मनी यादव की चार ग़जलें

एक
ख़ुशबू तेरी पयाम लायी है
फिर फ़िज़ा में बहार आयी है
बेवफ़ा मैं नहीं, न ही तुम हो
फ़ितरते इश्क़ बेवफ़ाई है
इत्र चुपके से कान में बोला
खुशबू दिलदार से चुरायी है
कोई मंज़र नहीं रहा ग़म का
आज शायद वो मुस्करायी है
पहना ज्यों ही लिबास यादों का
खुद ग़ज़ल मेरे पास आई है

दो
दिल की दुआ में इतनी सी ताबीर हो जाए
बुझता चराग़े दिल किसी दिन मीर हो जाए

नजरों से ओझल ही न हो पाये सनम मेरा
हर चेहरा उसकी फ़क़त तस्वीर हो जाए

ख़्वाहिश है जब हो जिंदगी में सामना उस पल
तेरी नज़र मेरे लिये शमशीर हो जाए

नाकामियां तेरा मुकद्दर है मनी लेकिन
मरहम जमाने को तेरी ये पीर हो जाए

तीन
आंखों में दिल का द्वार होता है
बेरुख़ी में भी प्यार होता है
वक़्त दुश्मन नहीं है इंसा का
वक़्त इंसा का यार होता है
इश्क़ भी कैद है कफ़स में अब
इश्क़ का भी शिकार होता है
ज़िन्दगी में मधुर लफ़्ज़ों का
उम्र भर इख़्तियार होता है
अश्क़ शब भर नही ठहर सकता
पलकों से भी क़रार होता है

चार
अगर ख़ुद का ही मैं आईना हो जाता
तो शायद मैं कभी इंसां बन पाता
जमीं से आसमां जाते मुसाफ़िर सुन
कभी भी आसमां में घर नही बनता
बदल जाता है मौसम भी बहारों का
तेरी यादों में क्यों पतझड़ नहीं आता

1 Response

  1. Sling TV says:

    Hello there, I found your site by the use of Google while
    looking for a similar subject, your web site came up, it appears great.
    I have bookmarked it in my google bookmarks.
    Hi there, just become aware of your blog via Google,
    and located that it is really informative. I am going to watch out for brussels.
    I’ll be grateful in the event you proceed this in future. Lots
    of other folks will be benefited from your writing.
    Cheers!

Leave a Reply