक्षाएं प्रेम की
अगर
करना है प्रेम
बचाना है प्रेम!
प्रेम 
प्रेम
भय देता है
ये भय
बतर्ज़ लीलाधर जगूड़ी
शक्ति नहीं देता
सारी शक्तियां छीन
प्रेमियों को
प्रेम में
प्रेम से
……..बना देता है
प्रेम वह नहीं जो
दिखे या दिखाया जाए
प्रेम तो, बस! प्रेम है
जहां भी, जिस रूप में
पाया जाए
अक्षर है प्रेम
अक्षर है
प्रेम
क्षरते हैं
प्रेम के आग्रह
प्रेम के आश्रय
आलंब-अवलंब
नहीं होती भाषा
कोई व्याकरण
पाठशाला
प्रेम की….
फ़िर भी
पूरे आवेग के साथ
पढा, पहचाना,
जाना जाता है
व्याप जाता है
प्रेम
जहां भी
होता है
प्रेम!

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