मनी यादव की एक ग़ज़ल

तेरी यादों का अभी दिल पर असर बाकी है
जो करेंगे साथ में तय वो सफ़र बाकी है

यूँ तो अश्क़ों से मुकम्मल हो चुका है दरिया
फिर भी दरिया में मुहब्बत की लहर बाकी है

कुछ तो डर खुद से या मौला से तू आदम
तेरा तुझ पर ही अभी बदतर क़हर बाकी है

तीरगी दिखती रही तुझमे मनी दुनिया को
कुछ बता तुझमे उजाला किस कदर बाकी है

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